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एक नगर में टेक्सी का किराया निम्नलिखित ह...

एक नगर में टेक्सी का किराया निम्नलिखित है:
पहले किलोमीटर का किराया रु 8 है और उसके बाद की दुरी के लिए प्रति किलोमीटर का किराया रु 5 है। यदि तय की गई दुरी x किलोमीटर हो और कुल किराया रु y हो, तो इसका एक रैखिक समीकरण लिखिए और उसका आलेख खीचिए।

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The taxi charges in a city contain fixed charges and additional charge per km. The fixed charge is for a distance of upto 5 km and additional charge/km there after. The charge for a distance of 10 km is ₹350 and for 25 km is ₹800. The charge for a distance of 30 km is :- एक शहर में टैक्सी का एक निश्चित किराया है और प्रति किमी अतिरिक्त शुल्क है। निश्चित किराया 5 किमी की दूरी के लिए है तथा उसके बाद प्रति किमी के लिए अतिरिक्त किराया है। 10 किमी दूरी का किराया ₹350 है तथा 25 किमी दूरी का किराया ₹800 है तो 30 किमी की दूरी का किराया ज्ञात करें।

निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। "..... और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है।" वाक्य में निपात है-

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। "..... और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है।" वाक्य में निपात है

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