मिलर का प्रयोग - ऑपेरिन व हाल्डेन को परिकल्पना कि वैज्ञानिक पुष्टि करने के लिए मिलर ने सन 1953 में एक प्रयोग किया। उन्होंने प्रयोगशाला में आध पृथ्वी की परिस्थितियों की पुनर्रचना की। इसके लिए उन्होंने काँच के एक विशिष्ट उपकरण के एक कक्ष (फ्लास्क) में हाइड्रोजन, अमोनिया, मीथेन को मिश्रण लिया। इस कक्ष तक वह गर्म जल वाष्प नलिकाओं द्वारा पहुँचाते रहे। गैसीय कक्ष में लगे इलेक्ट्रोडों में विद्युत स्मारक द्वारा व ऊष्मा के रूप में ऊर्जा प्रदान की गई। इस गैसीय कक्ष से काँच की नलिकाओं द्वारा जुड़े दूसरे कक्ष में उन्होंने संघनित द्रव को एकत्रित किया। एक सप्ताह बाद इस द्रव का विश्लेषण करने पर ज्ञात हुआ कि इसमें एलानिन, ग्लाइसिन, ग्लिसरॉल व अन्य कार्बनिक पदार्थ थे। इस प्रयोग से यह निष्कर्ष निकला कि आज से 3-4 अर्ब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का उद्भव इसी प्रकार रासायनिक विकास की प्रक्रिया द्वारा हुआ होगा।
