किसी विभवमापी के तार में प्राथमिक परिपथ द्वारा एक निश्चित विभव स्थापित की गई है । द्वितीयक परिपथों में जुड़े एक मानक सेल (1.018 वोल्ट ) तथा एक अज्ञात सेल के लिए संतुलन बिंदु क्रमश: 305.4 सेमी तथा 450 सेमी पर प्राप्त होते है । ज्ञात कीजिये - (i ) विभवमापी के तार में विभव प्रवणता , (ii ) अज्ञात सेल का विधुत - वाहक बल ।
किसी विभवमापी के तार में प्राथमिक परिपथ द्वारा एक निश्चित विभव स्थापित की गई है । द्वितीयक परिपथों में जुड़े एक मानक सेल (1.018 वोल्ट ) तथा एक अज्ञात सेल के लिए संतुलन बिंदु क्रमश: 305.4 सेमी तथा 450 सेमी पर प्राप्त होते है । ज्ञात कीजिये - (i ) विभवमापी के तार में विभव प्रवणता , (ii ) अज्ञात सेल का विधुत - वाहक बल ।
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A pyramid has a square base. The side of square is 12 cm and height of pyramid is 21 cm. The pyramid is cut into 3 parts by 2 cuts parallel to its base. The cuts are at height of 7 cm and 14 cm respectively from the base. What is the difference (in cm^3 ) in the volume of top most and bottom most part? एक पिरामिड का आधार एक वर्ग है। वर्ग की भुजा 12 से.मी. तथा पिसमिड की ऊँचाई 21 से.मी. है। पिरामिड को उसके आधार के समांतर 2 कर्टावों से 3 भागों में काटा जाता है। कटाव आधार से. क्रमशः 7 से.मी. तथा 14 से.मी. को ऊँचाई पर है। सबसे ऊपर तथा सबसे नीचे के भाग के आयतन का अंतर ( से.मी.^3 में)क्या हैं।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्यांश में क्रोधी स्वभाव में कई तत्व बताये गए हैं, उनमेंसे एक है
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्यांश में आचार शास्त्र की सबसे जटिल समस्या एक कौन सी है?
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सहीविकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। क्रोध की एक विशेषता है कि
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्य में क्रोधी स्वभाव का आंकलन किया है
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। गद्यांश में आए जीवन को कडुआ बना देने से तात्पर्य है
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। अनुदारता शब्द का विलोमार्थी है
विद्यालय समाज की एक ऐसी संस्था है, जिसके कुछ सुनिश्चित एवं सुनिर्धारित लक्ष्य होते हैं, जबकि समुदाय का तात्पर्य ऐसे समूह से है जिसमें एक प्रकार के लोग होते हैं। यह एकत्व आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक या नागरिक गुणों में हो सकता है। कई समुदाय अपने लिए अलग विद्यालय की स्थापना भी कर लेते हैं। अपनी औपचारिक भूमिकाओं के अलावा अन्य भूमिकाओं के निर्वहन में भी विद्यालय समुदाय की सहायता करता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर समुदाय के क्रिया-कलापों में वह हस्तक्षेप भी करता है। उदाहरणस्वरूप प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियों को अभिभावकों तक पहुँचाने में भी विद्यालय यथासम्भव समुदाय की सहायता करता है एवं आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप भी करता है। अभिभावक एवं विद्यालय एक-दूसरे के सम्पर्क में रहते हैं। अभिभावक समुदाय की आवश्यकताओं से परिचित होते हैं तथा विद्यालय को भी इनसे अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर बीच की व्यवहार्य कड़ी का काम करते हैं। उदाहरणस्वरूप समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप अभिभावकगण प्रौढ़ शिक्षा, स्त्री शिक्षा इत्यादि में सहायता के लिए विद्यालय से अनुरोध करते हैं। इस तरह वे विद्यालय एवं समुदाय के बीच की व्यवहार्य कड़ी हैं। समुदाय के साथ निकट से जुड़ कर कार्य करने की स्थिति में विद्यालय अधिक प्रभावशाली हो जाता है। समुदाय और विद्यालय को जोड़ने में समाज के लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। समुदाय के क्रिया-कलापों में विद्यालय की भागीदारी होती है। यही कारण है कि विद्यालयों के लिए पाठ्यवस्तु इतना लचीला बनाया जाता है कि उसमें समाज के विभिन्न समुदायों की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखा जाए। जल संरक्षण की शिक्षा देने के लिए आवश्यक है कि विद्यालय परिसर में भी इनके संरक्षण के नियमों का पालन होता हो। इस तरह समुदाय की वास्तविकताओं को प्रायोगिक रूप से विद्यालय परिसर में प्रयोग कर उसे 8 अधिगम अनुभवों में रूपान्तरित किया जा सकता है। विद्यालय किसके सम्पर्क में रहता है?
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