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एक व्यपारी ने रु210000 के लेपटॉप रु10000...

एक व्यपारी ने रु210000 के लेपटॉप रु100000 के मोबाइल फ़ोन और रु150000 के टेलीविज़न सेट आयत किए। उसे विशेष मामले के रूप में लैपटॉप पर 10% फोन पर, 8% और टीवी पर 5% ड्यूटी अदा करनी पड़ी। उसे उपयुक्त विवरण अनुसार सभी वस्तुओं के लिए कितनी ड्यूटी (रुपियो में ) का भुगतान करना होगा ?

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There was 25% off on shirts. A lady bought that shirt and got an additional 20% discount for paying in cash and further 10% discount for being a loyal customer. She paid Rs324. What was the price tag (in Rs) on the shirt? शर्ट पर 25% की छूट थी | एक महिला ने वह शर्ट ख़रीदा और उसे नकद में भुगतान करने के कारण 20% की अतिरिक्त छूट प्राप्त हुई तथा इसके बाद निष्ठावान ग्राहक होने के कारण उसे 10% की छूट और मिली | उसने 324 रुपये का भुगतान किया | इस शर्ट का अंकित मूल्य (रुपये में ) ज्ञात करें |

Rs 2,40,000 is taken as loan for three years compounded annually at 12.5%p.a. At the end of first year, the interest is revised to 12% p.a. The total amount to be repaid at the end of third year is: 2,40,000 रुपये की राशि तीन वर्षों के लिए 12.5% प्रति वर्ष वार्षिक चक्रवृद्धि पर उधार ली जाती है | पहले वर्ष के अंत में ब्याज में संशोधन करके 12% कर दिया जाता है | तीन वर्षों के अंत में कुल कितनी राशि का भुगतान करना होगा ?

हमारा जीवन जिन मानवीय सिद्धांतों, अनुभवों और सांस्कृतिक संस्कारों के संबल से समस्त सृष्टि के लिए महत्त्वपूर्ण बना है, परोपकार की भावना उन्हीं में एक है। मानव को दूसरे मानव के प्रति वैसा ही संवेदनात्मक उत्तरदायित्व निभाना चाहिए, जैसे वह स्वयं के प्रति निभाता है। जीवन को केवल परोपकार, पर सेवा और निःस्वार्थ प्रेम के लिए ही वास्तविक समझना चाहिए क्योंकि नश्वर शरीर जब नष्ट हो जाएगा तो उसके बाद हमारा कुछ भी इस दुनिया के जीवों की स्मृति में नही रहेगा। हम जग जीवों की स्मृति में सदा-सदा के लिए तभी बने रह सकते हैं, जब हम अपने नश्वर शरीर को वैचारिक, बौद्धिक और आत्मिक चेतना से पूर्ण कर निःस्वार्थ भाव से स्वयं को जीव सेवा में समर्पित करेंगे। हमें स्थिरता से और शांतिपूर्वक यह विचार करते रहना चाहिए कि हमारे जीवन का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य और एकमात्र लक्ष्य हमारे द्वारा किया जाने वाला त्याग है। त्याग योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए गहन तप की आवश्यकता है। त्याग का भाव किसी मनुष्य में साधारण होते हुए नही जन्म लेता। इसके लिए मनुष्य को जीवन-जगत और इसके जीवों के संबंध में असाधारण वैचारिक रचनात्मकता अपनाकर निरंतर योग, ध्यान, तप व साधना करनी होगी। उसे इस स्थिति से विचरते हुए विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभवों से लैस होना होगा। आवश्यकता होने पर उसे जीवों की वास्तविक सेवा करनी होगी। जब ऐसी विशेष मानवीय परिस्थितियों उत्पन्न होंगी, तब ही मानव में त्याग भाव आकार ग्रहण करेगा। त्याग के योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए आवश्यक है

हमारा जीवन जिन मानवीय सिद्धांतों, अनुभवों और सांस्कृतिक संस्कारों के संबल से समस्त सृष्टि के लिए महत्वपूर्ण बना है, परोपकार की भावना उन्हीं में एक है। मानव को दूसरे मानव के प्रति वैसा ही संवेदनात्मक उत्तरदायित्व निभाना चाहिए, जैसे वह स्वयं के प्रति निभाता है। जीवन को केवल परोपकार, पर सेवा और निःस्वार्थ प्रेम के लिए ही वास्तविक समझना चाहिए। क्योंकि नश्वर शरीर जब नष्ट हो जाएगा तो उसके बाद हमारा कुछ भी इस दुनिया के जीवों की स्मृति में नहीं रहेगा। हम जग जीवों की स्मृति में सदा-सदा के लिए तभी बने रह सकते हैं, जब हम अपने नश्वर शरीर को वैचारिक, बौद्धिक और आत्मिक चेतना से पूर्ण कर निःस्वार्थ भाव से स्वयं को जीव सेवा में समर्पित करेंगे। हमें स्थिरता से और शांतिपूर्वक यह विचार करते रहना चाहिए कि हमारे जीवन का सर्वश्रेष्ठ उद्देश्य और एकमात्र लक्ष्य हमारे द्वारा किया जाने वाला त्याग है। त्याग योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए गहन तप की आवश्यकता है। त्याग का भाव किसी मनुष्य में साधारण होते हुए नहीं जन्म लेता। इसके लिए मनुष्य को - जीवनजगत और इसके जीवों के संबंध में असाधारण वैचारिक रचनात्मकता अपनाकर निरंतर योग, ध्यान, तप व साधना करनी होगी। उसे इस स्थिति से विचरते हुए विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभवों . से लैस होना होगा। आवश्यकता होने पर उसे जीवों की वास्तविक । सेवा करनी होगी। जब ऐसी विशेष मानवीय परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी, तब ही मानव में त्यागः भाव आकार ग्रहण करेगा। त्याग के योग्य व्यक्तित्व प्राप्त करने के लिए आवश्यक है |

The rate of simple interest on a sum of money is 5% p.a. for the first 4 years, 8% p.a. for the next 3 years and 10% p.a. for the period beyond 7 years. If the simple interest accrued by the sum over a period of 10 years is ₹1,850, then the sum is: एक धन राशि पर साधारण ब्याज की दर पहले 4 वर्षों के लिए 5% प्रति वर्ष तथा अगले 3 वर्षों के लिए 8% प्रति वर्ष एवं 7 वर्षों के बाद की अवधि के लिए 10% प्रति वर्ष है | यदि इस राशि पर 10 वर्षों में उपार्जित साधारण ब्याज 1850 रुपये है, तो यह राशि कितनी है ?

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