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Class 12
PHYSICS
p- सन्धि के लिए हासी स्तर (depletion luy...

p- सन्धि के लिए हासी स्तर (depletion luyer) तथा रोधिका विभव (barrier potential) की व्याख्या कीजिए। p-n सन्धि डायोड अर्द्ध-तरंग विष्टकारी के रूप में कैसे प्रयुक्त होता है?

लिखित उत्तर

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अवक्षय परत या हासी स्तर-(अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर 13 देखें)।
विभव प्राचीर या रोधिका विभव (लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर I का प्रश्न 5 देखें)।
p-n सन्धि डायोड अर्द्ध-तरंग दिष्टकारी के रूप में-p-n सन्धि डायोड, अग्र अभिनत स्थिति में धारा को एक दिशा में प्रवाहित करने के लिए इसके मार्ग में बहुत कम प्रतिरोध लगाता है तथा उत्क्रम अभिनत में धारा को विपरीत दिशा में प्रवाहित करने के लिए इसके मार्ग में बहुत अधिक प्रतिरोध लगाता है। इस गुण के आधार पर p-n सन्धि डायोड, डायोड वाल्व की भाँति दिष्टकारी के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। p-n सन्धि डायोड का अर्द्ध तरंग निवेशी दिष्टकारी परिपथ चित्र-(a) में तथा इसके निवेशी व निर्गत तरंग रूपों को चित्र-(b) में प्रदर्शित किया गया है। जिस प्रत्यावर्ती वोल्टता को दिष्टीकृत करना होता है अर्थात् निवेशी प्रत्यावर्ती वोल्टेज को एक उच्चायी ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली (P) के सिरों के बीच लगा देते हैं। सन्धि डायोड के p क्षेत्र को ट्रांसफॉर्मर की द्वितीयक कुण्डली 5 के एक सिरे A से जोड़ देते हैं तथा क्षेत्र को एक लोड प्रतिरोध `R_(L)` के सिरे C से जोड़ देते हैं। लोड प्रतिरोध `R_(L)` का दूसरा सिरा D द्वितीयक कुण्डली के दूसरे सिरे से जोड़ देते हैं। निर्गत दिष्ट वोल्टेज (या विभव) को लोड प्रतिरोध `R_(L)` के सिरों पर प्राप्त किया जाता है।

कार्यविधि—निवेशी प्रत्यावर्ती वोल्टेज के पहले आधे चक्र में, जब द्वितीयक कुण्डली का A सिरा B सिरे के सापेक्ष धनात्मक है (अर्थात् सन्धि डायोड का p-क्षेत्र धनात्मक तथा n-क्षेत्र ऋणात्मक विभव पर होता है) तो p-nसन्धि डायोड अग्र अभिनत होता है, अत: इसमें से होकर धारा प्रवाहित होती है। इस प्रकार से लोड प्रतिरोध `R_(L)`. मे धारा C से D की ओर बहती है। इसके विपरीत निवेशी प्रत्यावर्ती वोल्टेज के दूसरे आधे चक्र में, जब द्वितीयक कुण्डली का A सिरा B सिरे के सापेक्ष ऋणात्मक है (अथवा सन्धि डायोड का p-क्षेत्र ऋणात्मक तथा -क्षेत्र धनात्मक विभव पर होता है) तो p-n. सन्धि डायोड उत्क्रम अभिनत होता है। इस दशा में लोड प्रतिरोध R, में धारा शून्य होती है। इस प्रकार निर्गत धारा केवल निवेशी वोल्टता के पहले आये चक्रों में प्रवाहित होती है शेष आधे चक्र कट जाते हैं। चित्र-(b) के निचले भाग में धारा का तरंग रूप दिखाया गया है जिसमें थोड़ी-थोड़ी दूर पर (अर्थात् थोड़ी-थोड़ी देर में) धारा के एकदिशीय स्पन्द प्रदर्शित हैं। इस प्रकार p-n सन्धि डायोड अर्द्ध-तरंग दिष्टकारी की भाँति कार्य करता है।
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