कोई बल्लेबाज किसी गेंद की आरंभिक चलल जो `12 ms^(-1)` है, में बिना परिवर्तन किये उस पर हिट लगाकर सीधे गेंदबाज की दिशा में वापस भेज देता है । यदि गेंद की संहिति `0.15 kg` है, तो गेंद को दिया गया आवेग ज्ञात कीजिये । (गेंद की गति रैखिक मानिये)।
कोई बल्लेबाज किसी गेंद की आरंभिक चलल जो `12 ms^(-1)` है, में बिना परिवर्तन किये उस पर हिट लगाकर सीधे गेंदबाज की दिशा में वापस भेज देता है । यदि गेंद की संहिति `0.15 kg` है, तो गेंद को दिया गया आवेग ज्ञात कीजिये । (गेंद की गति रैखिक मानिये)।
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आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्या ऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब 'हाँ' है, तो आपको समय प्रबंधन सोखने की जरूरत है। समय प्रबंधन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेतरतीब ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़ा शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबंधन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योंकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग कर सकते है। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घंटे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समय बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है परंतु सबसे अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समय प्रबंधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय प्रबंधन सीखने की जरूरत कब है?
आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्या ऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब 'हाँ' है, तो आपको समय प्रबंधन सोखने की जरूरत है। समय प्रबंधन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेतरतीब ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़ा शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबंधन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योंकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग कर सकते है। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घंटे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समय बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है परंतु सबसे अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समय प्रबंधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय का अभाव उन्हें शत्रु जैसा लगता है. जो
आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्या ऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब 'हाँ' है, तो आपको समय प्रबंधन सोखने की जरूरत है। समय प्रबंधन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेतरतीब ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़ा शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबंधन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योंकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग कर सकते है। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घंटे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समय बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है परंतु सबसे अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समय प्रबंधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय के बारे में सच है ?
आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्याऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब हाँ है, तो आपको समय प्रबन्धन सीखने की जरूरत है। समय प्रबन्धन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेहतरीन ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़े शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबन्धन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग. कर सकते हैं। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर । लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घण्टे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समा बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है, परन्तु सबसे ' अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समयप्रबन्धन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय प्रबन्धन सीखने की जरूरत कब है?
Given that the lengths of the paths of a ball thrown with different speeds by two boys are the same, if they take 0.6 seconds and 1 second respectively to cover the said length, what is the average speed of travel for the first throw, if the same for the second is 96 km/h? दिया गया है कि दो लड़कों के द्वारा अलग-अलग चाल से फेंकी गयी गेंदों के मार्ग की लंबाई समान है | यदि उन्हें इस लंबाई तक जाने में क्रमशः 0.6 सेकंड और 1 सेकंड लगते हैं, तो पहली थ्रो में गेंद की औसत चाल ज्ञात करें, यदि इसी के लिए दूसरी गेंद की ओऔसत चाल 96 किमी/घंटा है|
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये लेखक ने बताया है कि कितना अच्छा होता, यदि नाक होती ही नहीं। नाक के कारण मनुष्य चिंता में पड़कर परेशान रहता है। नाक बचाने के लिए मुकदमेबाजी में पड़ता है। ऋण लेकर बड़े-बड़े उत्सव करता है। दूसरों के मुकाबले में खड़ा होने के लिए महँगी किश्तों में टी.वी., फ्रिज और कूलर खरीदता है। बच्चों को महँगे स्कूलों में पढ़ाता है। कहने का अर्थ यह है कि वह हर छोटी-से-छोटी बात को नाक का प्रश्न बना लेता है। व्यापार करने वाले लोग पुलिस, आयकर अधिकारियों तथा अन्य अनेक लोगों को रिश्वत देते हैं। बुरा समय आने पर यही व्यक्ति दूसरों के समाने अपनी नाक को रगड़ने लगता है। लेखक ने नाक की अच्छाइयाँ भी बताई हैं। नाक का हमारे मुख पर बड़ा महत्त्व है। मुख पर सुंदर लंबी नाक शोभा बढ़ाती है। अतः कुछ लोग नाक न होने पर नाक लगाते हैं। अतः नाक हमारे लिए बहुत आवश्यक है। चाहे वह लंबी, छोटी, चपटी किसी भी प्रकार की हो। नाक के बिना मुनष्य का मुख ऐसा लगता है जैसे बिना छज्जे के मकान का सामने का हिस्सा। यदि नाक सुंदर है, तो बहुत अच्छी बात है। कवियों ने सुंदर नाक का वर्णन बहुत अधिक किया है। उन्होंने नायिकाओं के नाक की अनेकानेक उपमाएँ दी हैं। इन उपमानों में तोते की नाक की उपमा तो बड़ी विचित्र है।नाक हमारे शरीर का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंग है। यह बहुत ऊँचा अंग है। मुख पर किसी भी अंग की कमी या विकृति को छिपाया जा सकता है परंतु कटी नाक को किसी प्रकार से नहीं छिपाया जा सकता। नाक न रहने पर व्यक्ति कुरूपता का शिकार हो जाता है। 'चाहे व लम्बी, छोटी, चपटी किसी भी प्रकार की हो। वाक्य मेंकिस विशेषण का प्रयोग किया गया है?
If a train runs with the speed of 48 km/hr, it reaches its destination late by 12 minutes. However, if its speed in 64 km/hr it is late by 3 minutes only. The right time for the train to cover the journey (in minutes) is: यदि कोई ट्रेन 48/घंटा की चाल से चलती है, तो यह अपने गंतव्य पर 12 मिनट की देरी से पहँचती है| हालाँकि जब इसकी चाल 64 किमी/घंटा होती है, तो यह केवल 3 मिनट की देरी से पहुँचती है | इस यात्रा को पूरा करने में ट्रेन द्वारा लिया गया सही समय है -
आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। गाँव की छवि में क्या शामिल नहीं है?
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- तीन थेलो A ,B तथा C में क्रमश : 6 लाल ,4 सफ़ेद ,2 लाल 6 सफ़ेद...
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- तीन थैलों में रंगीन गेंदें निम्न सारणी में दर्शाये गए तरह से आबंटित की...
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- एक थैले 3 में लाल और 7 काली गेंदे है । एक - एक करके बिना प्रतिस्थापन...
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