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Class 11
PHYSICS
यह मानते हुए कि पृथ्वी एकसमान धनत्व का ए...

यह मानते हुए कि पृथ्वी एकसमान धनत्व का एक गोला है तथा इसके पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 250 N है, यह ज्ञात कीजिए कि पृथ्वी के केंद्र की ओर आधी दूरी पर इस वस्तु का भार क्या होगा ?

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The cost price of two articles is the same. One article among them is sold at a profit of 15% and the other is sold at a profit of 12%. if the difference between their selling prices is Rs 18, what is the cost price of each article? दो वस्तुओं का क्रय मूल्य समान है | इनमें से एक वस्तु 15% के लाभ पर तथा दूसरी वस्तु 12% के लाभ पर बेची जाती है | यदि उनके विक्रय मूल्य में 18 रुपये का अंतर है, तो प्रत्येक वस्तु का क्रय मूल्य क्या है ?

A shopkeeper marks the price of an article such that after giving a discount of 30%, he gains 20%. If the marked price of the article is Rs 480, what is the cost price of the article? एक दुकानदार किसी वस्तु की कीमत इस प्रकार रखता है कि 30% की छूट देने के बाद भी उसे 20% लाभ होता है| यदि उस वस्तु का अंकित मूल्य 480 रुपये है, तो उस वस्तु का क्रय मूल्य क्या है?

A shopkeeper marks the price of an article in such a way that after allowing a discount of 22%, he gets a gain of 11%. If the marked price is ₹ 888, then the cost price of the article is: एक दुकानदार किसी वस्तु का मूल्य इस प्रकार रखता है कि 22% की छूट देने के बाद भी उसे 11% लाभ होता है | यदि अंकित मूल्य 888 रुपये है, तो इस वस्तु का क्रय मूल्य कितना होगा ?

After offering a discount of 20% on an article, a trader earned a profit of 20%. If the cost price is Rs300, then what will be the selling price of the article after offering a discount of 25%? एक वस्तु पर 20% की छूट देने के बाद, एक व्यापारी को 20% का लाभ होता है | यदि क्रय मूल्य 300 रुपये है, तो 25% की छूट देने के बाद इस वस्तु का विक्रय मूल्य क्या होगा ?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, मृगतृष्णा का है। बाजार की मृगतृष्णा शिक्षार्थी को लोभ-लालच देकर अपनी तरफ दौडाते रहने को विवश करने को उतारू खड़ी है। बाजार के इन ललचाने वाले रास्तों पर आकर्षण है, चकाचौंध है और सम्मोहित कर देने वाले सपने हैं। दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है जो शांति दे सकता है, संतोष दे सकता है और हमारे आत्मतत्त्व को प्रबल करता हुआ विमल विवेक दे सकता है। निश्चित ही वह मार्ग श्रेयस्कर है, मगर अपनी ओर आकर्षित करने वाले बाजार का मार्ग प्रेयस्कर है। इस दोराहे पर खड़ा शिक्षार्थी बाजार को चुन लेता है। लाखों-करोड़ों लोग आज इसी रास्ते के लालच में आ गए हैं और शिक्षा के भंवरजाल में फंस गए हैं। बाजार की खूबी यही है कि वह फंसने का अहसास किसी को नहीं होने देता और मनुष्य लगातार फसता चला जाता है। किसी को यह महसूस नहीं होता कि वह दलदल में हैं बल्कि महसूस यह होता है कि बाजार द्वारा दिए गए पैकेज के कारण वह सुखी है। अब यह अलग बात है कि सच्चा सुख क्या है? और सुख का भ्रम क्या है? जरूरत विचार करने की है। सवाल यह है कि बाजार विचार करने का भी अवकाश देता है या कि नहीं। गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि:

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