Home
Class 12
CHEMISTRY
प्रोत ऐन क्या है? इनके कैसे वर्गीकृत करत...

प्रोत ऐन क्या है? इनके कैसे वर्गीकृत करते है? प्राथमिक, द्रतियक एव द्तीयक एव तृतीयक प्रोटीनों की संरचनाए लिखिए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

प्रोटीन नाइट्रोजन युक्त संकीर्ण कार्बनिक यौगिक है जो वनस्पति तथा जीव-जन्तुओं में प्रचुरता में पाए जाते हैं और जल-अपघटन पर -ऐमीनो अम्ल देते हैं।
प्रोटीन का मूल स्रोत पेड़-पौधे हैं। ये `CO_(2)` (वायु से), नाइट्रेट (पृथ्वी से) और जल के द्वारा संश्लेषित होते हैं। जब पेड़-पौधों को जानवर खाते हैं, तब प्रोटीन उनके शरीर में पहुंचकर एन्जाइम द्वारा ऐमीनो अम्लों में जल-अपघटित हो जाती है। वे ऐमीनो अम्ल रक्त द्वारा अवशोषित होकर ऊतकों में पहुंचते हैं और प्रोटीन का निर्माण करते हैं। जैसे कैसीन और लैक्टऐल्बुमिन (दूध से), मायोसीन (मांसपेशी से), इन्सुलिन (आन्याशय से) आदि।
प्रोटीनों का शरीर में मुख्य कार्य
प्रोटीनों के शरीर में कुछ प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं
1. संरचनात्मक प्रोटीन के रूप में (In the form of structural proteins)-कई प्रोटीन कोशिका झिल्ली का एक बड़ा भाग बनाती हैं। रेशेदार जैसे कोलैजन, इलास्टिन और किरैटिन आदि सजीव वस्तुओं में उपस्थित रहती हैं। किरैटिन त्वचा, नखूनों, सींग, खुर, पंख आदि में पाया जाता है।
2. एन्जाइमों के रूप में (In the form of enzymes)-सभी एन्जाइम प्रोटीनों के बने होते हैं, जो सजीवों के शरीर में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं।
3. हॉर्मोन के रूप में (In the form of hormones)-कई प्रकार के हॉमोन प्रोटीन हैं। हॉर्मोन उपापचय बहुत-सी अभिक्रिया को नियन्त्रित करते हैं। इनके सामान्य उदाहरण इन्सुलिन, ग्लूटेथायोन और वृद्धि हॉर्मोन हैं।
4. एण्टीबॉडीज के रूप में (In the form of antibodies)-जब कोई बाा कण (एण्टीजन) शरीर में प्रवेश कर रोग फैलाता है, तो शरीर स्वयं ही इन एण्टीजन को नष्ट करने हेतु कुछ पदार्थ, बनाता है जिसे एण्टीबॉडी कहते हैं। ये एण्टीबॉडी प्रोटीन से बने होते हैं। गामा ग्लोबुलिन एण्टीबॉडीज के उदाहरण हैं।
5 वाहक के रूप में (In the form of carrier)-रक्त में कई प्रकार की प्रोटीन पायी जाती हैं, जिन्हें रक्त प्रोटीन कहते हैं। ये कई प्रकार के कार्य करती हैं। इन्हीं में प्लाज्मा प्रोटीन व हीमोग्लोबिन भी आते हैं। रक्त में पाए जाने वाली अन्य प्रोटीन ऐल्बुमिन, फाइब्रिनोजन, गामा ग्लोबुलिन, हीमोग्लोबिन आदि है।
प्रोटीनों का वर्गीकरण
रासायनिक संघटन के आधार पर-जल-अपघटन द्वारा प्रोटीनों को तीन वर्गों में वगीकृत किया गया है
(i) साधारण प्रोटीन-ये प्रोटीन जो जल-अपघटन पर केवल `alpha`-ऐमीनो अम्ल देती हैं, जैसे-ऐल्बुमिन, ग्लोबुलिन, ग्लूटेलिन आदि।
(ii) संयुक्त प्रोटीन-ये प्रोटीन जल-अपघटन पर ऐमीनो अम्लों के अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट, न्यूक्लिक अम्ल या फॉस्फोरिक अम्ल आदि में से कोई एक पदार्थ भी देती हैंजैसे-न्यूक्लियोप्रोटीन, ग्लाइकोप्रोटीन, फॉस्फोप्रोटीन, क्रोमोप्रोटीन, लिपोप्रोटीन।
