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दो नाविक एक नदी के दो सम्मुख किनारों से ...

दो नाविक एक नदी के दो सम्मुख किनारों से एक साथ विपरीत दिशा में चलने के 45 मिनट बाद एक दूसरे को पार (cross) करते हैं। वे जब तक नाव चलाते हैं जब तक कि दूसरे किनारे पर पहुँच कर वापस उसी प्रारंभिक किनारे पर न आ जाएँ। वे दोबारा एक दूसरे को कब पार करेंगे?

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। 'तैरकर जाते हैं उस पार' पंक्ति में 'तैरकर' शब्द को पहले रखा गया है, क्योकि

निम्न कविता की पंक्तियाँ पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए: नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ वहाँ कतार में बँधी हैं नावें बाँस की खूटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कंधों पर हल रखे, रभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार। माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर मैं नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। तैरकर जाते हैं उस पार' पंक्ति में तैरकर' शब्द को पहले रखा गया है क्योंकि

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। इस कविता में कौन किसे सम्बोधित कर रहा है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। लेखक नाविक क्यों बनना चाहता है?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। नावों को बाँसों की खूँटियों से क्यों बाँधा गया होगा?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। 'माँ तू बुरा न माने तो' पंक्ति किस ओर संकेत नहीं करती?

दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 27 नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ, वहाँ कतार में बँधी है, नावें बॉस की खूँटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कन्धों पर हल रखें, रँभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार । माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर में नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। कविता में पुनरुक्त शब्द-युग्म आए है

निम्न कविता की पंक्तियाँ पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए: नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ वहाँ कतार में बँधी हैं नावें बाँस की खूटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कंधों पर हल रखे, रभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार। माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर मैं नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। नावों को बाँसों की खूटियों से क्यों बाँधा गया होगा?

निम्न कविता की पंक्तियाँ पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए: नदी के उस पार जाने को मेरा बहुत मन करता है माँ वहाँ कतार में बँधी हैं नावें बाँस की खूटियों से। उसी रास्ते दूर-दूर जाते हैं हल जोतने किसान कंधों पर हल रखे, रभाते हुए गाय-बैल तैरकर जाते हैं उस पार घास चरने शाम को जब वे लौटते हैं घर ऊँची-ऊँची घास में छिपकर हुक्के-हो करते हैं सियार। माँ तू बुरा न माने तो बड़ा होकर मैं नाव खेने वाला एक नाविक बनूँगा। इस कविता में कौन किसे संबोधित कर रहा है?

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