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MATHS
चार दूधवाले ने एक चारागाहा किराये पर लिए...

चार दूधवाले ने एक चारागाहा किराये पर लिए । M ने 16 गायो को 3 माह तक, N ने 20 गायो को 4 माह तक, O ने 18 गायो को 6 माह तक तथा P ने 42 गायो को 2 माह तक चराया ।यदि किराये की राशि में M का हिस्सा रुपये2400 है, तो ज्ञात करे O का हिस्सा क्या होगा?

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A, B and C started a business. Thrice the investment of A is equal to twice the investment of B and also equal to four times the investment of C. If C’s share out of the total profit is Rs. 4,863,then the share of A in the profit is: A, B और C ने एक व्यवसाय की शुरुआत की | A के निवेश का तिगुना B के निवेश के दोगुने तथा C के निवेश के चार गुना के बराबर है | यदि कुल लाभ में C का हिस्सा 4863 रुपये है, तो इस लाभ में A का हिस्सा ज्ञात करें |

A,B and C start a business. A invests 33 1/3 % of the total capital, B invests 25% of the remaining and C invests the rest.If the total profit at the end of a year is Rs. 1,62,000, then A’s share in profit is : A,B और C ने एक व्यवसाय की शुरुआत की | A ने कुल पूँजी का 33 1/3 % निवेश किया |B ने शेष का 25% निवेश किया तथा शेष राशि C के द्वारा निवेश की गयी | यदि वर्ष के अंत में कुल लाभ 1, 62, 000 रुपये है, तो इस लाभ में A का हिस्सा है :

A can do a work in 20 days, while B can do the same work in 25 days. They started the work jointly. Few days later C also joined them and thus all of them completed the whole work in 10 days. All of them were paid total of rs 700. What is the share of C? A किसी कार्य को 20 दिनों में कर सकता है जबकि B इसी कार्य को 25 दिनों में कर सकता है | उन्होंने एक साथ इस कार्य को शुरू किया | कुछ दिनों बाद C उनके साथ शामिल हो गया और इस प्रकार उन सभी ने इस पूरे कार्य को 10 दिनों में पूरा किया | उन सभी को कुल 700 रुपये का भुगतान किया गया |C का हिस्सा क्या है ?

A, B and C invested their capitals in the ratio of 2:3:5. The ratio of months for which A, B and C invested is 4:2:3. If C gets a share of profit which is Rs. 1,47,000 more than that of A, then B’s share of profit is : A, B और C ने पूँजी 2 : 3 : 5 के अनुपात में लगाईं | A, B और C के द्वारा निवेश की गयी राशियों की अवधि ( महीने में ) का अनुपात 4 : 2: 3 है | यदि C को लाभ का एक हिस्सा प्राप्त होता है जो A के हिस्से से 1,47,000 रुपये अधिक है, तो इस लाभ में B का हिस्सा ज्ञात करें |

To do a certain work, the ratio of the efficiencies of A , B and C is 7 : 5 : 6. Working together, they can complete the same work in 35 days. B and C worked together for 21 days. The remaining work will be completed by A alone in : एक निश्चित कार्य को करने के लिए,A, B और C की कार्य क्षमता का अनुपात 7 : 5: 6 है| एक साथ कार्य करते हुए, वे इसी कार्य को 35 दिनों में पूरा कर सकते हैं | B और C ने 21 दिनों तक कार्य किया | शेष कार्य पूरा करने में A को अकेले कितने दिन लगेंगे ?

Ramesh started a business investing a sum of Rs.40,000. Six months later, Kevin joined by investing Rs.20,000. If they make a profit of Rs.10,000 at the end of the year, how much is the share of Kevin? रमेश ने रु40,000 का निवेश करके एक व्यवसाय शुरू किया। 6 माह बाद केविन ने रु. 20,000 का निवेश करके व्यवसाय में साझेदारी की। यदि वर्ष के अंत में उन्होंने रु10,000 का लाभ अर्जित किया, तो उसमें से केविन का हिस्सा कितना होगा?

हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाये गये लोहे निकाल दिये व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएँ आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारे का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहुत कठिन हो जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुंची तो उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकालने के लालच में चीड़ के पेड़ों का बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला, एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधिकारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास- चारे का संकट है, यहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने गाँववासियों की माँग पर ध्यान न देते हुए नरेंद्रनगर में नीलामी की घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुँच गये। वहाँ एकत्र ठेकेदारों से हेवल घाटी की महिलाओं ने कहा, "आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहाँ बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा। कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल खरीद लिए । हेवल घाटी में किन पेड़ों के होने वाले विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले गए?

हेवल घाटी के गाँववासियों ने चीड़ के पेड़ों के हो रहे विनाश के विरुद्ध जुलूस निकाले। घास-चारा लेने जा रही महिलाओं ने इन पेड़ों से लीसा टपकाने के लिए लगाये गये लोहे निकाल दिये व उनके स्थान पर मिट्टी की मरहम-पट्टी कर दी। महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा-बंधन भी किया। आरंभ से ही लगा कि वृक्ष बचाने में महिलाएँ आगे आएँगी। वन कटने का सबसे अधिक कष्ट उन्हीं को उठाना पड़ता है, क्योंकि घास-चारा लाने के लिए उन्हें और दूर जाना पड़ता है। कठिन स्थानों से घास-चारा एकत्र करने में कई बार उन्हें बहुत चोट लग जाती है। वैसे भी पहाड़ी रास्तों पर घास-चारे का बोझ लेकर पाँच-दस किमी या उससे भी ज्यादा चलना बहुत कठिन हो जाता है। इस आंदोलन की बात ऊँचे अधिकारियों तक पहुंची तो उन्हें लीसा प्राप्त करने के तौर-तरीकों की जाँच करवानी पड़ी। जाँच से स्पष्ट हो गया कि बहुत अधिक लीसा निकालने के लालच में चीड़ के पेड़ों का बहुत नुकसान हुआ है। इन अनुचित तरीकों पर रोक लगी। चीड़ के घायल पेड़ों को आराम मिला, एक नया जीवन मिला। पर तभी खबर मिली कि इस इलाके के बहुत से पेड़ों को कटाई के लिए नीलाम किया जा रहा है। लोगों ने पहले तो अधिकारियों को ज्ञापन दिया कि जहाँ पहले से ही घास- चारे का संकट है, यहाँ और व्यापारिक कटान न किया जाए। जब अधिकारियों ने गाँववासियों की माँग पर ध्यान न देते हुए नरेंद्रनगर में नीलामी की घोषणा कर दी, तो गाँववासी जुलूस बनाकर वहाँ नीलामी का विरोध करते हुए पहुँच गये। वहाँ एकत्र ठेकेदारों से हेवल घाटी की महिलाओं ने कहा, "आप इन पेड़ों को काटकर हमारी रोजी-रोटी मत छीनो। पेड़ कटने से यहाँ बाढ़ व भू-स्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा। कुछ ठेकेदारों ने तो वास्तव में वह बात मानी पर कुछ अन्य ठेकेदारों ने अद्वानी और सलेत के जंगल खरीद लिए । महिलाओं ने पेड़ों का रक्षा - बंधन क्यों किया ?