व्युत्पन्न प्रोटीन-जब साधारण और संयुग्मित प्रोटीन का जल-अपघटन किया जाता है. तब विभिन्न पदों में बनने वाले पदार्थ प्रोटीन कहलाते हैं और ऐसी प्रोटीन को व्युत्पन्न प्रोटीन. कहते हैं, जैसे-प्रोटियोस, पेप्टोन, पॉलिपेप्टाइड आदि।
प्रोटीन `to ` प्रोटियोस ,`to ` पेप्टोन `to ` पॉलिपेप्टाइड
प्रोटीन की संरचना
1. प्राथमिक संरचना-प्रोटीन की संरचना ज्ञात करने हेतु प्रोटीन (या पॉलिपेप्टाइड) के अवयवी ऐमीनो अम्ल उनके अणुओं की संख्या एवं परस्पर जुड़ने के क्रम सहित ज्ञात किए जाते हैं। इनके लिए प्रोटीन का 6N-HCI के साथ जल-अपघटन करते हैं और प्राप्त होने वाले ऐमीनो अम्ल के मिश्रण में से विभिन्न ऐमीनो अम्लों का पृथक्करण प्रायः क्रोमैटोग्राफी या विद्युत कण संचरण द्वारा करते हैं। प्रोटीन के ज्ञात भार से जो विभिन्न ऐमीनो अम्ल प्राप्त होते हैं उनकी संख्या भी ज्ञात कर लेते हैं। इस प्रकार विभिन्न ऐमीनो अम्लों का आपेक्षिक अनुपात पता चल जाता है। अवयवी ऐमीनो अम्लों की संख्या व अनुपात ज्ञात करने के बाद यह ज्ञात करते हैं कि ये ऐमीनो अम्ल किस क्रम में जुड़े रहते हैं। अत: अणु में उपस्थित विभिन्न प्रकार के ऐमीनो अम्ल अणुओं की संख्या तथा `alpha`-ऐमीनो अम्लों का वह अनुक्रम जिसमें प्रोटीन अणु उपस्थित होते हैं, प्रोटीन की प्राथमिक संरचना कहलाती है।
प्रोटीन की प्राथमिक संरचना प्रोटीन की प्रथमिक संरचना सहसंयोजी है। इनमें प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड के डाइसल्फाइड सेतु भी सहसंयोजी होते हैं।
II. द्वितीयक संरचना-प्रोटीनों की लम्बी लचीली शृंखलाएँ मुड़कर हाइड्रोजन आबन्ध द्वारा अपेक्षाकृत दृढ़ रचना का निर्माण करती हैं जिसे प्रोटीन, की द्वितीयक संरचना कहते हैं। प्रोटीन की द्वितीयक संरचना प्राय: R-समूह के आकार पर निर्भर करती है। यदि R-समूह का आकार बड़ा होता है तो प्रोटीन की `alpha` -हेलिक्स संरचना प्राप्त होती है जबकि R-समूह का आकर अपेक्षाकृत छोटा होने पर प्रोटीन की `beta` -चपटी चादर संरचना प्राप्त होती है। प्रोटीन की द्वितीयक संरचनाएँ निम्न दो प्रकार की होती हैं
(i) `alpha` संरचना-इस संरचना का निर्माण मुख्यत: `>C=0 `और चौथी ऐमीनो अम्ल इकाई के -NH समूहों के बीच हाइड्रोजन आबन्ध स्थापित होने से होता है, जिसके कारण पेप्टाइड शृंखलाएँ कुण्डिलित होकर एक सर्पिल संरचना का निर्माण करती हैं जिसे `alpha` -कुण्डलिनी या दाएँ हाथ की a-हेलिक्स संरचना कहते हैं। पेप्टाइड श्रृंखला के विभिन्न यूनिटों (ऐमीनो अम्ल अवशेषों) में परस्पर हाइड्रोजन आबन्ध स्थापित हो जाने से हेलिक्स अपनी स्थिति पर बने रहते हैं। व-हेलिक्स संरचना को 3-618 हेलिक्स भी कहते हैं क्योकि हेलिक्स के प्रत्येक घुमाव में 3-6 ऐमीनो अम्ल अवशेष रहते हैं और हेलिक्स के विभिन्न भागों में `>C=0` तथा -NH समूहों के मध्य H-आबन्ध द्वारा 13 सदस्य वलय बनती है तथा प्रत्येक घुमाव की दूरी `0.54Å` होती है। चूंकि सभी प्राकृतिक ऐमीनो अम्लों का L-विन्यास होता है। इसलिए सभी प्रोटीम के हेलिक्स दक्षिण-पक्षी (right-handed) होते हैं।
रेशेदार संरचनात्मक प्रोटीन्स इस प्रकार की संरचना ग्रहण करते हैं जैसे बालों में पायी जाने वाली प्रोटीन।

