(i) क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast)- ये कोशिका द्रव्य में हरे पौधों की समस्त कोशिकाओं में पाये जाते हैं। इनकी संख्या एक से सी तक हो सकती है। ये प्राय: तश्तरीनुमा अथवा कुछ पौधों की कोशिकाओं में गोलाकार हो सकते हैं स्पाइरोगायरा के क्लोरोप्लास्ट फीते या रिबन के समान होते हैं, परंतु क्लेमाइडोमोनास के हरितकवक प्यालेनुमा होते हैं । हारित लवक के चारों ओर दोहरी पर्तवाली इकाई की बनी दो झिल्लियां होती हैं। ग्रेनम लैमिली द्वारा जुड़े होते हैं। वैलेतुमा थाइलेकोइडस स्ट्रोमा में एक के ऊपर एक चट्टे के समान स्थित होते हैं। इसमें आनुवंशिक पदार्थ भी होता है।
क्लोरोप्लास्ट के कार्य-
(1) ये प्रकाश संश्लेषण के स्थान पर कार्य करते हैं। ये सृर्य की विकिरण ऊर्जा अवशोषित करते हैं ।
(2) प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में ऑक्सीजन मुक्त होती है।
(3) ये कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण करते हैं। अत: ये कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की सामान्य सांद्रता का स्थिरीकरण करते हैं।
(4) हरित लवक, वर्णी लवकों में परिवर्तित हो जाते हैं- उदाहरण फूल तथा फल।
(ii) अंत: प्रदर्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) - यह कोशिका के कोशिका द्रव्य में शिल्लियों का जाल होता है। यह दो प्रकार का होता है चिकनी अंतः प्रद्रव्यी जालिका तथा रूक्ष अंत: प्रदव्यी जालिका। राइबोसोम्स रूक्ष अंतः प्रद्रव्यी जालिका से जुड़े होते हैं । चिकनी अंत: प्रद्रव्यी जालिका पर कोई राइवोसोम नहीं होता, ये कलाविहीन कोशिकांग होते हैं। यह कोशिका के अंदर विभिन्न पदार्थों का भंडारण करते हैं ।
(iii) गॉल्जी काय (Golgi Body)-इन्हें गॉल्जी कांपलैक्स या गॉल्जी उपकरण कहते हैं। ये पोलीसेकहेराइडस, लिपिड्स तथा उन्हें कोशिका से बाहर निकालने में लगी होती हैं। पौधों में ड्रिक्टियोसोम्स कोशिका भित्ति संश्लेषण में शामिल होती हैं। गॉल्जी काय पुटिकाओं, थैलियों तथा नलिकाओं की बनी होती हैं। ये थैली या थेले के समान होवी हैं तथा एक के ऊपर एक चट्टेनुमा रखी होती हैं।
