दोहरान |एकलिंगी एवं द्विलिंगी पादपों के उदाहरण |नर एवं मादा युग्मक |परागण |निषेचन |फल एवं बीज का विकास |सारांश
नर जनन तंत्र |स्टोरली कोशिकाओं के कार्य |नर सहायक जनन ग्रंथि |अण्डाशय |मादा सहायक जनन ग्रंथियां |शुक्रजनन और अण्डजनन |निषेचन |सगर्भता तथा भ्रूणीय परिवर्धन
डाल्टन का आंशिक दाब का नियम|ग्राहम का विसरण दर का नियम |प्रश्न |Summary
नर जनन तंत्र |शुक्रजनन नलिका |Penis|नर सहायक जनन ग्रंथि |मादा सहायक जनन ग्रंथिया |निषेचन |अंगो का निर्माण
दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 16 भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का जिससे दबाता एक जन भाग दूसरे जन का पूछो किसी भाग्यवादी से यदि विधि अंक प्रबल है, पद पर क्यों देती न स्वयं वसुधा निज रतन उगल है? उपजाता क्यों विभव प्रकृति को सींच-सींच वह जल से क्यों न उठा लेता निज सचित अर्थ पाप के बल से, और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से। नर समाज का भाग्य एक है वह श्रम, वह भुज-बल है। जिसके सम्मुख झुकी हुई है। पृथ्वी, विनीत नभ-तल है। नर समाज का भाग्य क्या है?
अंड झिल्लियाँ - Revision|Ectopic Pregnancy|Teratogen|वृषण की आंतरिक संरचना|नर सहायक जनन ग्रंथि|बाह्य जनंनाग (वल्वा)|मादा में हार्मोनल नियंत्रण|आर्तव चक्र|शुक्रजनन|अंडजनन|निषेचन|युग्मक संलयन|अंगो का निर्माण|प्रसव|स्तनपान|Quiz|OMR