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PHYSICS
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए...

समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए सूत्र का निगमन कीजिए। इसकी धारिता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है?

लिखित उत्तर

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परावैद्युत ध्रुवण -बाह्य विद्युत क्षेत्र में परावैद्युत पदार्थों में धनवेशों तथा ऋणावेशों के आपेक्षिक विस्थापित होने की घटना को परावैद्युत पदार्थों का वैद्युत ध्रुवण कहते हैं।
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का व्यंजक-दो समतल तथा समान्तर धातु की प्लेटों एवं उनके बीच स्थित विद्युत रोधी माध्यम से बने संकाय को समान्तर प्लेट संधारित्र कहते हैं।
माना `P_1` व `P_2` धातु की दो समतल प्लेंटे हैं, जिनके बीच की दूरी d तथा प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A है। माना प्लेटों के बीच भरे माध्यम का परावैद्युतांक K है। जब प्लेट `P_1` को + q आवेश दिया जाता है तो प्लेट `P_2` पर प्रेरण के कारण - q आवेश उत्पन्न हो जाता है। चूँकि प्लेट `P_2` पृथ्वी से जुड़ी है इसीलिए इसके बाह्य तल का +q आवेश पृथ्वी से आने वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा निरावेशित हो जाता है। इस `P_1` व `P_2` पर बराबर तथा विपरीत प्रकार के आवेश होगा।
प्रत्येक प्लेट पर आवेश का पृष्ठ घनत्व = `sigma=q/A`
प्लेटों के बीच किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता `E=sigma/(K epsilon_0)`
`sigma` का मान रखने पर, विद्युत क्षेत्र की तीव्रता `E=q/(K epsilon_0 A)` ...(1)
माना दो प्लेटों के बीच विभवान्तर वोल्ट है, तब प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = V/d अथवा V=Ed
समीकरण (1) से E का मान रखने पर, `V=(qd)/(Kepsilon_0A)`
अत: संधारित्र की धारिता `C=q/V = q/(qd//K epsilon_0A) = (Kepsilon_0 A)/d` फैरड
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है-
1. प्लेटों के क्षेत्रफल A पर-`C prop A` अर्थात् धारिता प्लेटों के क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती होती है, तो संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों का क्षेत्रफल A का अधिक होना चाहिए अर्थात् प्लेटें बड़े क्षेत्रफल की लेनी चाहिए।
2. प्लेटों के बीच की दूरी d पर-`C prop 1//d` अर्थात् धारिता प्लेटों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अतः संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों के बीच की दूरी d कम होनी चाहिए अर्थात् प्लेटें एक-दूसरे के समीप रखनी चाहिए।
3. प्लेटों के बीच के माध्यम पर- `CpropK ` अर्थात् धारिता माध्यम के परावैद्युतांक के अनुक्रमानुपाती होती है, अतः संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों के बीच ऐसा माध्यम अर्थात् पदार्थ रखना चाहिए जिसका परावैद्युतांक (K) अधिक हो।
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