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Class 11
PHYSICS
कणों के किसी निकाय की गति को इसके...

कणों के किसी निकाय की गति को इसके द्रव्यमान केंद्र की गति और द्रव्यमान केंद्र के परित गति में अलग अलग करके विचार करना |दर्शाइए की - -
(a) `p = vec(Pi) + m_(i) vec(V)`, जहाँ `P_(i)` (`m_(i)` द्रव्यमान वाले ) I - वे कण का संवेग है, और `vec(P_(i)) = m_(i) vec(v_(i))` | ध्यान दें कि `vec(v_(i))` द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष i - वेग कण का वेग है | द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा का उपयोग करके यह भी सिद्ध कीजिए की `sum vec(P_(i)) = 0`
(b) `K = K' + 1//2 MV^(2)`
K कणों के निकाय की कुल गतिज ऊर्जा K' = निकाय की कुल गतिज ऊर्जा जबकि कणों की गतिज द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष ली जाये | `MV^(2)//2` सम्पूर्ण निकाय के (अर्थात निकाय के द्रव्यमान केंद्र के)
स्थानांतरण की ऊर्जा है | इस परिणाम का उपयोग पाठ्यपुस्तक के अनुछेद 7.14 में किया गया है |
(c ) `vec(L) = vec(L) = R xx M vec(V)`
जहाँ `vec(L) = sum vec(r_(i)) xx vec(P_(i))` द्रव्यमान के परित निकाय का कोणीय संवेग है जिसकी गणना में वेग द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष मापे गए हैं | याद कीजिए `vec(r_(i)) = vec(r_(i)) - vec(R )` शेष सभी चिह्न अध्याय में प्रयुक्त विभिन्न राशियों के मानक चिन्ह हैं | ध्यान दें की `vec(L)` द्रव्यमान केंद्र के परित निकाय का कोणीय संवेग एवं `M vec(R ) xx vec(V)` इसके द्रव्यमान केंद्र का कोणीय संवेग है |
(d) `(d vec(L))/(dt) = sum vec(r_(i)) xx (vec(dp))/(dt)`
यह भी दर्शाइए की `(d vec(L))/(dt) vec(tau_(ext))`
जहाँ `vec(tau_(ext))` द्रव्यमान केंद्र के परित निकाय पर लगने वाले सभी बाह्य बल आघूर्ण हैं |
[ संकेत द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा एवं न्यूटन के गति के तृतीय नियम का उपयोग कीजिए | यह मान लीजिए की किन्हीं दो कणों की बीच के आंतरिक बल उनको मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करते हैं |]

