Home
Class 10
PHYSICS
प्राकृतिक संसाधनों को कितनी श्रेणियों मे...

प्राकृतिक संसाधनों को कितनी श्रेणियों में बाँटा जा सकता है ? विस्तार से समझाइए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

मानव के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग में आने वाली हर वस्तु संसाधन कहलाती है । जो संसाधन हमें प्रकृति से प्राप्त होते हैं तथा जिनका प्रयोग हम सीधा अर्थात् उसमें कोई भी बदलाव किये बिना करते हैं, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं।
प्राकृतिक संसाधनों को निम्न प्रकारों में बाँटा जा सकता है-
(i) विकास एवं प्रयोग के आधार पर
(ii) उद्गम या उत्पत्ति के आधार पर
(iii) भण्डारण या वितरण के आधार पर
(iv) नव्यकरणीयता के आधार पर।
इनका विस्तृत वर्णन निम्न प्रकार है-
(i) विकास एवं प्रयोग के आधार पर- इन्हें भी दो भागों में विभक्त किया जो सकता है-
(अ) वास्तविक संसाधन-ये वे संसाधन हैं जिनकी मात्रा हमें ज्ञात है तथा जिनका उपयोग अभी वर्तमान में हम कर रहे हैं, ये वस्तुएँ वास्तविक संसाधन कहलाती हैं। उदाहरण- पश्चिम एशिया में खनिज तेल की मात्रा, जर्मनी में कोयले की मात्रा तथा महाराष्ट्र में काली मिट्टी की मात्रा इत्यादि ।
( ब) सम्भाव्य संसाधन-ये वे संसाधन हैं जिनकी मात्रा का अनुमान नहीं लगा सकते व जिनका उपयोग अभी नहीं किया जा रहा है परन्तु आगे आने वाले समय में कर सकते हैं। इन्हें सम्भाव्य संसाधन कहते हैं। उदाहरणार्थ 20 वर्ष पहले तेजी से चलने वाली पवन चक्कियाँ एक सम्भाव्य संसाधन थीं परन्तु आधुनिक समय में तकनीकी प्रगति के कारण ही हम पवन चकिकियों का प्रयोग आज कर पा रहे हैं। लद्दाख में उपलब्ध यूरेनियम भी एक सम्भाव्य संसाधन है जिसका प्रयोग हम आने वाले समय में कर सकते हैं।
(ii) उद्गम या उत्पत्ति के आधार पर-इसे भी दो भागों में बाँटा जा सकता है-
( अ ) जैव संसाधन - सजीव या जीवित वस्तुएँ जैव संसाथन हैं । उदाहरण-जीव-जन्तु, पेड़-पौथे, मानव आदि ।
( ब ) अजैव संसाधन-निर्जीव वस्तुएं अजैव संसाधन हैं उदाहरण- वायु, मृदा, प्रकाश आदि।
(iii) भण्डारण या वितरण के आधार पर-इन्हें भो दो भागों में बाँटा गया
( अ) सर्वव्यापक-वे वस्तुएँ जो सभी स्थानों पर सुलभता से उपलब्ध हों, उन्हें सर्वव्यापक संसाधन कहते हैं, जैसे-वायु ।
(ब) स्थानिक संसाधन-वे वस्तुएँ जो कुछ ही स्थानों पर उपलब्ध होती हैं, उन्हें स्थानिक संसाधन कहते हैं, जैसे- ताँबा, लौह अयस्क आदि।
(iv) नव्यकरणीयता के आधार पर-इस आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं-
(i) नवीकरणीय संसाधन-वे वस्तुएँ जिनका निर्माण तथा प्रयोग दुबारा किया जा सकता है तथा जिन वस्तुओं की पूर्ति दुबारा आसानी से हो सकती है, वे वस्तुएँ नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं । नवीकरणीय संसाधन असीमित होते हैं ।
उदाहरण-सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा।
(ii) अनवीकरणीय संसाधन-वे वस्तुएँ जिनका भण्डार सीमित होता है तथा जिनके निर्माण होने की आशा बिल्कुल नहीं रहती या निर्माण होने में अधिक समय लगता है, अनबीकरणीय संसाधन कहलाते हैं। उदाहरण- पेट्रोलियम, कोयला, प्राकृतिक गैस।
हमें किसी भी संसाधन का लापरवाही से प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि लगातार और अधिक प्रयोग करने से ये जल्दी समाप्त हो जाते हैं और आने वाली पीढ़ियाँ इनका प्रयोग नहीं कर पायेंगी ।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • प्रमुख प्राकृतिक संसाधन

    SANJEEV PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (वस्तुनिष्ट प्रश्न)|10 Videos
  • प्रमुख प्राकृतिक संसाधन

    SANJEEV PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न)|13 Videos
  • प्रमुख प्राकृतिक संसाधन

    SANJEEV PUBLICATION|Exercise पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (लघुत्तरात्मक प्रश्न)|5 Videos
  • प्रकाश (LIGHT)

    SANJEEV PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर आंकिक प्रश्न -|16 Videos
  • ब्रह्माण्ड एवं जैव विकास

    SANJEEV PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न (निबंधात्मक प्रश्न)|6 Videos