मस्तिष्क के विभिन्न भागों के कार्य -
(1) प्रमस्तिष्क गोलार्द्ध (Cerebral hemispheres)-स्तनधारियों में यह भाग सबसे अधिक विकसित होता है। सचेतन संवेदनाओं (Conscious sensations) इच्छाशक्ति एवं ऐच्छिक गतियों, ज्ञान, स्मृति, वाणी तथा चिन्तन के केन्द्र होते हैं। विभिन्न ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त प्रेरणाओं का इसमें विश्लेषण एवं समन्वय (Coordination) होकर ऐच्छिक पेशियों से अनुकूल प्रतिक्रियाओं की प्रेरणाएँ प्रसारित की जाती हैं। इनमें निकलने वाले कुछ चालक तन्तु केन्द्रीय तन्त्रिका तंत्र के कुछ अन्य भागों की क्रिया के नियंत्रण की प्रेरणाओं को ले जाते हैं।
(ii) डाएनसिफैलॉन (Diencephelon)-अग्रमस्तिष्क के इस भाग में स्थित दृष्टि थैलेमाई उन समस्त कायिक (somatic) संवेदी प्रेरणाओं के मार्गवाहक होते हैं जो अग्र, मध्य, पश्च मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु (Spinal cord) में ऐच्छिक गतियों से सम्बन्धित होती है। इस भाग में अत्यधिक ताप, शीत, पीड़ा आदि अभिज्ञान के केन्द्र स्थित रहते हैं। इनका अधरतलीय भाग, हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र का संगठन केन्द्र माना गया है अर्थात् भूख, प्यास, नींद, थकावट, ताप नियंत्रण, सम्भोग, प्यार, घृणा, तृप्ति, क्रोध आदि मनोभावनाओं का भी बोध केन्द्र होता है। इसके अतिरिक्त यह इसी भाग से बनी पृष्ठ तल पर स्थित पीनियल काय (Pineal body) तथा पिट्यूटरी ग्रन्थि अनेक महत्त्वपूर्ण हारमोन्स का स्त्रावण करती है। इसी भाग में स्थित दृष्टि किएज्मा नेत्रों से प्राप्त दृष्टि संवेदनाओं को प्रमस्तिष्क गोलार्डों में पहुँचाती है। अतः इस पिण्ड के निकालने या क्षतिग्रस्त होने पर प्राणी अंधा हो जाता है।
(iii) मध्य मस्तिष्क (Mid Brain) के कार्य-यह चार पिण्डों से बना होता है। ऊपर के दो पिण्ड दृष्टि से सम्बन्धित हैं तथा निचले दो पिण्ड सुनने के लिए उत्तरदायी हैं।
(iv) सैरिबैलम (Cerebellum)-पश्च मस्तिष्क के इस भाग द्वारा विभिन्न ऐच्छिक पेशियों, सन्धियों इत्यादि में स्थित ज्ञानेन्द्रियों से संवेदना प्राप्त की जाती है तथा उनकी गतियों का नियमन एवं आवश्यकता अनुसार समन्वय करना इस भाग का कार्य है। सन्तुलन कार्य भी करता है।
(v) मैड्यूला ऑब्लोंगेटा (Medulla oblongata)-यह मस्तिष्क का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भाग माना गया है क्योंकि शरीर की समस्त अनैच्छिक क्रियाओं (Involuntary activities) का नियंत्रण इस भाग द्वारा किया जाता है अर्थात् हृदय, स्पंदन, श्वसन दर, उपापचय, श्रवण, सन्तुलन, आहार नाल की क्रमाकुंचन गति, रक्त वाहिनियों के फैलने व सिकुड़ने की क्रिया, विभिन्न कोशिकाओं की स्त्रावण क्रिया तथा भोजन निगलने की गति इत्यादि समस्त क्रियाएँ इस भाग के नियंत्रण में रहती हैं। नेत्रों व पश्च पादों की पेशियों का नियंत्रण भी इसी भाग
के द्वारा किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भाग मस्तिष्क के शेष भाग एवं मेरुरज्ज के मध्य सभी प्रेरणाओं के संवहन मार्ग का कार्य करता है।
