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Class 12
CHEMISTRY
फ्रेंकेल दोष एवं शॉट्की दोष क्या हैं? उद...

फ्रेंकेल दोष एवं शॉट्की दोष क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

लिखित उत्तर

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(i) शॉट्की दोष—यह आधारभूत रूप से आयनिक ठोसों का रिक्तिका दोष है। जब एक परमाणु अथवा आयन अपनी सामान्य (वास्तविक) स्थिति से लुप्त हो जाता है तो एक जालक रिक्तता निर्मित हो जाती है, इसे शॉट्की दोष कहते हैं। विद्युत उदासीनता को बनाए रखने के लिए लुप्त होने वाले धनायनों और ऋणायनों की संख्या बराबर होती है। शॉट्की दोष उन आयनिक पदार्थों द्वारा दिखाया जाता है जिनमें धनायन और ऋणायन लगभग समान आकार के होते हैं। उदाहरणार्थ-NaCl, KC1, CSC1 और AgBr शॉट्की दोष . दिखाते हैं।
(ii) फ्रेंकेल दोष-यह दोष आयनिक ठोसों द्वारा दिखाया जाता है। इसमें लघुतर आयन (साधारणतया धनायन) अपने वास्तविक स्थान से विस्थापित होकर अन्तराकाश में चला जाता है। यह वास्तविक स्थान पर रिक्तिका दोष और नए स्थान पर अन्तराकाशा दाष उत्पन्न करता है, अत: कल दोष को विस्थापन दोष भी कहते हैं। यह ठोस के घनत्व को परिवर्तित नहीं करता है। फ्रेंकेल दोष उन आयनिक पदार्थों द्वारा दिखाया जाता है जिनमें आयनों के आकार में अधिक अन्तर होता है। उदाहरणार्थ-ZnS, AgCI, AgBr और AgI में। यह दोष `Zn^(2+) Ag^(2+)` आयन के लघु (छोटे) आकार के कारण होता है।
(iii) अन्तराकाशी दोष-जब कुछ अवयवी कण (परमाणु अथवा अणु) अन्तराकाशी स्थल पर पाए जाते हैं तब उत्पन्न दोष अन्तराकाशी दोष कहलाता है। यह दोष पदार्थ के घनत्व को बढ़ाता है। अन्तराकाशी दोष अनआयनिक ठोसों में पाया जाता है। आयनिक ठोसों में सदैव विद्युत उदासीनता बनी रहनी चाहिए। इस कारण इनमें यह दोष दिखाई नहीं देता है।.
(iv) F-केन्द्र-जब क्षारकीय हैलाइड जैसे NaCl को क्षार धातु (जैसे-सोडियम) की वाष्प के वातावरण में गर्म किया जाता है तो सोडियम परमाणु क्रिस्टल की सतह पर जम जाते हैं। `CI^(-)` आयन क्रिस्टल की सतह में विसरित हो जाते हैं और Na परमाणुओं के साथ जुड़कर NaCl देते हैं। ऐसा Na + आयन बनाने के लिए Na परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन के निकल जाने से होता है। निर्मुक्त इलेक्ट्रॉन विसरित होकर क्रिस्टल के ऋणायनिक स्थान को अध्यासित कर लेते हैं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों द्वारा भरी जाने वाली इन ऋणायनिक रिक्तिकाओं को F-केन्द्र कहते हैं। ये NaCl क्रिस्टलों को पीला रंग प्रदान करते हैं। यह रंग इन इलेक्ट्रॉनों द्वारा क्रिस्टल पर पड़ने वाले प्रकाश से ऊर्जा अवशोषित करके उत्तेजित होने के परिणामस्वरूप दिखता है।
चूँकि इस दोष के परिणामस्वरूप क्रिस्टल में धातु (सोडियम) का आधिक्य हो जाता है, अत: इसे धातु आधिक्य दोष भी कहते हैं।
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