सेल का आन्तरिक प्रतिरोध - जब किसी सेल को बाह्य प्रतिरोध से जोड़ा जाता है तो सेल में आयन घोल के अन्दर कैथोड से एनोड के मध्य प्रवाहित होते है तथा उनके प्रवाह में अणुओं से संघट्टों के कारण अवरोध उत्पन्न होता है | यह अवरोध सेल का आन्तरिक प्रतिरोध कहलाता है | इसे हम r से प्रदर्शित करते है तथा इसकी इकाई ओम होती है | किसी सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का मान निम्न बातों पर निर्भर करता है |
(1) सेल के घोल की प्रकृति (सान्द्रता तथा ताप पर)
(2) इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी पर |
(3) इलेक्ट्रोडों के घोल में डूबे हुए भाग के क्षेत्रफल पर |
(4) सेल से ली गई धारा के मान पर |
(5) सेल के दोष जैसे ध्रुवण इत्यादि पर |
विभवमापी की सहायता से प्राथमिक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का मापन - किसी प्राथमिक सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के लिये विभवमापी सबसे उपयुक्त साधन है | अविक्षेप विधि पर आधारित होने से यह सेल से कोई धारा प्राप्त नहीं करता जिससे उसके वि. वा. बल का यथार्थ मान प्रदान करता है |
परिपथ का संयोजन - विभवमापी के तार AB को एक संचायक सेल `E_(P)`, धारा नियंत्रक Rh व कुंजी `K_(1)` से जोड़कर प्राथमिक परिपथ पूरा करते है | द्वितीयक परिपथ में एक सेल जिसका आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना है, उसको एक प्रतिरोध बॉक्स व कुंजी `K_(2)` से जोड़ देते है | चित्रानुसार सेल का घन सिरा A से व ऋण सिरा गैल्वेनोमीटर से होकर जॉकी .J. से जोड़ देते है | सर्वप्रथम कुंजी `K_(2)` को खुली रखकर सेल E के वि. वा. बल के लिये जॉकी ज को विभवान्तर के तार पर खिसका कर अविक्षेप स्थिति प्राप्त कर संतुलित लम्बाई `l_(1)` ज्ञात कर लेते है | तार की विभव प्रवणता x व सेल का वि. वा. बल E हो तो -
`E=xl_(1) " "` .....(1)
प्रतिरोध बॉक्स में से प्रतिरोध R निकलकर कुंजी `K_(2)` को लगा देते है | इस परिपथ में सेल E से प्रतिरोध R में धारा प्रवाहित होती है | धारा का मान 1 हो तो प्रतिरोध R के सिरों पर विभवान्तर,
`V=IR " "` ....(2)
जब जॉकी J को तार AB पर खिसका कर अविक्षेप की स्थिति ज्ञात कर संतुलित लंबाई `l_(2)` ज्ञात कर लेते है | यदि सेल के सिरों पर विभवान्तर V हो तो
`V=x l_(2) " "` ....(3)
यदि सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r हो तो प्रतिरोध R से प्रवाहित धारा का मान -
`I=(E )/(r+R)`
`Ir+IR=E`
`therefore r=(E-IR)/(1)`
समीकरण (2) से I का मान समीकरण (4) में,
`therefore r = (E-V)/(V)xx R`
`r=(E-V)/(I) " "` .....(5)
चूँकि V = IR होता है |
समीकरण (1) व (3) से E व V का मान समीकरण (5) में रखने पर,
`r=((xl_(1)-xl_(2))/(xl_(2)))xxR`
`r=((l_(1)-l_(2))/(l_(2)))xxR" "` ......(6)
अतः सेल के खुले व बन्द परिपथ में संतुलित लम्बाई `l_(1)` और `l_(2)` ज्ञात करके समीकरण (6) से सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात कर सकते है |