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CHEMISTRY
d-ब्लॉक के तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनि...

d-ब्लॉक के तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। d-ब्लॉक के किसी श्रेणी में परमाणुओं के आयनन विभव किस प्रकार परिवर्तित होते हैं?

लिखित उत्तर

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d-ब्लॉक के तत्वों के सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 1 देखें।
संक्रमण तत्वों के गुण
(i) धात्विक प्रकृति-बाह्यतम कोश में केवल 1 या 2 इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण संक्रमण तत्व धात्विक गुण (अभिलक्षण) प्रदर्शित करते हैं अर्थात् ये कठोर, आघातवर्ध्य तथा तन्य होते है (मर्करी को छोड़कर, जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में होती है)।
(ii) गलनांक व क्वथनांक-अपूर्ण d-उपकोशों की उपस्थिति के कारण इनके मध्य सहसंयोजक बल कार्य करते हैं। अत: इनके मध्य धात्विक व सहसंयोजक दोनों प्रकार के बल कार्य करते हैं जो इनके परमाणुओं को आपस में मजबूती से बाँधे रखते हैं। यही कारण है कि इनके गलनांक व क्वथनांक s-तथा p ब्लॉक के तत्वों की अपेक्षा उच्च होते हैं।
Zn, Cd तथा Hg में (n-1) d उपकोश में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होते हैं, अतः इनके मध्य केवल धात्विक आबन्ध उपस्थित होते हैं जिस कारण इनके गलनांक व क्वथनांक निम्न होते हैं। Mn में यद्यपि पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं, परन्तु फिर भी इसका गलनांक व क्वथनांक असामान्य रूप से कम होता है। इसका कारण इसकी जालक संरचना है जिसके कारण यह धात्विक व सहसंयोजक आबन्ध बनाने में असमर्थ रहता है।
(iii) अनुचुम्बकीय गुणधर्म-अधिकतर संक्रमण तत्वों में व-उपकोश आंशिक भरे होने के कारण ये अनुचुम्बकीय गुण प्रदर्शित करते हैं। यह गुण ताप के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा इसका मान बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र पर निर्भर नहीं होता है। अत: यह गुण इलेक्ट्रॉन के चक्रण के कारण व्यक्त होता है। यदि किसी परमाणु आयन में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हों तो इलेक्ट्रॉन युग्म के दोनों इलेक्ट्रॉनों के चक्रण चुम्बकीय आपूर्ण के मान समान परन्तु विपरीत दिशाओं में होंगे और ये एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे, अत: अनुचुम्बकत्व नहीं होगा। वे परमाणु/आयन जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं, अनुचुम्बकीय होते हैं जबकि समस्त युग्मित इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु/आयन प्रतिचुम्बकीय होते हैं।
उदाहरण- `Ni^(2+)= [Ar]3d^(8)`

`"अयुग्मित इलेक्ट्रॉन" implies "अनुचुम्बकीय आयन"`
`Zn^(2+)= [Ar]3d^(10)`
0 `"अयुग्मित इलेक्ट्रॉन" implies "प्रतिचुम्बकीय आयन"`
चुम्बकीय आघूर्ण की गणना-चुम्बकीय आघूर्ण को गणना अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n) ज्ञात होने पर निम्न सूत्र (जिसे केवल चक्रण सूत्र कहते है) के द्वारा की जा सकती है।
`mu_(p)= sqrt(n(n+2))`
`mu_(p)` का मान बोर मैग्नेटॉन, B.M. इकाई द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
(iv) आयनन ऊर्जा या विभव या एन्थैल्पी-किसी दी गई श्रेणी में संक्रमण तत्वों का आयनन विभव परमाणु क्रमांक के बढ़ने के साथ-साथ बढ़ता है, यद्यपि यह वृद्धि बहुत कम है। इसका कारण यह है कि जहाँ किसी श्रेणी में नाभिकीय आवेश बढ़ता है, वहाँ साथ-साथ d-उपकोश में आने वाले इलेक्ट्रॉन परिरक्षण प्रभाव उत्पन्न करते हैं जिससे धन आवेश के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश का प्रभाव कम हो जाता है। इन दोनों कारकों के कारण आयनन विभव का मान बहुत कम बढ़ता है।
क्रोमियम `(3d^(5)4s^(1))` तथा कॉपर `(3d^(10)4s^(1))` के द्वितीय आयनन विभव का मान अत्यधिक होता है। इसका कारण यह है कि स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
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