ठोसों में ऊर्जा बैण्ड के आधार पर चालक, कुचालक एवं अर्धचालक के मध्य अंतर-
1.कुचालक या विद्युतरोधी- कुचालकों में वर्जित ऊर्जा अंतराल `Delta_(g)` सामान्य ताल पर इलेक्ट्रॉनों की माध्य तापीय ऊर्जा 0.25 eV की तुलना में बहुत अधिक `(ge 5eV)` होता है चित्र a. इससे इलेक्ट्रॉनों का संयोजकता बैण्ड से चालन बैण्ड में संक्रमण अत्यल्प होता है ओर चालक बैण्ड लगभग पूर्णतः रिक्त होता है तथा संयोजकता बैण्ड भरा होता है। अतः सामान्य ताप पर एवं उच्च तापों पर भी चालन बैण्ड में इलेक्ट्रॉनों की संख्या नगण्य होने के कारण इन पदार्थों में विद्युत चालन नगण्य होता है अर्थात इस प्रकार के पदार्थों की चालकता बहुत कम ( `10^(-12)` से `10^(-18)` म्हो/मी. की कोटि की), प्रतिरोधकता अत्यधिक (`10^(12)` से `10^(18)` ओ.मी. कोटि की) होती है। कुचालकों का प्रतिरोधकता ताप गुणांक ऋणात्मक होता है। उदाहरण स्वरूप हीरे के लिए वर्जित ऊर्जा अंतराल लगभग 7eV होता है और प्रतिरोधकता `10^(16)` ओम मी. के कोटि की होती है।
2. चालक – इस प्रकार के ठोसों से संयोजकता तथा चालक ऊर्जा बैण्डों में परस्पर संयोजकता तथा चालकन ऊर्जा बैण्डों में परस्पर अतिव्यापन होता है। अतः इनमें वर्जित ऊर्जा बैण्ड प्रायः नही पाया जाता है अर्थात `DeltaE_(g)=0` चित्र b । तांबां, चांदी आदि धातुओं के लिए यही स्थिति होती है। अतः संयोजकता बैण्ड ही चालन बैण्ड की भांति व्यवहार करता है।
चालन बैण्ड में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होने के कारण इस प्रकार के पदार्थों की चालकता बहुत अधिक होती है । अतः पदार्थों पर बाह्य अल्प विद्युत क्षेत्र प्रयुक्त करते ही चालन बैण्ड के इलेक्ट्रॉन धारा वाहक के रूप में गति करने लगते हैं और अधिक मात्रा में धारा प्रवाहित होने लगती है। इस प्रकार ये पदार्थ विद्युत एवं ऊष्मा के अच्छे चालक होते हैं। सामान्य ताप पर इनकी चालकता अत्यधिक (`10^(6)` से `10^(8)` म्हो/मी. के कोटि की) तथा प्रतिरोधकता अत्यल्प (`10^(-8)` से `10^(-6)` म्हो/मी. के कोटि की) होती है। चालकों में ताप वृद्धि करने से मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या ता नियत रहती है परंतु मुक्त इलेक्ट्रॉनों की यादृच्छ गति तथा जालक के परमाणुओं से टक्करों की आवृत्ति में वृद्धि होती है जिसके कारण चालकता में कमी तथा प्रतिरोधकता में वृद्धि होती है अर्थात चालकों का प्रतिरोधकता ताप गुणांक धनात्मक होता है।
3. अर्धचालक –वैद्युत चालन की क्षमता के आधार पर अर्ध चालक वे पदार्थ होते हैं जिनकी प्रतिरोधकता चालकों एवं कुचालकों के मध्य अर्थात `10^(-1)` से `10^(-7)` ओम मी. कोटि की होती है। इन पदार्थों में चालक बैण्ड तथा संयोजकता बैण्ड के मध्य वर्जित ऊर्जा अंतराल अवश्य होता है परंतु वह कुचालकों की अपेक्षाकृत बहुत कम लगभग 1eV होता है चित्र (c), उदाहरण के लिए चतु: संयोजी तत्व जैसे जरमेनियम (Ge), सिलिकन (Si) तथा मिश्रधातु गैलियम आर्सनाइड (Ga As) इत्यादि अर्धचालक पदार्थ होते हैं जिनमें वर्जित ऊर्जा अंतराल क्रमशः 0.72eV,1.1eK तथा `1.3eV` इत्यादि होता है। ये मान कुचालकों के वर्जित ऊर्जा अंतराल `~~6eV` की तुलना में बहुत कम होता है।