(ii) `beta` -चपटी चादर संरचना-जब R-समूह का आकार छोटा होता है तो इस प्रकार की संरचना स्थापित होने की सम्भावना रहती है। इसमें हाइड्रोजन आबन्ध दो भिन्न पेप्टाइड श्रृंखलाओं के बीच भी स्थापित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्रोटीन्स दूसरी प्रकार की द्वितीयक संरचना का निर्माण करती हैं। यदि पेप्टाइड शृंखलाएँ एक-दूसरे के समान्तर स्थित हों तो श्रृंखलाओं में परस्पर हाइड्रोजन आबन्ध स्थापित हो जाते हैं। इस प्रकार अनेक पेप्टाइड शृंखलाएँ अन्त:बन्धित होकर `beta`-चपटी चादर का निर्माण करती हैं। यदि पेप्टाइड श्रृंखला (R) का आकार बड़ा है तब ऐल्किल समूह एक-दूसरे के निकट आ जाते हैं और एक-दूसरे को उनके मूल स्थान से दूर धकेलते हैं जिसके कारण पेप्टाइड शृंखला थोड़ी सिकुड़ जाती है और चादर चपटी न रहकर लहरियादार हो जाती है।

ऐसी चादरें एक-दूसरे पर एकत्रित होकर एक त्रिविमी संरचना का निर्माण करती हैं जिसे बीटा लहरियादार चादर कहते हैं। इसको 8-संरूपण भी कहते हैं। रेशम में इसी प्रकार की संरचना होती है जिसके कारण इसे विशिष्ट यान्त्रिक गुण प्राप्त होता है। रेशम को खींचा या ताना नहीं जा सकता है क्योंकि इस प्रक्रिया में पेप्टाइड सहसंयोजक आबन्धों को खींचना पड़ेगा। इसके विपरीत, रेशम को सरलता से मोड़ा (fold) जा सकता है क्योंकि इस प्रक्रिया में प्रोटीन की चपटी चादरें एक-दूसरे पर फिसलती है।
III. तृतीयक संरचना-इस संरचना से ज्ञात होता है कि किस प्रकार पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला का फोल्डिंग तथा बोन्डिग होता है अर्थात् पॉलिपेप्टाइड की त्रिविम (three dimensional) विस्तृत संरचना किस प्रकार होती है। तृतीयक संरचना को स्थायी रखने में चार प्रकार के आबन्धों का योगदान होता है-
(i) हाइड्रोजन आबन्ध (Hydrogen bond) हाइड्रोजन आबन्ध विभिन्न अवशेषों के मध्य बनता है जैसे ऐमीनो अम्ल, सेरीन, थ्रियोनीन तथा टायरोसीन के स्वतन्त्र –OH, लाइसीन, हिस्टीडीन तथा ट्रिप्टोफेन आदि के स्वतन्त्र -NHS, ऐस्पार्टिक तथा ग्लूटैमिक अम्लों के स्वतन्त्र —COOH तथा बैक बोन के -NH- समूह हाइड्रोजन आबन्ध बनाते हैं।
(ii) आयनिक आबन्ध या लवण बन्धन (Ionic bonds or salt linkages)-इस प्रकार के आबन्ध धनात्मक व ऋणात्मक समूहों के मध्य बनते हैं, अर्थात् `-COO^(-)`तथा `-overset(+)(N)H_(3)` के मध्य, ऐसे आबन्ध पेप्टाइड श्रृंखला की सतह पर बनते हैं।

