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PHYSICS
कम्पन तल तथा ध्रुवण तल की परिभाषा लिखिए।...

कम्पन तल तथा ध्रुवण तल की परिभाषा लिखिए। निकॉल प्रिज्म द्वारा समतल ध्रुवित प्रकाश प्राप्त करने की कार्यविधि समझाइये। आवश्यक चित्र बनाइये।

लिखित उत्तर

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कम्पन तल (Plane of Vibration)- जब साधारण या अध्रुवित प्रकाश टूरमैलीन क्रिस्टल में से निकलता है, तब प्रकाश क्रिस्टल की अक्ष AB की दिशा में ध्रुवितहो जाता है और कम्पन संचरण की दिशा के अभिलम्ब एक ही दिशा में सीमित हो जाते हैं। अत: वह तल जिसमें कम्पन होते हैं, कम्पन तल कहलाता है। दूसरे शब्दों में इस प्रकार कहा जा सकता है कि वह तल जिसमें प्रकाश के कम्पन और तरंग चलने की दिशा दोनों ही स्थित होते हैं, कम्पन तल कहलाता है।
ध्रुवण तल (Plane of Polarisation)-कम्पन तल के अभिलम्बवत् तल जिसमें कोई कम्पन नहीं होता है, ध्रुवण तल कहलाता है, अर्थात् ध्रुवण तल में प्रकाश सदिश के कम्पन का घटक शून्य होता है। अत: यह कम्पन तल तथा ध्रुवण तल एक-दूसरे के लम्बवत् होते हैं।
निकोल प्रिज्म (Nicol Prism) यह एक विशेष प्रकार की प्रकाशिक युक्ति है जो किसी अध्रुवित प्रकाश को समतल ध्रुवित प्रकाश में परिवर्तित करने में काम आती है। निकोल फ्रिज्म एक कैल्साइट क्रिस्टल से बनाया जाता है जो कि द्विअपवर्तल क्रिस्टल है। इस क्रिस्टल को इस प्रकार से डिजाइन किया जाता है कि O-किरण को पूर्ण आंतरिक परिवर्तल द्वारा क्रिस्टल से बाहर निकाल दिया जाता है तथा E-किरण पारगमित हो जाती है तथा यह किरण ध्रुवित भी होती है। इस प्रकार निकोल प्रिज्म की सहायता से प्रकाश ध्रुवित किया जाता है।

कार्यविधि-चित्र में ABCD निकोल प्रिज्म का मुख्य परिच्छेद है। कर्ण A.C. कनाडा बालसम की सतह । चूँकि साधारण किरण (O-ray) के लिए कैलसाइट का अपवर्तलांक 1.658 है एवं असाधारण किरण (E- ray) के लिए कैलसाइट का अपवर्तलांक 1.468 होता है, अत: कनाडा बालसम साधारण किरण के लिए विरल माध्यम व असाधारण किरण के लिए सघन माध्यम का कार्य करता है। अत: जब साधारण प्रकाश जो अध्रुवित होता है, फलक AB पर आपतित होने के पश्चात् साधारण किरण व असाधारण किरण में विभक्त हो जाता है, तो दोनों किरणें समतल ध्रुवित होती है। O-किरण में E- सदिश के कम्पन मुख्य परिच्छेद में लम्बवत् एवं E-किरण में कम्पन मुख्य परिच्छेद में होते हैं। जब साधारण किरण क्रिस्टल में होती हुई कनाडा बालसम पर आपतित होती है, तो यह सघन माध्यम से विरल माध्यम में आती है। चूँकि इस किरण के लिए आपतल कोण का मान संगत क्रान्तिक कोण `(69^@)` से अधिक होता है। अत: O-किरण का कनाडा बालसम की सतह से पूर्ण आंतरिक परावर्तल हो जाता है। पूर्ण आंतरिक परावर्तल के पश्चात् इस किरण का प्रिज्म की काली सतह द्वारा अवशोषण कर लिया जाता है तथा असाधारण किरण (E-ray) विरल (कैलसाइट) माध्यम से सघन (कनाडा बालसम) माध्यम में प्रवेश करती है, तो यह बालसम के माध्यम से पारगमित होकर अन्त में आपतित किरण के समान्तर निर्गत हो जाती है। यह किरण (E-ray) पूर्णत: समतल ध्रुवित होती है। इस प्रकार निकॉल फ्रिज्म से समतल ध्रुवित प्रकाश प्राप्त कर लेते हैं एवं इस अवस्था में निकाल प्रिज्म ध्रुवित (Polariser) कहलाता है।
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