चालकों में विद्युत् धारा गुज़ारने से ऊष्मा उत्पन्न होती है। यह परिणाम सदा अच्छा नहीं होता क्योंकि हम से उपयोगी विद्युत् ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है और इससे परिपथ के अवयवों में ताप बहुत अधिक बढ़ सकता है, लेकिन विद्युत् धारा के नियंत्रित ऊष्मीय प्रभाव के महत्त्वपूर्ण उपयोग हैं
1. विद्युत् बल्ब -विद्युत् बल्ब में टंगस्टन की पतली तार का फिलामेंट लगाया जाता है जिसकी प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है। इसका गलनांक (3380 ° C भी काफ़ी अधिक होता है। जब इससे विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है तो यह ऊष्मा के कारण तापदीप्त होकर प्रकाश उत्सर्जित करने लगता है। बल्बों में प्रायः नाइट्रोजन या ऑर्गन गैस भरी जाती है जिससे उसके फिलामेंट की आय बढ़ जाती है।
विद्युत् तापीय सांधित्र-विद्युत् चालित, इस्तरी, सोल्डरिंग आयरन, टोस्टर, तंदूर, हीटर, केतली, रॉड आदि ऐसे उपकरण हैं जो विद्युत् धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित हैं। इन्हें ऐसे पदार्थों से बनाया जाता है, जिनकी प्रतिरोधकता अति उच्च होती है। इनमें प्रायः नाइक्रोम नामक मिश्रधातु, (`Ni = 67.5 %, Cr = 15 %, Fe = 15 %, Mn = 2: 5 %`) का उपयोग किया जाता है जिससे बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है।
3. विद्युत् फ़्यूज़-विद्युत् के परिपथों में फ़्यूज का प्रयोग बहुत सामान्य जाता है, जो उनकी सुरक्षा के लिए अति उपयोगी माना जाता है। इसे युक्ति के साथ श्रेणी क्रम में लगाया जाता है, जो अनावश्यक रूप स उच्च विद्युत् धारा को प्रवाहित नहीं होने देता। यह निर्दिष्ट मान से अधिक माप की विद्युत् धारा प्रवाहित होने पर पिघल जाता है और परिपथ टूट जाता है। घरेलू परिपथों में उपयोग होने वाली फ़्यूज की अनुमत विद्युत्-धारा 1A, 2A, 3A, 5A, 10A आदि होती है। इसमें विद्युत् साधित्रों को होने वाली क्षति नहीं पहुँचते और परिपथ में लगने वाली आग नहीं लगती।