(iii) हाइड्रोफोबिक आबन्ध [जलविरोधी बन्ध Hydrophobic bond] -ये आबन्ध ऐल्किल समूहों के मध्य में बनते हैं जैसे दो - CH3 के मध्य या दो फेनिल समूहों के मध्य, ये आबन्ध प्रोटीन अणु के अन्दरूनी भाग में बनते हैं जहाँ पर जल की कम मात्रा होती है। ये आबन्ध वान्डरवाल्स आकर्षण बल द्वारा बनते हैं।
(iv) डाइसल्फाइड आबन्ध (Disulphide bond)-दो पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में ऑक्सीकृत संयुग्मन से S-S आबन्ध बनकर ये परस्पर जुड़ सकते हैं जैसे कि सिस्टीन अवशेषों के मध्य डाइसल्फाइड आबन्धन स्थापित है।
अतः तृतीयक संरचना द्वारा प्रोटीन अणु का सम्पूर्ण आकार निर्धारित किया जाता है। प्रोटीन की दो प्रमुख तृतीयक संरचनाएँ रेशेदार एवं कणिकामय हैं। जल में विलेय प्रोटीनों की कणिकामय संरचना होती है।
4. चतुष्क संरचना (Quarternary structure)-अधिकतर प्रोटीन कई उपइकाइयों (subunits) या प्रोटोमर की समुच्च (aggregation) होती हैं, जो समान या भिन्न हो सकते हैं, जो परस्पर H-आबन्ध, वैद्युत स्थैतिक तथा वान्डरवाल्स अन्योन्य क्रियाओं से जुड़े रहते हैं। प्रत्येक उपइकाई (subunit) की अपनी प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक संरचना होती है। हीमोग्लोबिन अणु में चार उपइकाइयाँ होती हैं। दो समान ` beta-` शृंखलाएँ (प्रत्येक में 141 ऐमीनो अम्ल अवशेष) तथा दो समान :-शृंखलाएँ (प्रत्येक में 146 ऐमीनो अम्ल अवशेष)। प्रत्येक शृंखला एक हीम (haem) समूह से जुड़ी होती है,` alpha ` -. तथा ` beta- `शृंखलाओं के फोल्डिंग में बहुत थोड़ा अन्तर होता है। चारों उपइकाई चतुष्फलक व्यवस्था में जुड़कर इसकी चतुष्क संरचना बनाती हैं।
प्रोटीनों का विकृतीकरण-प्रोटीनों को गर्म करने पर या इनमें अम्ल या क्षार मिलाने पर ये नष्ट या विकृत हो जाती हैं इसे विकृतीकरण कहते हैं। इस प्रक्रिया में प्रोटीन की द्वितीयक और तृतीयक संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं जिससे इनका स्कन्दन हो जाता है। विकृतीकरण में प्रोटीन की प्राथमिक है संरचनाओं में कोई परिवर्तन नहीं होता है जबकि द्वितीयक व तृतीयक संरचनाओं का पुनर्विन्यास हो जाता है जिससे प्रोटीन की जैविक प्रक्रिया नष्ट हो जाती है। विकृतीकरण निम्न दो प्रकार से होता है--
(1) उत्क्रमणीय विकृतीकरण-यह विकृतीकरण लवणों की उपस्थिति र में होता है। इसमें प्रोटीन के दुर्बल H-आबन्ध टूट जाते हैं और पॉलिपेप्टाइड शृंखलाएँ खुल जाती है परन्तु विकृतीकारक अभिकर्मक को हटाने पर पुनः । H-आबन्ध स्थापित हो जाने से प्रोटीन पुन: अपनी पूर्व स्थिति प्राप्त कर लेती है। इस विकृतीकरण को उत्क्रमणीय विकृतीकरण कहते हैं।
(2) अनुत्क्रमणीय विकृतीकरण-यह विकृतीकरण, प्रबल विकृतीकारक अभिकर्मकों जैसे प्रबल अम्ल या क्षार अथवा उच्च ताप पर होता है। इस प्रक्रिया में विकृत प्रोटीन अपनी पूर्व स्थिति में नहीं आ सकती है अतः इस विकृतीकरण को अनुत्क्रमणीय विकृतीकरण कहते हैं।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • जैव - अणु

