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Class 12
PHYSICS
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक दो शर्त...

प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक दो शर्तें लिखिए। यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में व्यतिकरण फ्रिन्जों की चौड़ाई ज्ञात करने का व्यंजक प्राप्त कीजिए। यंग के द्वि-स्लट प्रयोग में तीव्रता वितरण का आरेख खींचिए।

लिखित उत्तर

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व्यतिकरण के लिए दो आवश्यक शर्ते-
(1) प्रकाश तरंगें कलासम्बद्ध (Coherent) होनी चाहिये अर्थात् इनसे उत्सर्जित प्रकाशीय तरंगों के बीच कलान्तर समय के साथ नियत रहना चाहिये।
(2) दोनों तरंगों की आवृत्ति अथवा तरंगदैर्ध्य बराबर होनी चाहिये अर्थात् प्रकाश स्रोत एक वर्णीय होना चाहिये।
व्यतिकरण फ्रिन्जों की चौड़ाई- माना एक गर्ते में बने बारी छिद्र `S_1` व `S_2` द्वितीयक प्रकाश की तरह कार्य करते हैं जिनके बींच कि दूरी d है व इन छिद्रों पर आपतित प्रकाश एकवर्णी है जिसका तरंगदैर्ध्य `lambda` है इन छिद्रों से लम्बवत् दूरी D पर एक पर्दा रखा है। जिस पर व्यतिकरण प्रतिरूप प्रेक्षित किया जाता है।

पर्दे के केन्द्र बिन्दु O. पर `S_1, S_2` से पहुँचने वाली तरंगों के मध्य पथान्तर शुन्य, होता है, जिसके कारण वहाँ तीव्रता अधिकतम प्राप्त होती है जिसे केन्द्रीय दीप्त फ्रिंज कहते हैं।
माना स्रोत `S_1` व `S_2` से उत्सर्जित द्वितीयक तरंगिकाएँ पथ `S_1P` व `S_2P` से होकर पर्दे के बिन्दु P पर मिलती है जिससे व्यतिकरण प्रतिरूप उत्पन्न होता है। यदि इसमें बनी फ्रिंज की दूरी परदे के केंद्र बिंदु O. से x हो तो समकोण त्रिभुज OO.P से

`tan theta=(O.P)/(OO.)=x/D` ....(1)
अब यदि तरंगों के पथ की लम्बाई पर विचार करें तो `S_2P gt S_1P` है फलत: दोनों तरंगों के मध्य पथान्तर होगा। जिसे `S_2P- S_1P = S_2A = Delta` से यदि व्यक्त किया जा सकता हैं यदि `S_1` से `S_2P` पर लम्ब `S_1A` डालें तो
समकोण त्रिभुज `S_2AS_1` से
`sintheta=Delta/d`..(2)

यदि `theta` का मान बहुत कम है तब `sin theta approx tan theta` होगा
अतः `Delta/d=x/D` या `Delta=(xd)/D`
इस दूरी x का मान d व D नियत रहने पर पथान्तर `Delta` पर निर्भर करता है।
(i) चमकीली फ्रीन्जो के लिए-यदि n वें क्रम कि चमकीली फ्रिन्ज बिन्दु P पर पर्दे पर दिखाई देती है तो फ्रिन्ज के निर्माण में प्रयुक्त द्वितीयक तरंगिकाओं के मध्य पथान्तर `Delta=n lambda` होगा।
अत: n वें क्रम की चमकीली फ्रिन्ज की पर्दे के केन्द्र बिन्दु से दूरी-
`x_n=(n lambdaD)/d` होगी। n = 0, `pm1,pm2`...(4)
n = 0 रखने पर केन्द्रीय दीप्त फ्रिन्ज जिसे शून्य क्रम फ्रिंज कहते हैं की स्थिति, n = 1 रखने पर प्रथम दीप्त फ्रिंज की स्थिति प्राप्त होती है। इसी प्रकार, यदि (n + 1) वें क्रम की चमकीली फ्रिन्ज की पर्दे के केन्द्र बिन्दु से दूरी
`x_(n+1)=((n+1)lambdaD)/d` ...(5)
क्योंकि क्रमागत फ्रिन्जों के बीच की दूरी फ्रिन्ज चौड़ाई के बराबर होती है। चमकीली फ्रिन्जों के लिए फ्रन्ज चौड़ाई -
`beta=x_(n+1)-x_n`
`beta=((n+1)lambdaD)/d-(nlambdaD)/d`
`beta=(lambdaD)/d` ...(6)
इस पद से स्पष्ट होता है कि फ्रिन्ज चौडाई फ्रिन्ज संख्या पर निर्भर नहीं करती है अर्थात् चमकीली फ्रिन्जों के लिए फ्रिन्ज चौड़ाई समान रहती है।
(ii) काली फ्रिन्जों के लिए-यदि पर्दे पर बिन्दु P पर काली फ्रिन्ज बनती है तो n वें क्रम की काली फ्रिन्ज के लिए पथान्तर-
`Delta=(2n+1)lambda/2 , n =0 , pm1 , pm2` ,...
n वें क्रम की काली फ्रिन्ज की पर्दे के केन्द्र बिन्दु से दूरी
`x._n=((2n+1)lambdaD)/(2d)` ...(7)
इसी प्रकार (n+ 1) वें क्रम की काली फ्रिन्ज के केन्द्र बिन्दु से दूरी
`x._(n+1)=[2(n+1)+1](lambdaD)/(2d)`
क्रमागत काली फ्रिन्जों के बीच की दूरी अर्थात् फ्रिन्ज चौड़ाई
`beta.=x._(n+1)-x._n`
`beta.=[2(n+1)+1](lambdaD)/(2d)-((2n+1)lambdaD)/(2d)`
`beta.=(lambdaD)/d` होगी | ...(9)
अत: काली फ्रिन्जों के लिए भी फ्रिन्ज चौड़ाई समान होती है।
समी. (6) व समी. (9) की तुलना करने पर
`beta=beta.` ...(10)
इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि चमकीली एवं काली फ्रिन्जों के लिए फ्रिन्ज चौड़ाई समान होती है ।
अत: फ्रिन्ज चौड़ाई `beta=(lambdaD)/d`

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