पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बिच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिणाम ज्ञात करने के लिए सूत्र लिखे।
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बिच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिणाम ज्ञात करने के लिए सूत्र लिखे।
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एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। 'न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की वाक्य को कर्मवाच्य में बदलिए!
A car moves a distance of 600 km with uniform speed. The number of hours taken for the journey is 2/3 of the number representing speed in km/h. The time taken to cover the distance is: एक कार एकसमान चाल के साथ 600 किमी की दूरी तय करती है। यात्रा के लिए लगने वाले घंटों की संख्या किमी/घंटा में चाल का प्रतिनिधित्व करने वाली संख्या का 2/3 है। दूरी तय करने में लगने वाला समय है:
परिरक्षण प्रभाव (σ) एवं प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff)|परिरक्षण नियतांक (σ) को ज्ञात करने के लिए स्लेटर का नियम |परमाण्वीय त्रिज्या |परमाण्वीय आकार को प्रभावित करने वाले कारक |आयनन ऊर्जा |आयनन विभव को प्रभावित करने वाले कारक |आयनन ऊर्जा की तुलना |आयनन ऊर्जा के अनुप्रयोग |इलेक्ट्रॉन बंधुता |विद्युत ऋणात्मकता |OMR|सारांश
The speed of a boat in still water is 6 km/h. Time taken by the boat to cover a certain distance upstream is 3 hours more than the time taken to cover the same distance downstream. If the speed of the stream is 2 km/h, then what is the total distance, upstream and downstream, covered by the boat? स्थिर जल में किसी नाव की चाल 6 किमी/घंटा है | धारा के विपरीत किसी निश्चित दूरी को तय करने में नाव को लगने वाला समय धारा के अनुकूल इसी दूरी को तय करने में लगने वाले समय से 3 घंटा अधिक है | यदि धारा की चाल 2 किमी/घंटा है, तो नाव के द्वारा धारा के विपरीत तथा धारा के अनुकूल तय की गयी कुल दूरी ज्ञात करें |
Revision |धकेलने की अपेक्षा खिचना अधिक आसान होता है |खुरदुरे नत तल पर फिसलती वस्तु का त्वरण |ब्लॉक तथा सतह के मध्य घर्षण की स्थिति सहित घिरनी |OMR|Summary
विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी मैं सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। वे उसके प्रति सहानुभूति प्रकट करने और उसे समझाने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान् जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े महात्मा, जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी । 'शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है। लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थित कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का समय उपयुक्त होता है। (अध्ययन - निबंध, रामचंद्र शुक्ल) विद्या का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों को साथियों की कमी महसूस नहीं होती है क्योंकि
विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी में सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। चे उसके प्रति सहानुभूति प्रकट करने और उसे समझने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान् जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े महात्मा जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है । लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरूष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थिर कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का समय उपयुक्त होता है। विद्या का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों को साथियों की कमी महसूस नहीं होती है क्योंकि
विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी में सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। वे उसके प्रति सहानुभूति । प्रकट करने और उसे समझाने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े. महात्मा, जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है। लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थित कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का सम उपयुक्त होता है। विद्या का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों को साथियों की कमी महसूस नहीं होती है क्योंकि
विद्याभ्यासी पुरुष को साथियों का अभाव कभी नहीं रहता। उसकी कोठरी मैं सदा ऐसे लोगों का वास रहता है, जो अमर हैं। वे उसके प्रति सहानुभूति प्रकट करने और उसे समझाने के लिए सदा प्रस्तुत रहते हैं। कवि, दार्शनिक और विद्वान् जिन्होंने प्रकृति के रहस्यों का उद्घाटन किया है और बड़े-बड़े महात्मा, जिन्होंने आत्मा के गूढ़ रहस्यों की थाह लगा ली है, सदा उसकी बातें सुनने और उसकी । 'शंकाओं का समाधान करने के लिए उद्यत रहते हैं। बिना किसी उद्देश्य के सरसरी तौर पर पुस्तकों के पन्ने उलटते जाना अध्ययन नहीं है। लिखी हुई बातों को विचारपूर्वक पूर्णरूप से हृदय से ग्रहण करने का नाम अध्ययन है। प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपने पढ़ने का उद्देश्य स्थित कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे मुख्य बात यह है कि पढ़ना नियमपूर्वक हो अर्थात् इसके लिए नित्य का समय उपयुक्त होता है। (अध्ययन - निबंध, रामचंद्र शुक्ल) अध्ययन के लिए किस नियम का दृढ़ता से पालन होना चाहिए?
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