Home
Class 12
MATHS
[" अंकों "0,1,2,3,4,5" तथा "6" से कितनी ...

[" अंकों "0,1,2,3,4,5" तथा "6" से कितनी चार-अंकीय सम संख्याएँ "],[" काई जा सकती हैं,यदि किसी भी अंक की पुनरावृत्ति न हो? "]

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

एक तीन साल के बच्चे से किसी भी ऐसे विषय पर बातचीत की जा सकती हैं, जो उसके दायरे में आता हो।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये लेखक ने बताया है कि कितना अच्छा होता, यदि नाक होती ही नहीं। नाक के कारण मनुष्य चिंता में पड़कर परेशान रहता है। नाक बचाने के लिए मुकदमेबाजी में पड़ता है। ऋण लेकर बड़े-बड़े उत्सव करता है। दूसरों के मुकाबले में खड़ा होने के लिए महँगी किश्तों में टी.वी., फ्रिज और कूलर खरीदता है। बच्चों को महँगे स्कूलों में पढ़ाता है। कहने का अर्थ यह है कि वह हर छोटी-से-छोटी बात को नाक का प्रश्न बना लेता है। व्यापार करने वाले लोग पुलिस, आयकर अधिकारियों तथा अन्य अनेक लोगों को रिश्वत देते हैं। बुरा समय आने पर यही व्यक्ति दूसरों के समाने अपनी नाक को रगड़ने लगता है। लेखक ने नाक की अच्छाइयाँ भी बताई हैं। नाक का हमारे मुख पर बड़ा महत्त्व है। मुख पर सुंदर लंबी नाक शोभा बढ़ाती है। अतः कुछ लोग नाक न होने पर नाक लगाते हैं। अतः नाक हमारे लिए बहुत आवश्यक है। चाहे वह लंबी, छोटी, चपटी किसी भी प्रकार की हो। नाक के बिना मुनष्य का मुख ऐसा लगता है जैसे बिना छज्जे के मकान का सामने का हिस्सा। यदि नाक सुंदर है, तो बहुत अच्छी बात है। कवियों ने सुंदर नाक का वर्णन बहुत अधिक किया है। उन्होंने नायिकाओं के नाक की अनेकानेक उपमाएँ दी हैं। इन उपमानों में तोते की नाक की उपमा तो बड़ी विचित्र है।नाक हमारे शरीर का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंग है। यह बहुत ऊँचा अंग है। मुख पर किसी भी अंग की कमी या विकृति को छिपाया जा सकता है परंतु कटी नाक को किसी प्रकार से नहीं छिपाया जा सकता। नाक न रहने पर व्यक्ति कुरूपता का शिकार हो जाता है। 'चाहे व लम्बी, छोटी, चपटी किसी भी प्रकार की हो। वाक्य मेंकिस विशेषण का प्रयोग किया गया है?

