वृषण में अपरिपक्व नर जर्म कोशिकाएँ (शुक्राणुजन/स्पर्मेटोगोनिया) द्वारा शुक्राणु उत्पन्न करती है जो कि किशोरावस्था के समय शरू होती है। शुक्रजनक नलिकाओं (सेमिनिफेरस ट्यूब्यूल्स) की भीतरी भित्ति में उपस्थित शुक्राणुजन समसूत्री विभाजन (मायोटिक डिवीजन) द्वारा संख्या में वृद्धि करते। हैं। प्रत्येक शक्राणुजन द्विगुणित होता है और उसमें 46 गुणसूत्र (chromosome) होते हैं। कुछ शुक्राणुजनों में समय-समय पर अर्द्धसूत्री विभाजन या अर्द्धसूत्रण (मियोटिक डिवीजन) होता है जिनको प्राथमिक शुक्राणु कोशिकाएँ (primary spermitositis) कहते हैं। एक प्राथमिक शुक्राणु कोशिका प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन को पूरा करते हुए दो समान अगुणित कोशिकाओं की रचना करती है, जिन्हें द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाएँ कहते हैं। इस प्रकार उत्पन्न प्रत्येक कोशिका में 23 गुणसूत्र होते हैं। द्वितीयक शुक्राणु कोशिकाएँ दूसरे अर्द्धसूत्री विभाजन से गुजरते हुए चार बराबर अगुणित शुक्राणुप्रसु (spematids) पैदा करते हैं। शुक्राणुप्रस रूपांतरित होकर शुक्राणु (spermatozoa/sperm) बनाते हैं और इस प्रक्रिया को शुक्राणुजनन कहा जाता है।
