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PHYSICS
परमाणु के प्रारंभिक प्रतिरूप में यह माना...

परमाणु के प्रारंभिक प्रतिरूप में यह माना गया था की आवेश Ze का बिंदु अपमान धनात्मक नाभिक होता है जो त्रिज्या R का बिंदु अपमान धनात्मक नाभिक होता है जो त्रिज्या r दुरी पर विधुत क्षेत्र कितना है ?

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निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। शहीद की कौन-सी विशेषता बताई गई है ?

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। कविता में 'अंधकार' शब्द से आशय है-

निर्देशः कविता को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प का चयन कीजिए। एक ही दीया, स्नेह से भरा, प्रेम का प्रकाश, प्रेम से धरा, झिलमिला हवा को तिलमिला रहा ज्योति का निशान जो हिला रहा मुस्करा रहा है अंधकार पर। यह मजार है किसी शहीद का, दर्शनीय था जो चाँद ईद का, देश का सपूत था, गुमान था सत्य का स्वरूप नौजवान था जो चला किया सदा दुधार पर। हवा क्यों तिलमिला रही है ?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मानव जीवन में आत्मसम्मान का अत्यधिक महत्व है। आत्मसम्मान में अपने व्यक्तित्व को अधिकाधिक सशक्त एवं प्रतिष्ठित बनाने की भावना निहित होती है। इससे शक्ति, साहस, उत्साह आदि गुणों का जन्म होता है जो जीवन की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आत्मसमान की भावना से पूर्ण व्यक्ति संघर्षों की परवाह नहीं करता है और हर विषम परिस्थिति से टक्कर लेता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में पराजय का मुंह नहीं देखते तथा निरन्तर यश की प्राप्ति करते हैं। आत्मसम्मानी व्यक्ति धर्म, सत्य, न्याय और नीति के पथ का अनुगमन करता है उसके जीवन में ही सच्चे सुख और शांति का निवास होता है। परोपकार, जनसेवा जैसे कार्यों में उसकी रूचि होती है। लोकप्रियता और सामाजिक प्रतिष्ठा उसे सहज ही प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्ति में अपने राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा होती है तथा मातृभूमि की उन्नति के लिए वह अपने प्राणों को उत्सर्ग करने में सुख की अनुभूति करता है। चूंकि आत्मसम्मानी व्यक्ति अपने अथवा दूसरों की आत्मा का हनन नहीं करता है, इसीलिए वह ईर्ष्या-द्वेष जैसी भावनाओं से मुक्त होकर मानव मात्र को अपने परिवार का अंग मानता है। उसके हृदय में स्वार्थ, लोभ और अहंकार का भाव नहीं होता। निश्छल हृदय होने के कारण वह आसुरी प्रवृत्तियों से सर्वथा मुक्त होता है। निश्छल ह्दय होने से स्वाभिमानी व्यक्ति को क्या लाभ होता है

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