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Class 12
CHEMISTRY
द्रव-स्नेही तथा द्रव-विरोधी कोलॉइडो में ...

द्रव-स्नेही तथा द्रव-विरोधी कोलॉइडो में कौन अधिक स्थायी है? दोनों का एक-एक उदाहरण दीजिए।

लिखित उत्तर

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(i) द्रव-स्नेही कोलॉइड-वे कोलॉइड पदार्थ, जो किसी विलायक के सम्पर्क में आकर शीघ्रता से कोलॉइडी विलयन बनाते है, द्रव-स्नेही कोलॉइड कहलाते है। ये प्रायः स्थायी होते है क्योकि ये विद्युत-अपघट्यो के विलयनों द्वारा शीघ्र अवक्षेपित नहीं होते है। इनको अवक्षेपित करने के बाद, फिर से किसी उचित विद्युत-अपघट्य के विलयन द्वारा सुगमता से कोलॉइडी विलयन में परिवर्तित किया जा सकता है। इस विशेष गन के आधार पर इन्हे उत्क्रमणीय कोलॉइड कहते है। यदि जल विलायक के रूप में प्रयुक्त होता है तो उस कोलॉइड को जल-स्नेही कोलॉइड कहते है, जैसे-जिलेटिन, स्टार्च, गोंद, प्रोटीन आदि।
(ii) द्रव-विरोधी कोलॉइड-वे कोलॉइड, पदार्थ, जो विलायक के सम्पर्क में आने पर सरलता से कोलॉइडी विलयन नहीं बनाते है, द्रव-विरोधी कोलॉइड कहलाते है। ये प्रायः कम स्थायी होते है क्योकि विद्युत-अपघट्यो के विलयनों द्वारा शीघ्रता से अवक्षेपित हो जाते है। इन्हे अवक्षेपित करने के बाद, फिर से कोलॉइडी विलयन में परिवर्तित करना प्रायः कठिन होता है, अतः ये अनुत्क्रमणीय कोलॉइड कहलाते है। यदि जल विलायक के रूप में प्रयुक्त होता है तो उस कोलॉइड को जल-विरोधी कोलॉइड कहते है,
जैसे- धातु (Zn), धातु ऑक्साइड (ZnO), धातु हाइड्रॉक्साइड `[Fe(OH)_(3)]`, धातु सल्फाइड `(As_(2)S_(3))` आदि।
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