(a)
(b) 1. दृढ़ता - दृढ़ता ठोस पदार्थों का गुण है। नगण्य संपीड़यता के कारण वे बाह्य बल लगाने पर भी अपने आकार को नहीं बदलते। ये अपने आकार को दृढ़ता के गुण प्रदान करते हैं। ठोस पदार्थों में आकर्षण बल के कारण दृढ़ता अधिक होती है। द्रव को थोड़ा दबाया जा सकता है और गैस को सरलता से दबाया जा सकता है।
2. संपीड़यता - संपीड़यता का संबंध स्थिर आयतन से है। ठोस पदार्थों में स्थिर आयतन होने के कारण नगण्य संपीड़यता होती है जबकि द्रव उसी बर्तन का आकार ले लेते हैं। जिस में रखे जाते हैं। वे दृढ़ नहीं बल्कि तरल होते हैं और अधिक संपीड्य नहीं होते। गैसों की संपीड़यता काफी अधिक होती है क्योंकि उनका आयतन निश्चित नहीं होता। जिस कारण गैसों के अत्यधिक आयतन को एक कम आयतन वाले सिलैंडर में सम्पीड़ित किया जा सकता है।
3. तरलता - तरलता तरल पदार्थों का गुण है जिनका निश्चित आकार नहीं होता पर निश्चित आयतन अवश्य होता है। तरलता बहने की प्रवृति है और इसमें द्रव का आकार बदलता है। ठोस बिलकुल नहीं बहते गैसें सब दिशाओं अवश्य होता है।
4. बर्तन में गैस का भरना - गैसों के कणों में अंतराअणुक बल क्षीण होने के कारण संपीड़यता बहुत अधिक होती है जिस कारण गैस के अत्यधिक आयतन को किसी कम आयतन वाले बर्तन में संपीडित किया जा सकता है और सरलतापूर्वक एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है।
5. आकार - पदार्थ के कणों के बीच एक बल कार्य करता है। यह बल कणों को एक साथ रखता है और वस्तु को आकार प्रदान करता है। इस आकर्षण बल का सामर्थ्य प्रत्येक पदार्थ में अलग-अलग होता है। ठोस पदाथों के कणों में अंतराणुक बल अधिक होता है जिस कारण उनका निश्चित आकार होता है। पर द्रवों और गैसों में ऐसा नहीं होता।
6. गतिज ऊर्जा - पदार्थों के कण सदा गतिशील रहते हैं जिसे गतिज ऊर्जा कहे हैं। तापमान के बढ़ने से कणों की गति तेज हो जाती है अर्थात तापमान बढ़ने से कणों की गतिज ऊर्जा भी बढ़ जाती है। ठोस में अधिक गतिज ऊर्जा नहीं होती। द्रव में कुछ गतिज ऊर्जा होती है, पर गैसों में उच्च गतिज ऊर्जा होती है।
7. घनत्व - किसी वस्तु का घनत्व प्रति एकांक आयतन के द्रव्यमान के बराबर होता है।
`"घनत्व" = ("पदार्थ का द्रव्यमान")/("पदार्थ का आयतन")`
ठोस पदार्थों का घनत्व उच्च होता है, द्रव में निम्न होता है, पर गैसों का घनत्व नगण्य होता है।