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BIOLOGY
वान हेल्मान्ट ने स्वतःजनन या आजीवत जीवोत...

वान हेल्मान्ट ने स्वतःजनन या आजीवत जीवोत्पादन का मत किस आधार पर समझाया था ?

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 12 एक दिन तने ने भी कहा था, जड़? जड़ तो जड़ ही है, जीवन से सदा डरी रही है और यही है उसका सारा इतिहास कि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही हैं लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा बाहर निकला, बढ़ा हूँ. मजबूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ एक दिन डालों ने भी कहा था, तना? किस बात पर है तना? जहाँ बिठाल दिया था वहीं पर है बना प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है लेकिन हम तने से फूटी, दिशा-दिशा में गई ऊपर उठीं, नीचे आई, हर हवा के लिए दोल बनी, लहराईं इसी से तो डाल कहलाई। 'तना किस बात पर है तना?' पंक्ति में अलंकार है

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खली। थोड़ी देर में झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यो, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही जारी थी। न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मानाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा| "हम जैसे ढ़ीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मनाने का फैसला किया।" वाक्य में लेखक ने अपनी किस विशेषता को बताया है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-जैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलस डाला था। सावन सिर पर था और बादल लापता। कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खुली। थोड़ी देर में झींसियाँ पड़ने लगी। चारपाइयाँ आंगन से उठाकर भीतर कर ली गईं। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यों, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग जान बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात से ही जारी थी, न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मनाने का फैसला किया, जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकश देखने को मिलेगा। ''हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर 'रेनी डे' मनाने का फैसला किया।'' वाक्य में लेखक ने अपनी किस विशेषता को बताया है?