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Class 12
CHEMISTRY
ऋणात्मक उत्प्रेरण की व्याख्या दो उदाहरणो...

ऋणात्मक उत्प्रेरण की व्याख्या दो उदाहरणों सहित कीजिए।

लिखित उत्तर

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(i) ऋणात्मक उत्प्रेरक-उत्प्रेरण अभिक्रियाओं में जब प्रयुक्त उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया की गति को घटता है तो घटना ऋणात्मक उत्प्रेरण कहलाती है तथा वह उत्प्रेरण ऋणात्मक उत्प्रेरक कहलाता है।
उदाहरण- (a) हाइड्रोजन परॉक्साइड `(H_(2)O_(2))` साधारण ताप पर स्वयं ही जल तथा ऑक्सीजन में अपघटित होता रहता है, परन्तु फास्फोरिक अम्ल या ग्लिसरीन इस अभिक्रिया में ऋणात्मक उत्प्रेरक है।
`2H_(2)O_(2)underset("ऋणात्मक उत्प्रेरक")overset(H_(3)PO_(4)"या ग्लिसरीन")rarrH_(2)O_(2)+O_(2)uarr`
(b) वायु द्वारा क्लोरोफॉर्म के फॉस्जीन में परिवर्तन को 2% एथेनॉल विलयन मिलाने पर कम किया जा सकता है। यहां पर एथेनॉल ऋणात्मक उत्प्रेरक का कार्य करता है। `4CHCl_(3)(l)+3O_(2)(g)("एथेनॉल")/("ऋणात्मक उत्प्रेरक")4COCl_(2)+2H_(2)O+2Cl_(2)uarr` तथा `2CHCl_(3)(l)+O_(2)(g)("एथेनॉल")/("ऋणात्मक उत्प्रेरक")underset(("फॉस्जीन"))underset("कार्बोनिल क्लोराइड")(2COCl_(2))+2HCl`
इसका विषाक्त होने का कारण फास्जीन गैस का बनना है।
स्कन्दन- जब किसी कोलॉइडी कणो के आवेश को अपघट्य का विलयन से विपरीत आवेशित आयन उदासीन करता है, फलस्वरूप उनका आकार बढ़ जाता है और वह अवक्षेपित हो जाते है। इस अवक्षेपण को स्कन्दन कहते है।
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