आज शिक्षा के क्षेत्र में भी बाजारीकरण हो जाने के कारण शिक्षा महँगी और गरीबों की पहुँच से बाहर हो चुकी है। एक ओर जा रूचि और उपयोगिता के अनुसार उपयुक्त शिक्षा पाने के लिए गरीबों के पास धन उपलब्ध नहीं है, तो वहीं जो संपन्न हैं उनके पास समय का अभाव है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरी है। पिछले वर्ष देश के गरीब और स्कूल ना जा सकने वाले बच्चों के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाते हुए ई-शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत करते हुए 'स्वयं डॉट जीओवी डॉट इन वेब पोर्टल की शुरूआत की गई है। इससे बच्चे ऑनलाइन शिक्षा पा सकेंगे और उन्हें किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। इस पोर्टल की विशेषता यह है कि इससे छात्र मैनेजमेंट. इन्जीनियरिंग सहित तमाम पाठ्यक्रमों की पढ़ाई घर बैठे कर सकेंगे। इससे छात्रों को घर बैठे ही सर्टिफिकेट और डिग्री भी हासिल होंगे, जो किसी भी विश्वविद्यालय में मान्य होंगे। ऑनलाइन एजुकेशन के प्रति लोगों का बढ़ता उत्साह देखकर कहा जा सकता है कि भारत में इसका भविष्य उज्ज्वल है। यही कारण है कि अब अधिकतर शिक्षण संस्थान इस व्यवस्था को अपना रहे हैं। पढ़ाई का बढ़ता खर्च और किसी भी प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री प्राप्त करने के लिए कॉलेजों का चुनाव, प्रवेश परीक्षा और फिर एक साथ मोटी फीस चुकाना युवाओं की बढ़ती संख्या के लिए काफी मुश्किल साबित हो रहा है। भारत में केवल बारह प्रतिशत छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलता है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा देने वाली कंपनियों के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार बन गया है। आज एक-दूसरे का समझने-जानने की जिज्ञासा भी लोगों में बढ़ी हुई देखी जाती है। ऐसे में किसी देश की भाषा सीखना आवश्यक हो जाता है क्योंकि भाषा सीखने से उस देश की संस्कृति तथा अन्य बातें समझी जा सकती हैं। इसीलिए भारत के प्रति भी रुचि बढ़ी है और हिंदी सीखने-सिखाने की माँग भी बढ़ी है। यह भारत के लिए, विशेषकर हिंदी भाषा के लिए शुभ संकेत है। भारत में ऑनलाइन शिक्षा में निरंतर रुचि बढ़ने का उपयुक्त कारण नहीं है

आज शिक्षा के क्षेत्र में भी बाजारीकरण हो जाने के कारण शिक्षा महँगी और गरीबों की पहुँच से बाहर हो चुकी है। एक ओर जा रूचि और उपयोगिता के अनुसार उपयुक्त शिक्षा पाने के लिए गरीबों के पास धन उपलब्ध नहीं है, तो वहीं जो संपन्न हैं उनके पास समय का अभाव है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरी है। पिछले वर्ष देश के गरीब और स्कूल ना जा सकने वाले बच्चों के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाते हुए ई-शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत करते हुए 'स्वयं डॉट जीओवी डॉट इन वेब पोर्टल की शुरूआत की गई है। इससे बच्चे ऑनलाइन शिक्षा पा सकेंगे और उन्हें किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। इस पोर्टल की विशेषता यह है कि इससे छात्र मैनेजमेंट. इन्जीनियरिंग सहित तमाम पाठ्यक्रमों की पढ़ाई घर बैठे कर सकेंगे। इससे छात्रों को घर बैठे ही सर्टिफिकेट और डिग्री भी हासिल होंगे, जो किसी भी विश्वविद्यालय में मान्य होंगे। ऑनलाइन एजुकेशन के प्रति लोगों का बढ़ता उत्साह देखकर कहा जा सकता है कि भारत में इसका भविष्य उज्ज्वल है। यही कारण है कि अब अधिकतर शिक्षण संस्थान इस व्यवस्था को अपना रहे हैं। पढ़ाई का बढ़ता खर्च और किसी भी प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री प्राप्त करने के लिए कॉलेजों का चुनाव, प्रवेश परीक्षा और फिर एक साथ मोटी फीस चुकाना युवाओं की बढ़ती संख्या के लिए काफी मुश्किल साबित हो रहा है। भारत में केवल बारह प्रतिशत छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलता है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा देने वाली कंपनियों के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार बन गया है। आज एक-दूसरे का समझने-जानने की जिज्ञासा भी लोगों में बढ़ी हुई देखी जाती है। ऐसे में किसी देश की भाषा सीखना आवश्यक हो जाता है क्योंकि भाषा सीखने से उस देश की संस्कृति तथा अन्य बातें समझी जा सकती हैं। इसीलिए भारत के प्रति भी रुचि बढ़ी है और हिंदी सीखने-सिखाने की माँग भी बढ़ी है। यह भारत के लिए, विशेषकर हिंदी भाषा के लिए शुभ संकेत है। गद्यांश में प्रयुक्त निम्नलिखित वाक्य को चार भागों में बाँटा गया है जिनमें से किसी एक भाग में अशुद्धि है। अशुद्ध भाग को पहचानकर चिन्हित कीजिए। आज एक दूसरे को (i)/ समझने-जानने की जिज्ञासा भी (ii)/लोगो में बढ़ी हुई (iii)/ देखी जाती है। (iv)

