ग्लूकोस के निर्माण की विधियाँ -
(i) (1) गन्ने की शर्करा के जल-अपघटन द्वारा-गन्ने की शर्करा का तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (ऐल्कोहॉलिक विलयन), के साथ 323K पर जल-अपघटन करने पर ग्लूकोस बनता है।
`underset("गन्ने की शर्करा ")(C_(12)H_(22)O_(11))+ H_(2)O underset("जल -अपघटनHCl")overset("तनु "HCl) to underset("ग्लूकोस ")(C_(6)H_(12)O_(6)) + underset("फ्रक्टोस ")(C_(6)H_(12)O_(6))`
प्राप्त मिश्रण को ऐल्कोहॉल में विलेय किया जाता है। ग्लूकोस अविलेय होने के कारण पृथक् होकर क्रिस्टल के रूप में नीचे बैठ जाता है जिसे छानकर पृथक् कर लेते हैं और पुनः क्रिस्टलन के द्वारा शुद्ध ग्लूकोस प्राप्त कर लेते हैं।
(ii) स्टार्च के जल-अपघटन द्वारा-स्टार्च का जल-अपधटन सल्फ्यूरिक अम्ल के अत्यधिक तनु विलयन के साथ 393K ताप तथा निम्न दाब (2-3 वायुमण्डल) पर करने पर ग्लूकोस बनता है|
`underset("स्टार्च")((C_(6)H_(10)O_(5))_(n))+n_(2)O underset("जल- अपघटन ")overset("तुन " H_(2)SO_(4))to underset("ग्लूकोस ")(nC_(6)H_(12)O_(6))`
ग्लूकोस ग्लूकोस की संरचना-
ग्लूकोस एक ऐल्डोहेक्सोस है। इसे ड्रेक्सट्रोज भी कहा जाता है। यह . काबोहाइड्रेटों जैसे स्टार्च, सेलुलोस आदि का एकलक है। इसकी संरचना को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है-
`underset(CH_(2)OH)underset(|)underset((CHOH)_(4))underset(|)underset(CHO)`
ग्लूकोस की उपर्युक्त संरचना को निम्नलिखित प्रमाणों के आधार पर प्रस्तावित किया गया है
1. आण्विक सूत्र-ग्लूकोस का आण्विक सूत्र `C_(6)H_(12)O_(6)` होता है।
2. HI से अभिक्रिया-HI के साथ लम्बे समय तक गर्म करने पर यह n-हेक्सेन बनाता है जो दर्शाता है कि इसमें 6 कार्बन परमाणु सीधी शृंखला में व्यवस्थित हैं।
`OHC - (CHOH)_(4) - CH_(2)OH overset(HI,Delta)to CH_(3)CH_(2)underset("2-हेक्सेन")(CH_(2)CH_(2)CH_(2)CH_(3))`
3. हाइड्रॉक्सिल ऐमीन तथा हाइड्रोजन सायनाइड से अभिक्रियाग्लूकोस हाइड्रॉक्सिल ऐमीन से क्रिया करके ऑक्सिम बनाता है तथा एक मोल हाइड्रोजन सायनाइड से क्रिया करके सायनोहाइड्रिन बनाता है। ये अभिक्रियाएँ ग्लूकोस में काबोंनिल समूह (c=0) की उपस्थिति को दर्शाती हैं।
4. ब्रोमीन जल से अभिक्रिया-ग्लूकोस ब्रोमीन जल जैसे दुर्वरऑक्सीकारक के द्वारा ऑक्सीकृत होकर छ: कार्बन परमाणुओं वार कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है जिससे यह स्पष्ट होता है कि ग्लूकोस में य कार्बोक्सिलिक समूह ऐल्डिहाइड समूह के रूप में उपस्थित है।
5. ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड या ऐसीटिल क्लोराइड से अभिक्रियाग्लूकोस ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड या ऐसीटिल क्लोराइड से क्रिया करके ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट बनाता है जो इसकी संरचना में पाँच –OH समूहों की उपस्थिति को दर्शाता है। चूंकि ग्लूकोस एक स्थायी यौगिक है अतः पाँचों –OH समूह भिन्न-भिन्न कार्बन परमाणुओं से जुड़े होने चाहिए।
6. नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया-ग्लूकोस तथा ग्लूकोनिक अम्ल दोनों ही नाइट्रिक अम्ल के द्वारा ऑक्सीकृत होकर समान द्वि-काबोक्सिलिक अम्ल बनाते हैं जिससे स्पष्ट होता है कि ग्लूकोस की संरचना में एक प्राथमिक ऐल्कोहॉल समूह उपस्थित होता है।
फिशर ने ग्लूकोस के कई अन्य गुणों का अध्ययन करके इसके विभिन्न -OH समूहों की वास्तविक दिक् स्थान व्यवस्था को दर्शाया। इसके सही अभिविन्यास को [ में दर्शाया गया है। अत: ग्लूकोनिक अम्ल की संरचना को II के द्वारा तथा सैकेरिक अम्ल की संरचना को III के द्वारा दर्शाया जाता है।
ग्लूकोस को सही रूप में D (1) ग्लूकोस नाम देते हैं। ग्लूकोस के नाम से पहले लिखा D इसमें विन्यास नियमित करता है, जबकि (+) अणु की दक्षिण पूर्णकता को निरूपित करता है। यहाँ D का यौगिक की प्रकाशिक सक्रियता से कोई सम्बन्ध नहीं है।
ग्लूकोस की चक्रीय संरचना
उपरोक्त संरचना (1) अर्थात् ग्लूकोस की विकृत श्रृंखला संरचना के आधार पर इसके अधिकांश गुणों की व्याख्या की जा सकती है परन्तु यह इसकी निम्नलिखित अभिक्रियाओं/तथ्यों की व्याख्या नहीं करता है-
1. ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होने पर भी यह 2, 4-DNP परीक्षण तथा |शिफ परीक्षण नहीं देता है। यह `NaHSO_(3)` के साथ हाइड्रोजन सल्फाइड | योगोत्पाद भी नहीं बनाता है।
2. यह पेन्टाऐसीटेट हाइड्रॉक्सिल ऐमीन से क्रिया नहीं करता जो इसमें मुक्त ऐल्डिहाइड (-CHO) समूह की अनुपस्थिति को दर्शाता है।
3. `CH_(3)` OH/ HCI से क्रिया करके यह दो ऐनोमेरिक मेथिल |ग्लाइकोसाइड इकाई बनाता है जो इसकी चक्रीय संरचना को इंगित करती हैं।
ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट भी दो ऐनोमेरिक रूपों में पाया जाता है अतः इसमें `C_(1)` कार्बन पर मुक्त -OH समूह उपस्थित नहीं होता है जिस कारण यह `NH_(2)` OH के साथ अभिक्रिया नहीं दर्शाता है।
उपर्युक्त अभिक्रियाएँ दर्शाती हैं कि ग्लूकोस दो ऐनोमेरिक रूपों में पाया जाता है जिन्हें `alpha` तथा `beta`-रूप कहते हैं तथा इसकी संरचना चक्रीय होती है। इसकी चक्रीय हेमीऐसीटल संरचना को एक-OH समूह के -CHO समूह के साथ जुड़ने का परिणाम माना जा सकता है। ऐसा पाया गया है कि ग्लूकोस एक छ: सदस्यों वाली वलय संरचना बनाता है जिसमें C स्थिति पर उपस्थित -OH समूह वलय निर्माण में भाग लेता है। अत: यह ग्लूकोस में -CHO समूह की अनुपस्थिति की व्याख्या करता है। ग्लूकोस के दो चक्रीय रूप (ऐनोमर), इसकी विकृत श्रृंखला संरचना के साथ साम्य की स्थिति में रहते हैं।
8-D-(4) ग्लूकोस पाइरैन से समानता के आधार पर ग्लूकोस की छः सदस्यों वाली वलय संरचना की पाइरैनोस संरचना (`alpha`-या `beta` ) कहा जाता है।
ग्लूकोस की चक्रीय संरचना को अधिक सही रूप में नीचे दी गई हावर्थ संरचना द्वारा निरूपित किया जा सकता है।
