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CHEMISTRY
Mn^(3+) आयन की अपेक्षा Mn^(2+) आयन अधिक ...

`Mn^(3+)` आयन की अपेक्षा `Mn^(2+)` आयन अधिक स्थायी है, क्यों ?

लिखित उत्तर

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(i)d श्रेणी में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अधिक संख्या होती है जो आबन्ध निर्माण में भाग लेती है जिसका कारण कम प्रभावी नाभिकीय आवेश होता है, इसलिए ऑक्सीकरण अवस्थाओं की संख्या f-ब्लॉक से अधिक होती है। f-ब्लॉक में f-कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण नाभिकीय आवेश अधिक प्रभावी हो जाता है तथा आबन्ध निर्माण में कम इलेक्ट्रॉन भाग लेते हैं।
(ii) `Cu^(+)` आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं, इसलिए यह d-d संक्रमण नहीं दर्शा सकता है। इस कारण `Cu^(+)` लवण रंगहीन होते हैं, जबकि `Cu^(2+)` लवण एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन के कारण रंगीन होते हैं तथा ये d-d संक्रमण दर्शा सकते हैं। ये दृश्य क्षेत्र से प्रकाश अवशोषित करके नीला रंग विकिरित करते हैं अर्थात् ये रंगीन होते हैं।
(iii) `Mn^(3+)= 1s^(2),2s^(2)2p^(6),3s^(2)3p^(6)4d^(5)` (अर्द्धपूरित)
जबकि `Mn^(3+)` में तृतीय कोश की d-उपकोश अपूर्ण है
`Mn^(3+)= 1s^(2),2s^(2)2p^(6),3s^(2)3p^(6)4d^(4)` (अपूर्ण)
`3d^(5)` व `3d^(4)` में आधी भरी उपकोश, अपूर्ण उपकोश की अपेक्षा अधिक स्थायी होती है। इस कारण `Mn^(2+)` आयन `Mn^(3+)` आयन की अपेक्षा अधिक स्थायी है।
(iv) संक्रमण तत्व संकुल यौगिकों का अधिक निर्माण करते हैं। इसका मुख्य कारण निम्नलिखित है-
(a) छोटा आकार एवं उच्च आवेश घनत्व
(b) रिक्त उपकोशों को उपलब्धता
(c) विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
(v) `Zn^(2+) = 1s^(2),2s^(2)2p^(6),3s^(2)3p^(6)4d^(10)`
इस विन्यास में d-उपकोश अपूर्ण है जिसके कारण यह रंगहीन अर्थात् सफेद है, जबकि `Cu^(2+)= 1s^(2),2s^(2)2p^(6),3s^(2)3p^(6)4d^(9)`
इस विन्यास में d उपकोश अपूर्ण है जिसके कारण इनके लवण रंगीन अर्थात् नीले रंग के होते हैं।
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