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एक शहर में 20 % व्यक्ति अंग्रेजो का अख...

एक शहर में 20 % व्यक्ति अंग्रेजो का अखबार पढते है। 40% व्यक्ति हिन्दी का अखबार पढते है तथा 5% व्यक्ति दोनो प्रकार के अखबार पढते है। कितने प्रतिशत व्यक्ति कोई भी अखबार नही पढते है।

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एक व्यक्ति अपनी यात्रा का 2/5 ट्रेन से, एक तिहाई बस से, एक चौथाई कार से तथा 3km पैदल तय करता है। व्यक्ति द्वारा तय की गई दूरी बतायें -

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। व्यक्तितत्व का अंतराष्ट्रीयकरण कब होता है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। मातृभाषा शिक्षण का महत्तम उदेश्य क्या है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। समाजीकरण से तात्पर्य है

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपनी संस्कृति से परिचित होते है , वैसे ही अन्य भाषा पढ़कर उस संस्कृति का हमें परिचय मिलता है। साथ ही अपनी भाषा पढ़कर जैसे हम अपने भाषा - भाषी लोगो से जुड़ते है , हमारे व्यक्तित्व का समाजीकरण होता है और हमारी दृष्टि की संकीर्णता कम हो जाते है उसी प्रकार अन्य भाषा पढ़कर हम अपने से ऊपर उठकर बाहर से जुड़ते है हमारे व्यक्तित्व का अंतराष्ट्रीयकरण होता है और हमारी दृष्टि और भी मुक्त हो जाती है। इस तरह ,जैसे मातृभाषा - शिक्षण का महत्तम उदेशय व्यक्ति के व्यक्तित्व को 'स्व ' से उठाकर पुरे मातृभाषी समाज के उपयुक्त बनाना होता है वैसे ही अन्य भाषा -शिक्षण का महत्तम उदेश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को अंतराष्ट्रीय स्तर देना है जिस व्यक्ति ने जितनी अधिक अन्य भाषाएँ सच्चे अर्थो में सीखी होंगी , उसके व्यक्तित्व में यह मुक्तता और अंतराष्ट्रीय उतनी ही अधिक होगी। अन्य भाषा पढ़कर में

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मानव जीवन में आत्मसम्मान का अत्यधिक महत्व है। आत्मसम्मान में अपने व्यक्तित्व को अधिकाधिक सशक्त एवं प्रतिष्ठित बनाने की भावना निहित होती है। इससे शक्ति, साहस, उत्साह आदि गुणों का जन्म होता है जो जीवन की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आत्मसमान की भावना से पूर्ण व्यक्ति संघर्षों की परवाह नहीं करता है और हर विषम परिस्थिति से टक्कर लेता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में पराजय का मुंह नहीं देखते तथा निरन्तर यश की प्राप्ति करते हैं। आत्मसम्मानी व्यक्ति धर्म, सत्य, न्याय और नीति के पथ का अनुगमन करता है उसके जीवन में ही सच्चे सुख और शांति का निवास होता है। परोपकार, जनसेवा जैसे कार्यों में उसकी रूचि होती है। लोकप्रियता और सामाजिक प्रतिष्ठा उसे सहज ही प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्ति में अपने राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा होती है तथा मातृभूमि की उन्नति के लिए वह अपने प्राणों को उत्सर्ग करने में सुख की अनुभूति करता है। चूंकि आत्मसम्मानी व्यक्ति अपने अथवा दूसरों की आत्मा का हनन नहीं करता है, इसीलिए वह ईर्ष्या-द्वेष जैसी भावनाओं से मुक्त होकर मानव मात्र को अपने परिवार का अंग मानता है। उसके हृदय में स्वार्थ, लोभ और अहंकार का भाव नहीं होता। निश्छल हृदय होने के कारण वह आसुरी प्रवृत्तियों से सर्वथा मुक्त होता है। आत्मसम्मानी व्यक्ति की रूचि होती है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये मानव जीवन में आत्मसम्मान का अत्यधिक महत्व है। आत्मसम्मान में अपने व्यक्तित्व को अधिकाधिक सशक्त एवं प्रतिष्ठित बनाने की भावना निहित होती है। इससे शक्ति, साहस, उत्साह आदि गुणों का जन्म होता है जो जीवन की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आत्मसमान की भावना से पूर्ण व्यक्ति संघर्षों की परवाह नहीं करता है और हर विषम परिस्थिति से टक्कर लेता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में पराजय का मुंह नहीं देखते तथा निरन्तर यश की प्राप्ति करते हैं। आत्मसम्मानी व्यक्ति धर्म, सत्य, न्याय और नीति के पथ का अनुगमन करता है उसके जीवन में ही सच्चे सुख और शांति का निवास होता है। परोपकार, जनसेवा जैसे कार्यों में उसकी रूचि होती है। लोकप्रियता और सामाजिक प्रतिष्ठा उसे सहज ही प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्ति में अपने राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा होती है तथा मातृभूमि की उन्नति के लिए वह अपने प्राणों को उत्सर्ग करने में सुख की अनुभूति करता है। चूंकि आत्मसम्मानी व्यक्ति अपने अथवा दूसरों की आत्मा का हनन नहीं करता है, इसीलिए वह ईर्ष्या-द्वेष जैसी भावनाओं से मुक्त होकर मानव मात्र को अपने परिवार का अंग मानता है। उसके हृदय में स्वार्थ, लोभ और अहंकार का भाव नहीं होता। निश्छल हृदय होने के कारण वह आसुरी प्रवृत्तियों से सर्वथा मुक्त होता है। आत्मसम्मानी व्यक्ति क्या पसंद करता है

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