समष्टि (Population)-किसी जाति या समूह के जीवों की वह संख्या जो किसी एक भौगोलिक क्षेत्र में निवास करती है तथा आपस में प्रजनन करती है उसे समष्टि कहते हैं। प्रकृति में, हमें किसी भी जाति के प्राकि, एकल व्यष्टि के दर्शन बहुत ही कम होते हैं। उनमें से अधिकांश सुपरिभाषित भौगोलिक क्षेत्र में समूह में रहते हैं, समान संसाधनों का साझा उपयोग करते हैं अथवा उनके लिए प्रतियोगिता करते हैं, संकरण करते हैं और इस प्रकार वे समष्टि की रचना करते हैं।
S आकार की वृद्धि-इस प्रकार की वृद्धि किसी नए या परिवर्तित वातावरण में होती है जब किसी विशिष्ट जाति के समष्टि के घनत्व में धीमी वृद्धि होने लगती है। कुछ समय के पश्चात् इसकी वृद्धि तीव्र हो जाती है। इस अवस्था में वृद्धि चरघातांकी दर से होती है। परन्तु कुछ ही समय पश्चात् वृद्धि दर ऋणात्मक होने लगती है। धीरे-धीरे एक अवस्था ऐसी होती है जब वृद्धि दर पूरी तरह से शून्य हो जाती है। इस अवस्था में समष्टि की जनसंख्या संतुलित हो जाती है। Jआकार की वृद्धि के विपरीत इसमें जनसंख्या शून्य नहीं होती है बल्कि वृद्धि दर ही शून्य हो जाती है।
Jआकार की जनसंख्या वृद्धि-इस आकार की जनसंख्या वृद्धि में व्यक्ति की संख्या तेजी से चरघातांकी तरीके से बढ़ती है तथा एक निश्चित अंतराल में यह संख्या दुगुनी हो जाती है। अर्थात् यह 2, 4, 8, 16, 32 दर से आगे बढ़ती है। इसमें जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण करने वाले कारकों का अभाव होता है। जैसे-वर्षा ऋतु में कुछ कीटों की अप्रत्याशित ढंग से वृद्धि और वर्षा ऋतु के उपरांत उनका गायब हो जाना। इसे निम्न समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है
`(dN)/(dt) = rN` जहाँ
dN = जनसंख्या आकार में
परिवर्तन, dt = परिवर्तन का समय,
