एथिल ऐमीन बनाने की प्रयोगशाला विधि-प्रयोगशाला में प्रोपिओनेमाइड पर ब्रोमीन तथा कॉस्टिक पोटाश विलयन (आधिक्य में) की क्रिया कराने से एथिल ऐमीन बनती है। यह क्रिया हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया भी कहलाती है।
`underset("प्रोपिओनेमाइड")(C_(2)H_(5)CONH_(2))+underset("ब्रोमीन")(Br_(2))+4KOH to underset("एथिला ऐमीन")(C_(2)H_(5)NH_(2))+K_(2)CO_(3)+2KBr+2H_(2)O`
विधि-एक गोल पेदी वाले फ्लास्क में चित्रानुसार प्रोपिओनेमाइड और ब्रोमीन लेकर ठण्डा करते हैं, फिर इसमें 10% KOH का विलयन मिलाते हैं। मिश्रण को तब तक हिलाते रहते हैं जब तक कि ब्रोमोनोपिओनेमाइड के कारण पीले रंग का विलयन न बन जाए। अब इसमें 50% KOH का विलयन पृथक्कारी कीप से डालकर जल ऊष्मक पर `60-70^(@)C` पर गर्म करते है, जिससे विलयन रंगहीन हो जाए, तत्पश्चात् पलास्क के द्रव का आसवन करते हैं, जिससे एथिल ऐमीन गैस निकलती है जो ग्राही में रखे तनु HCI से क्रिया करके एथिल ऐमीन हाइड्रोक्लोराइड का विलयन देती है। इसे तनु KOH विलयन से क्रिया कराकर एथिल ऐमीन प्राप्त कर ली जाती है।
(i) जल में विलेयता-यह जल में विलेय होती है क्योंकि ये जल-अणुओं के साथ हाइड्रोजन बन्ध बना सकती है और इसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
जल के साथ एथिल अमोनियम हाइड्रॉक्साइड बनता है, जो क्षारक है तथा `NH_(4)OH` के समान क्रिया करता है।
`underset("एथिल ऐमिन")(C_(2)H_(5)NH_(2))+H_(2)O to underset("एथिल अमोनियम हाइड्रॉक्साइड")(C_(2)H_(5)NH_(3)OH)`
(ii) नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया-एथिल ऐल्कोहॉल और जल बनाता है।
`underset("एथिल ऐमीन")(C_(2)H_(5)NH_(2))+underset("नाइट्रस अम्ल")(HNO_(2)) to underset("एभिल ऐल्कोहॉल")(C_(2)H_(5)OH)_+H_(2)O+N_(2)uarr`
(iii)काबिलऐमीन अभिक्रिया-विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर संख्या 3 में देखिए।
(iv) श्मिट अभिक्रिया-यह अभिक्रिया जिसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल हाइड्राजोइक अल के साथ सान्द्र `H_(2)SO_(4)` की उपस्थिति में अभिक्रिया द्वारा ऐमीन बनाते हैं, श्मिट अभिक्रिया कहलाती है।
`RCHOOH+N_(3)H overset("सान्द्र"H_(2)SO_(4)//Delta)to underset("प्राथमिक ऐमीन")(RNH_(2)) + N_(2) uarr+CO_(2) uarr`
`C_(6)H_(5)COOH+N_(3)Hoverset("सान्द्र"H_(2)SO_(4)//Delta)to underset("ऐनिलीन")(C_(6)H_(5)NH_(2))+N_(2)uarr+CO_(2) uarr`