लिखित उत्तर

Verified by Experts

(a) I गतिशील कोणों का निकाय लेने पर
`i^(th)` कण का द्रव्यमान `= m_(i)`
`i^(th)` कण का वेग `= vec(V_(i))`
`:. i^(th)` कण का संवेग `vec(P_(i)) = m_(i) vec(V_(i))`
द्रव्यमान केंद्र का वेग = `vec(V)`
`i^(th)` कण का कोण द्रव्यमान केंद्र के निकाय के सापेक्ष
`vec(V_(i)) = vec(V_(i)) - vec(V)`
दोनों तरफ `m_(i)` का गुना समीकरण (1) में करने पर
`m_(i) vec(V_(i)) = m_(i) vec(V_(i)) - m_(i) vec(V)`
`vec(P_(i)) = vec(P_(i)) vec(V)` जहाँ पर `vec(P_(i)) = m_(i) vec(V_(i))`
`= i^(th)` कण का संवेग द्रव्यमान केंद्र के निकाय के सापेक्ष
`:. vec(P_(i)) = vec(P_(i)) + m_(i) vec(V)`
हम जानते हैं -
`vec(P_(i)) = m_(i) vec(V_(i))`
सभी कोणों का संवेगों का योग द्रव्यमान केंद्र के निकाय के सापेक्ष करने पर
`underset(i)(sum) vec(P_(i)) = underset(i)(sum) m_(i) vec(V_(i)) = underset(i)(sum) m_(i) (d vec(r_(i)))/(dt)`
जहाँ `(vec(r_(i)))/(vec(V_(i))) = i` कोणों का स्थिति सदिश द्रव्यमान केंद्र ke सापेक्ष
`vec(V_(i)) = (d vec(r_(i)))/(dt)`
द्रव्यमान केंद्र की परिभाषा के अनुसार
`underset(i)(sum) m_(i) vec(r_(i)) = 0`
`:. underset(i)(sum) m_(i) (d vec(r_(i)))/(dt) = 0`
`underset(i)(sum) vec(P_(i)) = 0`
(b) किसी भी निकाय की गतिज ऊर्जा के दो अंग होते हैं |
स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा `(K_(t))` तथा घूर्णिय गतिज ऊर्जा `(K^(1))` अर्थात द्रव्यमान केंद्र की गति की गतिज ऊर्जा `((1)/(2) mV^(2))` और कोणों के निकाय के द्रव्यमान केंद्र के प्रीत घूर्णिय ऊर्जा `K^(1)` होती है इस प्रकार निकाय की कुल गतिज ऊर्जा
`K = (1)/(2) mV^(2) + (1)/(2) I omega^(2)`
`K= (1)/(2) mV^(2) + K^(1)`
या `K = K^(1) + (1)/(2) mV^(2)`
(C ) `i^(th)` कोणों का स्थिति सदिश मूल बिंदु के सापेक्ष `= vec(r_(i))`
`i^(th)` कोणों का स्थित सदिश द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष `= vec(r_(i))`
द्रव्यमान केंद्र का स्थिति सदिश मूल बिंदु के सापेक्ष `= vec(R )`
दिया गया है -
`vec(r_(i)) = vec(r_(i)) - vec(R )`
`vec(r_(i)) = vec(r_(i)) + R`
प्रथम खंड (a) से हम जानते हैं -
`vec(P_(i)) = vec(P_(i)) + m_(i) vec(V)`
दोनों तरफ `vec(r_(i))` का सदिश गुणनफल करने पर
`underset(i)(sum) vec(r_(i)) xx vec(P_(i)) = underset(i)(sum) vec(r_(i)) xx vec(P_(i)) + underset(i)(sum) r_(i) xx m_(i) vec(V)`
` vec(L) = underset(i)(sum) ((vec(r_(i)) + vec(R )) xx vec(P_(i)) + underset(i)(sum) (vec(r_(i)) + vec(R )) xx m_(i) vec(V)`
`= underset(i)(sum) vec(r_(i)) xx vec(P_(i)) + underset(i)(sum) vec(R ) xx vec(P) + underset(i)(sum) vec(r_(i)) xx m_(i) vec(V) + underset(i)(sum) vec(R ) xx m_(i) vec(V )`
`= vec(L) + underset(i)(sum) vec(R ) xx vec(P_(i)) + underset(i)(sum) vec(r_(i)) xx m_(i) vec(V) + underset(i)(sum) vec(R ) xx m_(1) vec(V)`
जहाँ पर `vec(R ) xx underset(i)(sum) vec(P_(i)) = 0` और
`underset(i)(sum) vec(r_(i)) xx M vec(V) = 0`
`underset(i)(sum) m_(i) = M`
`:. vec(L) = vec(L) + R xx M vec(V)`
(d) कोणों के एक निकाय को आकाश में लीजिए | उन कोणों पर एक बल आघूर्ण लग रहा है माना किसी कण के लिए x,y v z अक्ष की अनुदिश `vec(L)` सदिश के घटक क्रमश `L_(x), L_(y), L_(z)` हैं तथा माना इसके रेखिक संवेग के घटक `P_(x), P_(y)` तथा `P_(z)` हैं |
`:. L_(x) = Y P_(z) - Z P_(y)`
`L_(y) = ZP_(x) - XP_(z)`
`L_(z) = XP_(y) - YP_(x)`
`:. vec(L_(i)) hat(i) + L_(y) hat(j) + L_(z) hat(k)`
`= (YP_(z) - ZP_(y)) hat(i) (ZP_(x) - XP_(z)) hat(j) + (XP_(y) - YP_(x)) hat(j)`
`= vec(r_(i)) xx vec(P_(i))`
`:.` किसी कण के संवेग परिवर्तन की दर को
`(d vec(L_(i)))/(dt) = (d)/(dt) (vec(r_(i)) xx vec(P_(i)))`
`= vec(r_(i)) xx (dp_(i))/(dt) + (d vec(r_(i)) xx vec(P_(i)))/(dt)`
`= vec(r_(i)) xx (dp_(i))/(dt) + vec(V_(i)) xx vec(P_(i))`
`= vec(r_(i)) xx (d vec(P_(i)))/(dt) + 0` `:. vec(V_(i)) xx ve(P_(i)) = 0`
यदि निकाय का कुल कोणीय संवेग `vec(L)` है तब
`vec(L) = sum vec(L)`
`(vec(dL))/(dt) = sum (vec(dL_(i)))/(dt)`
`(vec(dL_(i)))/(dt) = sum (vec(r_(i)) xx (vec(dP_(i)))/(dt))`
हम यह जानते हैं की `tau_(ext)` निकाय पर कार्यरत कुल बाह्य बल आघूर्ण है
`vec(tau_(ext)) = sum (vec(r_(i)) xx (vec(dP_(i)))/(dt))`
`vec(tau_(ext)) = sum (vec(r_i)) xx vec(F_(i)^(ext)))`
`:.` बाह्य बल सदैव युग्म हैं तथा एक दूसरे को निरस्त कर देते हैं |
समीकरण (1) तथा (2) से
`(vec(dL_(i)))/(dt) = vec(tau_(ext))`
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