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Class 12
PHYSICS
P-N संधि के उत्कम अभिनति अभिलाक्षणिक वक्...

P-N संधि के उत्कम अभिनति अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने के लिए प्रायोगिक व्यवस्था का परिपथ चित्र बनाइए। उत्क्रम अभिनति की अवस्था में P-N संधि के लिए उत्क्रम भंजन की घटना को निम्नलिखित क्रियाविधियों द्वारा समझाइए-
(i) ऐवेलांशी भंजन
(ii) जेनर भंजन।

लिखित उत्तर

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P-N संधि उत्क्रम अभिनति अभिलाक्षणिक हेतु प्रायोगिक व्यवस्था-

(i) ऐवेलांशी भंजन (Avlanche Breakdown)- उतक्रम अभिनति में उतक्रम धारा का प्रवाह अल्पसंख्यक आवेशों के कारण होता है उत्क्रम विभव के उच्च मानों (`V_B` से अधिक) के लिये ये अल्पसंख्यक आवेश त्वरित होकर उच्च वेग प्राप्त कर लेते हैं एवं वहाँ उपस्थित सहसंयोजी आबन्धों से टकराकर इनको तोड़ देते हैं। इससे हर आबन्ध के टूटने से एक इलेक्ट्रॉन-होल युग्म उत्पन्न हो जाता है। ये इलेक्ट्रॉन-होल युग्म पुन: सह संयोजी आबन्धों को तोड़ देते है। इस प्रकार यह प्रक्रिया संचयी प्रक्रिया की भांति आगे बढ़ती है एवं उत्क्रम धारा का मान एकाएक बढ़ जाता है। यह प्रक्रिया ऐवेलांशी भंजन कहलाती है। यदि इस उत्क्रम धारा पर नियंत्रण न रखा जाये तो डायोड क्षतिग्रस्त हो सकता । यदि उत्क्रम धारा को नियंत्रित कर लिया जाये तो डायोड को पुन: प्रयोग में लिया जा सकता है।
(ii)जेनर भंजन (Zener Breakdown) -यह प्रक्रिया ऐसे डायोड में होती है जिसमें मादन (Doping) अपेक्षाकृत अधिक होता है। इसके परिणामस्वरूप अवक्षय परत (depletion zone) की चौड़ाई कम हो जाती है। इससे [E = v/d] विद्युत क्षेत्र का मान काफी तीव्र हो जाता है। इससे संधि के निकट सहसंयोजी आबन्ध के इलेक्ट्रॉनों पर इतना बल लगता है कि ये आबन्ध टूट जाते हैं। इस कारण अल्पसंख्यक धारा वाहकों की संख्या में एकाएक वृद्धि हो जाती है एवं उत्क्रम धारा का मान अत्यधिक बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया को जेनर भंजन नाम से जाना जाता है। जिन भंजन में जेनर भंजन होता है उन्हें हम जेनर डायोड (Zener Diode) के नाम से जानते हैं।
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