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PHYSICS
दव्यमान क्षति से क्या तात्पर्य है ? द्रव...

दव्यमान क्षति से क्या तात्पर्य है ? द्रव्यमान क्षति एवं नाभिकीय बंधन ऊर्जा में सम्बन्ध स्थापित कीजिए तथा इससे प्रति-न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा का व्यंजक भी लिखिए।

लिखित उत्तर

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द्रव्यमान क्षति एवं नाभिकीय बंधन ऊर्जा- द्रव्यमान क्षति-परमाणु की नाभिक का द्रव्यमान उसमें उपस्थित न्यूक्लिआनों (प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन) के द्रव्यमान के योग से कुछ कम होता है। यदि किसी नाभिक में Z प्रोटॉन व N न्यूट्रॉन है तथा प्रोट्रॉन, न्यूट्रॉन व नाभिक के द्रव्यमान क्रमश: `m_p,m_n,m_(nue)` से प्रदर्शित करें तो
`Zm_p + Nm_n gt m_(nuc)`
इस प्रकार से प्रत्येक नाभिक का द्रव्यमान उसमें उपस्थित न्यूक्लिआनों के द्रव्यमान के योग से कुछ कम होता है। द्रव्यमान के इस अन्तर को द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) कहते हैं।
द्रवमान क्षति `Deltam` = न्यूक्लिआनों के द्रव्यमानो का योग - नाभिक का द्रव्यमान
`Deltam=(Zm_p+Nm_n)-m_(nuc)`
नाभिकीय बंधन ऊर्जा-किसी नाभिक की बन्धन ऊर्जा, ऊर्जा की वह मात्रा है जो नाभिक को दे देने पर उसके समस्त न्यूक्लिआनों को बन्धनमुक्त कर दे। अत: किसी नाभिक की बन्धन ऊर्जा
`DeltaE=DeltaM.c^2`
अथवा `DeltaE = [{Zm_p + (A -Z)m_n}-M].c^2`
यदि किसी नाभिक की बन्धन ऊर्जा में न्यक्लिऑनों की संख्या का भाग दे दें तो हमें नाभिक की बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन प्राप्त होगी।
`therefore` बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन `barB=(DeltaE)/A`
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