आज शिक्षा के क्षेत्र में भी बाजारीकरण हो जाने के कारण शिक्षा महँगी और गरीबों की पहुँच से बाहर हो चुकी है। एक ओर जा रूचि और उपयोगिता के अनुसार उपयुक्त शिक्षा पाने के लिए गरीबों के पास धन उपलब्ध नहीं है, तो वहीं जो संपन्न हैं उनके पास समय का अभाव है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरी है। पिछले वर्ष देश के गरीब और स्कूल ना जा सकने वाले बच्चों के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाते हुए ई-शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत करते हुए 'स्वयं डॉट जीओवी डॉट इन वेब पोर्टल की शुरूआत की गई है। इससे बच्चे ऑनलाइन शिक्षा पा सकेंगे और उन्हें किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। इस पोर्टल की विशेषता यह है कि इससे छात्र मैनेजमेंट. इन्जीनियरिंग सहित तमाम पाठ्यक्रमों की पढ़ाई घर बैठे कर सकेंगे। इससे छात्रों को घर बैठे ही सर्टिफिकेट और डिग्री भी हासिल होंगे, जो किसी भी विश्वविद्यालय में मान्य होंगे। ऑनलाइन एजुकेशन के प्रति लोगों का बढ़ता उत्साह देखकर कहा जा सकता है कि भारत में इसका भविष्य उज्ज्वल है। यही कारण है कि अब अधिकतर शिक्षण संस्थान इस व्यवस्था को अपना रहे हैं। पढ़ाई का बढ़ता खर्च और किसी भी प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री प्राप्त करने के लिए कॉलेजों का चुनाव, प्रवेश परीक्षा और फिर एक साथ मोटी फीस चुकाना युवाओं की बढ़ती संख्या के लिए काफी मुश्किल साबित हो रहा है। भारत में केवल बारह प्रतिशत छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलता है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा देने वाली कंपनियों के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार बन गया है। आज एक-दूसरे का समझने-जानने की जिज्ञासा भी लोगों में बढ़ी हुई देखी जाती है। ऐसे में किसी देश की भाषा सीखना आवश्यक हो जाता है क्योंकि भाषा सीखने से उस देश की संस्कृति तथा अन्य बातें समझी जा सकती हैं। इसीलिए भारत के प्रति भी रुचि बढ़ी है और हिंदी सीखने-सिखाने की माँग भी बढ़ी है। यह भारत के लिए, विशेषकर हिंदी भाषा के लिए शुभ संकेत है। उत्पत्ति की दृष्टि से 'ऑनलाइन' और 'शिक्षा' शब्द हैं क्रमशः

Recommended Questions
  1. [" अंकों "0,1,2,3,4,5" तथा "6" से कितनी चार-अंकीय सम संख्याएँ "],[" का...

    Text Solution

    |

  2. यदि तो संख्याएँ a तथा b दी गयी हो तो इनका गुणनफल किसके बराबर होता है ?

    Text Solution

    |

  3. अंको 0,1,2,3,4,5 का प्रयोग करके (जहाँ अंको को दोहराया जा सकता है) बनाई...

    Text Solution

    |

  4. एक कम्पनी द्वारा निर्मित 10% बल्व खराब निकलते हैं। 5 बल्बों के सैम्पल ...

    Text Solution

    |

  5. अंकों 1,2,3,4 से 4 अंकों की संख्या बनाई जाती है जिसमें अंकों की पुनराव...

    Text Solution

    |

  6. दो अंको की एक संख्या में इकाई स्थान का अंक दहाई स्थान के अंक से 3 अधिक...

    Text Solution

    |

  7. कक्षा के छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों की बारंबारता सारणी (संक्षिप्त) इ...

    Text Solution

    |

  8. सार्थक अंक |सार्थक अंकों से संबंधित अंकीय संक्रियाओ के नियम |OMR|Summa...

    Text Solution

    |

  9. एक तीन साल के बच्चे से किसी भी ऐसे विषय पर बातचीत की जा सकती है, जो उस...

    Text Solution

    |