माना धारामापी का अमीटर में रूपान्तरण - इसके लिए एक निम्न प्रतिरोध को धारामापी के समान्तर - क्रम में जोड़ देते है, जिसे शन्ट कहते है।
माना धारामापी जिसे अमीटर में परिवर्तित करना है का वैधुत प्रतिरोध G तथा इसके समान्तर - क्रम में s प्रतिरोध का शन्ट लगाया गया है। अमीटर से मापी जा सकने वाली अधिकतम धारा i ऐम्पियर है। जब परिपथ में प्रवाहित धारा i है तब उसके श्रेणीक्रम में अमीटर लगाने पर धारामापी में `i_(g)` धारा तथा शन्ट में `(i-i_(g))` धारा होकर गुजरती है। धारामापी एवं शन्ट परस्पर समान्तर - क्रम में है, जिस कारण इनके सिरों पर विभवान्तर समान होगा।
अतः `i_(g)xxG=(i" "i_(g))xxs`
अथवा `s=((i_(g))/(i-i_(g)))G`
इस प्रकार धारामापी को अमीटर में परिवर्तित करने के लिए उससे सम्बन्धित शन्ट s का मान इस बात पर निर्भर करता है की धारामापी को किस प्रास के अमीटर में परिवर्तित करना है
धारामापी का वोल्टमीटर में रूपान्तरण - इसके लिए धारामापी के श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध जोड़कर उसे वोल्टमीटर में परिवर्तित किया जा सकता है। धारामापी के श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध को जोड़ने पर उनका परिणामी प्रतिरोध बहुत बढ़ जाता है तथा इस संयोजन को उन बिंदुओं के बीच, जिनके बीच विभवान्तर ज्ञात करना है समान्तर - क्रम में संयोजित करने पर धारामापी से होकर अत्यन्त क्षीण धारा बहती है तथा इस संयोजन के सिरों पर विभवान्तर के बराबर होता है। एक आदर्श वोल्टमीटर का वैधुत प्रतिरोध अनन्त होता है।
माना धारामापी जिसे वोल्टमीटर में परिवर्तित करना है का वैधुत प्रतिरोध G है तथा इसके श्रेणीक्रम में जोड़ा गया उच्च प्रतिरोध R है। संयोजन में `i_(g)` धारा प्रवाहित होने पर इसके सिरों पर विभवान्तर V है।
अतः संयोजन के सिरों पर विभवान्तर
`V=i_(g)(R+G)`
अथवा `R=(V)/(i_(g))-G`
इस प्रकार धारामापी को वोल्टमीटर में परिवर्तित करने के लिए उसके श्रेणीक्रम में जोड़े गए प्रतिरोध R का मान इस बात पर निर्भर करता है कि उसे किस परास के वोल्टमीटर में परिवर्तित करना है।