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Class 11
PHYSICS
एक वायुयान क्षैतिज वेग u से ऊँचाई h पर ग...

एक वायुयान क्षैतिज वेग u से ऊँचाई h पर गतिशील है। उसके द्वारा गिराये गये पैकेट का पृथ्वी तक पहुँचने पर वेग होगा (g = पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण ):

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The average marks obtained by a student in 9 subjects is 98. On subsequent verification it was found that the marks obtained by him in a subject was wrongly copied as 86 instead of 68. The correct average of the marks obtained by him is: एक छात्र द्वारा 9 विषयों में प्राप्त औसत अंक 98 है | फिर से जांच करने पर यह पाया गया कि उसके द्वारा एक विषय में प्राप्त किये गए अंक 68 के बजाय 86 लिखे गए थे | उसके द्वारा प्राप्त अंकों का सही औसत है :

An aeroplane flying horizontally at a height of 3 Km. above the ground is observed at a certain point on earth to subtend an angle of 60^@ . After 15 sec flight, its angle of elevation is changed to 30^@ . The speed of the aeroplane (taking sqrt3 = 1.732) is- कोई वायुयान पृथ्वी की सतह से 3 कि.मी. ऊपर क्षेतिज उड़ रहा है। पृथ्वी से किसी बिन्दु से यह देखने में आता है कि वह 60^@ के कोण पर कक्षांतरित होता है। 15 सेकण्ड बाद उसका उन्नयन कोण 30^@ परिवर्तित हो जाता हैं वायुयान की चाल बताइए। ( sqrt3 =1.732)

A vertical tower stands on a horizontal plane and is surmounted by a vertical flag staff of height h. At a point on the plane, the angle of elevation of the bottom of the flag staff is alpha and that of the top of the flag staff is beta . then the height of the tower is एक ऊर्ध्वाधर मीनार एक क्षेतिज समतल पर खड़ी है और उसके ऊपर 1 ऊँचाई का ऊर्ध्वाधर ध्वजखण्ड लगा है। समतल पर एक बिन्दु पर ध्वजदण्ड के तल का उन्नयन कोण alpha है और ध्वजदण्ड के शीर्ष भाग का beta है। मीनार की ऊँचाई बताइए ?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 16 भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का जिससे दबाता एक जन भाग दूसरे जन का पूछो किसी भाग्यवादी से यदि विधि अंक प्रबल है, पद पर क्यों देती न स्वयं वसुधा निज रतन उगल है? उपजाता क्यों विभव प्रकृति को सींच-सींच वह जल से क्यों न उठा लेता निज सचित अर्थ पाप के बल से, और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से। नर समाज का भाग्य एक है वह श्रम, वह भुज-बल है। जिसके सम्मुख झुकी हुई है। पृथ्वी, विनीत नभ-तल है। नर समाज का भाग्य क्या है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 16 भाग्यवाद आवरण पाप का और शस्त्र शोषण का जिससे दबाता एक जन भाग दूसरे जन का पूछो किसी भाग्यवादी से यदि विधि अंक प्रबल है, पद पर क्यों देती न स्वयं वसुधा निज रतन उगल है? उपजाता क्यों विभव प्रकृति को सींच-सींच वह जल से क्यों न उठा लेता निज सचित अर्थ पाप के बल से, और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से। नर समाज का भाग्य एक है वह श्रम, वह भुज-बल है। जिसके सम्मुख झुकी हुई है। पृथ्वी, विनीत नभ-तल है। भाग्यवाद क्या है?