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PHYSICS
एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर के प्राथमिक व द्...

एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर के प्राथमिक व द्वितीयक कुण्डलियों में फेरों की संख्याएँ क्रमशः 100 तथा 8000 हैं। यदि प्राथमिक में 120 वोल्ट का प्रत्यावर्ती विभवान्तर लगाया जाए, तो परिणमन अनुपात तथा द्वितीयक में उत्पन्न वोल्टता ज्ञात कीजिए।

लिखित उत्तर

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ट्रांसफॉर्मर का सिद्धान्त–ट्रांसफॉर्मर अन्योन्य प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है। निकट स्थित दो कुण्डलियों में से एक कुण्डली में प्रवाहित धारा के मीन में परिवर्तन के कारण दूसरी कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण, इस कुण्डली में एक विद्युत वाहक बल उत्पन्न होने की घटना को अन्योन्य प्रेरण कहते हैं।
ट्रांसफॉर्मर की कार्यविधि-ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित करने पर लोह क्रोड चुम्बकित हो जाती है। धारा के प्रत्येक चक्र में क्रोड एक बार एक दिशा में तथा दूसरी बार दूसरी दिशा में चुम्बकित हो जाती है। क्रोड के बार-बार चुम्बकन व विचुम्बकन के कारण उससे बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में निरन्तर परिवर्तन के कारण द्वितीयक कुण्डली में फ्लक्स परिवर्तन के कारण उसी आवृत्ति का प्रत्यावर्ती वैद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है।

उच्चायी ट्रांसफॉर्मर-यह ट्रांसफॉर्मर निम्न विभव की उच्च धारा को उच्च विभव की निम्न धारा में परिवर्तित करता है। उच्चायी ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली में फेरों की संख्या कम व द्वितीयक कुण्डली में फेरों की संख्या अधिक होती है।
अपचायी ट्रांसफॉर्मर-यह ट्रांसफॉर्मर उच्च विभव की निम्न धारा को निम्न विभव की उच्च धारा में परिवर्तित करता है। अपचायी ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली में फेरों की संख्या अधिक व द्वितीयक कुण्डली में फेरों की संख्या कम होती है।
ट्रांसफॉर्मर में ऊर्जा क्षय के कारण-ट्रांसफॉर्मर में निम्न कारणों से हानियाँ (ऊर्जा क्षय) होती हैं
(i) ताम्रिक हानि-ट्रांसफॉर्मर की ताँबे से बनी कुण्डलियों में धारा प्रवाह के कारण `I^2R` शक्ति हानि ऊष्मा के रूप में होती है। उसे ताम्रिक हानि कहते हैं जिसे मोटे तार प्रयुक्त करके कम किया जा सकता है। (ii) फ्लक्स हानि-ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक एवं द्वितीयक कुण्डलियों में युग्मन सही न हो पाने के कारण प्राथमिक कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स द्वितीयक कुण्डली से पूर्णत: सम्बद्ध नहीं हो पाता है। इस कारण होने वाली वैद्युत ऊर्जा का ह्रास, फ्लक्स हानि कहलाती है। (iii) लौह हानि-ट्रांसफॉर्मर की क्रोड में उत्पन्न भँवर धाराओं के कारण ऊष्मा के रूप में ऊर्जा की हानि होती है, जिसे लौह हानि कहते हैं। (iv) शैथिल्य हानि–ट्रांसफॉर्मर की क्रोड के चुम्बकन तथा विचुम्बकन की क्रिया में ऊर्जा की हानि होती है, जिसे शैथिल्य हानि कहते हैं। (v) क्रोड के कम्पन के कारण हानि-चुम्बकीय आकारान्तर प्रभाव के कारण ट्रांसफॉर्मर अवकल ध्वनि उत्पन्न होती है। इसके कारण क्रोड में उत्पन्न कम्पन के कारण वैद्युत ऊर्जा की यान्त्रिक ऊर्जा के रूप में हानि होती है।
दिया है, `N_P = 100 , N_S = 8000`
`e_P = 120 V, r = ? , e_S =? `
परिणमन अनुपात `(r ) = N_S/N_P = 8000/100 = 80`
परिणमन अनुपात ` (r ) = (e_S)/(e_P)`
` e_S = r xx e_P = 80 xx 120 V = 9600 V`
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