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Class 10
BIOLOGY
नाइट्रोजनी अपशिष्ट कितने प्रकार के होते ...

नाइट्रोजनी अपशिष्ट कितने प्रकार के होते हैं? समझाइए।

लिखित उत्तर

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नाइट्रोजनी अपशिष्ट तीन प्रकार के होते हैं (अ) अमोनिया (ब) यूरिया (स) यूरिक अम्ल।
(अ) अमोनिया (Ammonia)-ऐसे जन्तु जो अमोनिया का उत्सर्जन करते हैं. उन्हें अमोनोटेलिक जन्तु कहते हैं। अधिकतर जल में रहने वाले जन्तु समह इस प्रकार के होते हैं, क्योंकि जलीय वातावरण में घुलनशील अमोनिया परिवर्तन के देह से सामान्य विसरण द्वारा जलीय वातावरण में चली जाती है। उत्सर्जन की इस विधि को अमोनिया उत्सर्जीकरण कहते हैं। उदाहरण-अमीबा, पैरामिशियम, अस्थिल मछलियाँ, मेंढक का टेडपोल, लारवा तथा जलीय कीट आदि।
(ब) यूरिया (Urea)-ऐसे जन्तु जो नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों का त्याग मुख्यतया यूरिया (Urea) के रूप में करते हैं, उन्हें यूरियोटेलिक जन्तु कहते हैं। जन्तुओं में प्रोटीन उपापचय के दौरान अमोनिया बनती है। यह अमोनिया `CO_2` के साथ आर्थिन चक्र द्वारा यूरिया का निर्माण करती है। यह कार्य यकृत में पूर्ण होता है, जिसे वृक्कों द्वारा निस्यंदन कर उत्सर्जित किया जाता है। उत्सर्जन की इस विधि को यूरिया उत्सर्जीकरण कहते हैं। उदाहरण-वयस्क उभयचर, स्तनधारी और समुद्री मछलियाँ आदि।
(स) यूरिक अम्ल (Uric acid)-ऐसे जन्तु जो मुख्यतया नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थों का त्याग यूरिक अम्ल के रूप में करते हैं, उन्हें यूरिकोटेलिक जन्त कहते हैं एवं इस विधि को यूरिको उत्सर्जीकरण कहते हैं। इन जन्तुओं में यूरिक अम्ल का एक सफेद गाठी लेई अर्थात् पेस्ट (Paste) के रूप में निष्कासन होता है. जो जल संरक्षण में सहायक है। उदाहरण-सरीसृप, पक्षी, कीट आदि।
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