    UP BOARD PREVIOUS YEAR|Exercise लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर-II|15 Videos
  • क्या होता है जब

    UP BOARD PREVIOUS YEAR|Exercise प्रश्न|97 Videos
  • जैव-अणु

    UP BOARD PREVIOUS YEAR|Exercise बहुविकल्पीय प्रश्न|24 Videos
UP BOARD PREVIOUS YEAR-जैव - अणु -विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर ?
  1. रासायनिक समीकरण देते हुए सिद्ध कीजिए कि ग्लूकोस में पाँच-OH समूह हैं।

    Text Solution

    |

  2. ग्लूकोस के फिशर संरचना सूत्र के पक्ष में रासायनिक समीकरण लिखिए।

    Text Solution

    |

  3. ग्लूकोस में >C=O,-CHO तथा पाँच -OH समूह की उपस्थिति की पुष्टि अभिक्रि...

    Text Solution

    |

  4. कैसे सिद्ध कीजिएगा की ग्लूकोज में एक (-CHO) समूह और पाँच (-OH) समूह उप...

    Text Solution

    |

  5. मोनोसैकेराइड क्या है? एक डाइसैकेराइड का नाम तथा सूत्र लिखिए। कैसे सिद्...

    Text Solution

    |

  6. ग्लूकोज बनाने की दो विधियों का रासायनिक समीकरण देते हुए लिखिए। इसकी हा...

    Text Solution

    |

  7. D ग्लूकोस का निम्नलिखित यौगिकों के साथ अभिक्रिया से बने उत्पादों की सं...

    Text Solution

    |

  8. L ग्लूकोस की संरचना क्या है?

    Text Solution

    |

  9. ग्लूकोस के फिशर संरचना सूत्र के पक्ष में रासायनिक समीकरण लिखिए।

    Text Solution

    |

  10. प्रोटीन की प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक तथा चतुष्क संरचनाएँ और प्रोटीन क...

    Text Solution

    |

  11. प्रोत ऐन क्या है? इनके कैसे वर्गीकृत करते है? प्राथमिक, द्रतियक एव द्त...

    Text Solution

    |

  12. प्रोटीन क्या होते हैं? इनके प्रमुख स्रोत लिखिए। प्रोटीन की । प्राथमिक ...

    Text Solution

    |

  13. प्रोटीन क्या है? इसके मुख्य स्रोत एवं मानव शरीर के लिए इसकी उपयोगिता ल...

    Text Solution

    |

  14. ऐमीनो अम्ल तथा प्रोटीन की परिभाषाएँ लिखिए। प्रोटीन के प्रमुख स्रोत एवं...

    Text Solution

    |

  15. हमारे भोजन में प्रोटीन का क्या महत्व है? प्रोटीन के मुख्य स्रोत क्या ह...

    Text Solution

    |