बिगबेंग अवधारणा - बिगबैंग अवधारणा में माना गया है कि ब्रह्राणड़ की उत्पत्ति, एक अत्यंत सघन व अत्यंत गर्म 13.8 पिंड से, अरब वर्ष पूर्व महाविस्फोट के कारण हुई है। किसी वस्तु में विस्फोट होने के बाद उसके टुकड़े दूर -दूर तक फैल जाते है। बिगबेंग अवधारणा के पक्ष में कई प्रमाण भी प्राप्त हुए है। ब्रह्राणड़ में हल्के तत्वों की अधिकता, अंतरिक्ष में सूक्ष्मविकिरणो की उपस्थिति, महाकाय संरचनाओं की उपस्थिति व हब्बल के नियम को समझने में सफलता ऐसे ही प्रमाण है।
विस्फोट के बाद हुए विस्तार से ब्रह्राणड़ ठंडा हुआ तब उप-परमणीय कणो की उत्पत्ति हुई। उप-परमाणीय कणो से बाद में सरल परमाणु निर्मित हुए। परमाणुओ से प्रारम्भिक तत्वों, हाइड्रोजन, हीलियम व लिथियम के दैत्याकार बादल निर्मित हुए। गुरुत्व बल के कारण संघनित होकर दैत्याकार बादलो से तारो व आकाशगंगाओ का जन्म हुआ।
भारतीय अवधारणा के अनुसार स्वामी विवेकानंद ने वैदिक ज्ञान को समझाते हुए कहा कि चेतना ने एक से अनेक होते हुए ब्रह्राणड़ का निर्माण किया। जैन धर्म में सृष्टि को कभी नष्ट नहीं होने वाली माना गया है। जैन दर्शन के अनुसार, योगिक हमेश से अस्तित्व में है और हमेशा रहेंगे। जैन दर्शन के अनुसार यौगिक शाश्वत है। ईश्वर या किसी अन्य व्यक्ति ने इन्हे नहीं बनाया।