माना कि चित्र की भाँति `q_(1),q_(2),q_(3)` आवेश क्रमशः बिंदु `P_(1),P_(2)"तथा"P_(3)` पर स्थित है, तब सम्पूर्ण निकाय की स्थितिज ऊर्जा निम्न प्रकार ज्ञात की जा सकती है-
प्रथम आवेश `q_(1)` को `P_(1)(vecr_1)` तक लाने में किया गया कार्य शून्य होगा क्योकि क्षेत्र में कोई अन्य आवेश नहीं है अर्थात
`W_(1)=0" "...(1)`
जब `q_(2)` आवेश को क्षेत्र के `P_(2)(vecr_2)` पर `q_(1)` से `r_(12)` दूरी पर लाते है तो किया गया कार्य
`W_(2)=(q_(1)"के कारण विभव")xxq_(2)`
`W_(2)=(1)/(4piin_(0))(q_1)/(r_12)(q_2)=(1)/(4piin_(0))(q_(1)q_(2))/(r_12)" "...(2)`
इसी प्रकार `q_(3)` आवेश को अनंत से क्षेत्र के `P_(3)(vecr_3)` बिंदु पर लाने में किया गया कार्य
`W_(3)=(q_(1)वq_(2)"के कारण विभव")xxq_(3)`
`W_(3)=((1)/(4piin_0)(q_1)/(r_13)+(1)/(4piin_0)(q_2)/(r_23))xxq_(3)`
`rArrW_(3)=(1)/(4piin_0)((q_(1)q_(3))/(r_13)+(q_(2)q_(3))/(r_23))" "...(3)`
`therefore` इन सभी आवेशों के निकाय की कुल विधुत स्थितिज ऊर्जा
`U=W_(1)+W_(2)+W_(3)`
समी. (1),(2),(3) से
`U=0+(1)/(4piin_0)(q_1q_2)/(r_12)+(1)/(4piin_0)((q_1q_3)/(r_13)+(q_2q_3)/(r_23))`
`U=(1)/(4piin_0)((q_1q_2)/(r_12)+(q_1q_3)/(r_13)+(q_2q_3)/(r_23))" "...(4)`
आवेशों के निकाय को बनाने में आवश्यक ऊर्जा, उन आवेशों की केवल अंतिम स्थितियों पर निर्भर करती है |