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PHYSICS
सोलर सेल की संरचना तथा कार्य-विधि समझाइए...

सोलर सेल की संरचना तथा कार्य-विधि समझाइए।

लिखित उत्तर

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सौर सेल–सौर सेल एक विशिष्ट प्रकार का अनअभिनत (unbiused)p-n सन्धि डायोड होता है जो सौर ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। सौर सेल मे p-n सन्धि डायोड का p-टाइप क्षेत्र काफी पतला (लगभग `0.2mu`) होता है जिससे इस पर आपतित प्रकाशफोटॉन बिना अधिक अवशोषित हुए. p-n सन्धि पर पहुंच जाते हैं। p-टाइप क्षेत्र से एक धात्विक अंगुलीनुमा इलेक्ट्रोड (finger electride) सम्बन्धित रहता है जो ऐनोड का कार्य करता है। डायोड के n-टाइप क्षेत्र के पदार्थ की प्रकृति, P-टाइप क्षेत्र के पदार्थ को प्रकृति के समान होती है परन्तु इसकी मोटाई p टाइप क्षेत्र की अपेक्षा बहुत अधिक (लगभग `300 mu`) होती है। इसके नीचे एक धातु की परत होती है जो कैथोड की भाँति कार्य करती है। सौर सेल की संरचना को चित्र-(a) तथा इसके प्रतीक को चित्र-(b) में प्रदर्शित किया गया है।

कार्य-विधि-सौर सेल बनाने के लिए सिलिकन अर्द्धचालक (`E_(g) = 1.2 ev`) तथा गैलियम आर्सेनाइड अद्धचालक (`"GaAs", E_(g)~~ 51.58 eV`) का प्रयोग किया जाता है क्योंकि सौर-विकिरण की अधिकतम ऊर्जा लगभग 1.50ev कोटि की होती है। गैलियम आसेनाइड की फोटॉन अवशोषण क्षमता (अवशोषण गुणांक) लगभग `10^(4)` प्रति सेमी अति उच्च होती है, अत: यह सौर सेल बनाने के लिए सिलिकन की तुलना में श्रेष्ठ है। जब सूर्य का प्रकाश सौर सेल पर आपतित होता है तो यह टाइप क्षेत्र को पार कर p-n सन्धि पर पहुंच जाता है, जहाँ पर यह सहसंयोजो बन्धों को तोड़कर इलेक्ट्रॉन कोटर युग्म उत्पन्न कर देता है। अवक्षय परत में n-क्षेत्र से p-क्षेत्र की ओर विद्यमान वैद्युत क्षेत्र `E_(i)` के कारण p-क्षेत्र में उत्पन्न इलेक्ट्रॉन-कोटर युग्म के इलेक्ट्रॉन-क्षेत्र की ओर गति करते हैं और शेष बचे कोटर P-क्षेत्र में रह जाते हैं। n- क्षेत्र में उत्पन्न इलेक्ट्रॉन-कोटर युग्म के कोटर वैद्युत क्षेत्र `E_(i)` के कारण p-क्षेत्र की ओर गति करते हैं और शेष बचे इलेक्ट्रॉन । क्षेत्र में रह जाते हैं। इस प्रकार p क्षेत्र में अतिरिक्त कोटर एवं क्षेत्र में अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण यह युक्ति एक बैटरी की भांति व्यवहार करती है।
एक सौर सेल से लगभग 0.4 वोल्ट से 0.5 वोल्ट पर लगभग 60 मिलीऐम्पियर धारा प्राप्त होती है। अत: व्यावहारिक उपयोग के लिए अनेक सौर सेलों को एक विशेष श्रेणीक्रम एवं समान्तर-क्रम संयोजन में व्यवस्थित कर प्रयुक्त करते हैं। सौर सेलों के संयोजन से बनी यह युक्ति सोलर पैनल (solar panel) कहलाती है।
सौर सेल के उपयोग-1. सौर सेलों से बने सोलर पैनलों का प्रयोग सुदूर क्षेत्रों (remote areas) में जहाँ वैद्युत ऊर्जा के कोई भी स्रोत उपलब्ध नहीं होते हैं, स्ट्रीट लाइट, रेडियो, टेलीविजन आदि उपकरणों को चलाने में किया जाता हैं।
2. सौर सेलों से बने सोलर पैनलों का प्रयोग सोलर वाटर हीटर के रूप में किया जाता है।
3. कृत्रिम उपग्रहों में लगी बैटरियों के आवेशन के लिए सोलर पैनलों का उपयोग किया जाता है।
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