अग्र मस्तिष्क (Fore Brain)-अग्र मस्तिष्क प्रमस्तिष्क, थैलेमस तथा हाइपोथैलेमस से बना होता है। प्रमस्तिष्क पूरे मस्तिष्क के 80 से 85 प्रतिशत भाग का निर्माण करता है। प्रमस्तिष्क इच्छाशक्ति, ज्ञान, स्मृति, वाणी तथा चिन्तन का केन्द्रीय अनुलग्य-चित्रकी सहायता से दो भागों में विभाजित होता है, जिन्हें क्रमशः दायाँ व बायाँ प्रमस्तिष्क गोलार्ध (Cerebral hemisphere) कहते हैं। दोनों प्रमस्तिष्क गोलार्ध कार्पस केलोसम द्वारा जुड़े होते हैं।
प्रत्येक प्रमस्तिष्क गोलार्ध में धूसर द्रव्य पाया जाता है, जिसे कार्टेक्स (Cartex) कहते हैं। अन्दर की ओर पाया जाने वाले श्वेत द्रव्य को मध्यांश (Medulla) कहते हैं। धूसर द्रव्य में कई तन्त्रिकाएँ पाई जाती हैं। इनकी अधिकता के कारण ही इस द्रव्य का रंग धूसर दिखाई देता है।
प्रमस्तिष्क चारों ओर से थैलेमस से घिरा होता है। थैलेमस संवेदी व प्रेरक संकेतों का केन्द्र है। अग्रमस्तिष्क के डाइएनसीफेलॉन (Diencphanol) भाग पर हाइपोथैलेमस स्थित होता है। यह भाग भूख, प्यास, निद्रा, ताप, थकान, मनोभावनाओं की अभिव्यक्ति आदि का ज्ञान कराता है।
मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)-यह छोटा और मस्तिष्क का संकुचित भाग है। यह चार पिण्डों से बना होता है, जो हाइपोथैलेमस तथा पश्च मस्तिष्क के मध्य पाया जाता है। इन चारों पिण्डों को संयुक्त रूप से कॉर्पोरा क्वाड्रीजेमीना कहते हैं। ऊपरी दो पिण्ड दृष्टि के लिए तथा निचले दो पिण्ड श्रवण से अर्थात् सुनने से सम्बन्धित हैं।
