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निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए- ...

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-
(a) डी०एन०ए० का अर्द्धसंरक्षी प्रतिकृतियन
(b) स्थानान्तरण।

लिखित उत्तर

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डी०एन०ए० का अर्द्धसंरक्षी प्रतिक्रतियन
कोशिका एवं जीव शरीर में उपस्थित सभी जैविक अणुओं में से केवल D.N.A. ही स्वहिगुणन की क्षमता रखता है अर्थात् यह अपने ही समान D.N.A.
अणु का संश्लेषण करने में सक्षम होता है। D.N.A. की यह क्षमता D.N.A. द्विगुणन अथवा D.N.A. प्रतिकृतियन (D.N.A, replication) कहलाती है। D.N.A. प्रतिकृतियन अद्धसंरक्षी (semi-conservative) विधि के द्वारा होता व है। इस विधि में D.N.A. के दोनों रज्जुक एक-दूसरे से पृथक् होकर अपना-अपना अस्तित्व बनाए रखते हैं तथा प्रत्येक रज्जुक कोशिका में उपस्थित न न्यूक्लियोटाइड्स की सहायता से अपने सम्पूरक रज्जुक का निर्माण कर लेता है। इस प्रकार प्राप्त D.N.A. में पाए जाने वाले दोनों रज्जुकों में से एक रज्जुक जनक D.N.A. का जबकि दूसरा रज्जुक संश्लेषित रज्जुक होता है। निम्न प्रयोगों से यह सिद्ध होता है कि डी०एन०ए० प्रतिकृतियन एक अर्द्ध-संरक्षी विधि के द्वारा होता है।
अर्धसंरक्षी प्रतिकृतिकरण का प्रायोगिक प्रमाण
एम० मेसेल्सन (M. Meselson) तथा एफ० डब्ल्यू० स्टाल (F.W. Stahi, 1958) ने अपने प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि D.N.A. प्रतिकृतियन अर्द्धसंरक्षी प्रकृति का होता है। इन्होंने अपने प्रयोग में इस्केरिकिया कोलाई (Escherichia coli) जीवाणु का उपयोग किया। इन्होंने इस जीवाणु की लगभग 14 पीढ़ियों को ऐसे माध्यम में संवर्धित किया जिसमें रेडियोऐक्टिव नाइट्रोजन `(N^(15) ""^(15) NH_(4) Cl` के रूप में उपस्थित था। इस कारण रेडियोऐक्टिव नाइट्रोजन इस्केरिकिया कोलाई में उपस्थित D.N.A. के दोनों रज्जुकों में प्रविष्ट हो गया, तत्पश्चात् मेसेल्सन तथा स्टाल ने इन कोशिकाओं को ऐसे माध्यम में संवर्धित किया जिसमें साधारण नाइट्रोजन (`N^(14)`) उपस्थित थी। D.N.A. को अलग-अलग समय बाद पृथक् किया गया प्रथम पीढ़ी की प्रतिकृति के पश्चात् D.N.A. को पृथक् करके इसका घनत्व देखने पर ज्ञात हुआ कि इसका घनत्य रेडियोऐक्टिव नाइट्रोजनयुक्त माध्यम में संवर्धित कोशिकाओं के D.N.A. तथा सामान्य नाइट्रोजनयुक्त D.N.A. के घनत्वों के मध्य का था। घनत्वों में यह अन्तर इसलिए सम्भव हुआ क्योंकि 20 मिनट बाद प्रथम पीड़ी में निर्मित D.N.A. में एक रज्जुक रेडियोऐक्टिव नाइट्रोजनयुक्त था, जबकि उसके सम्पूरक रज्जुक में साधारण नाइट्रोजन उपस्थित थी। 40 मिनट बाद पृथक्कित D.N.A. में आधा D.N.A. संकर (`""^(15) N - ""^(14) N`) तथा आधा हल्का (`""^(14) N - ""^(14) N`) प्रकार का था। इस प्रयोग से यह सिद्ध होता है कि D.N.A. प्रतिकृतियन अर्द्धसंरक्षी प्रकृति का होता है
D.N.A. प्रतिकृतियन की विधि (Process of D.N.A. Repliention)D.N.A. प्रतिकृतिवन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें अनेकों एन्जाइम तथा प्रोटीन भाग लेते हैं। इस प्रक्रिया का अध्ययन निम्न चरणों के अन्तर्गत किया जा सकता है -
(i) D.N.A. प्रतिकृति का समारम्भन (Initiation of D.N.A. Replication)-आयजीवी कोशिकाओं (prokaryotic cells) में D.N.A. प्रतिकृतियन सदैव एक निश्चित स्थान पर जबकि सुकेन्द्रकीय कोशिकाओं में अनेक स्थानों पर एक साथ प्रारम्भ होती है। ये स्थान प्रतिकृति आरम्भक (replication origin) अथवा समारम्भन बिन्दु (initiation point) कहलाते हैं। जीवाणु आदि में यह प्रक्रिया एक बहुएन्जाइम सम्मिन (multienxymecomplex) प्रतिकृति उपकरण (replication apparatus) अथवा रेफ्लिसोम (replisome) की सहायता से होती है।
(ii) D.N.A. कुण्डलिनी का विकुण्डलन (Unwinding of D.N.A. Helix)-केन्द्रक में उपस्थित D.N.A. अतिसंघनित अवस्था में होता है। अत: प्रतिकृतियन से पहले इस द्विकुण्डलित एवं अतिसंघनित अणु का विकुण्डलन आवश्यक है। यह विकुण्डलन हेलिकेज एन्जाइम (helicase enzyme) की सहायता से होता है। D.N.A. की दोनों शृंखलाओं (strands) के पृथक् होने से एक .Y. आकार की रचना बन जाती है, इसे प्रतिकृति दुशाख (replication fork) कहते हैं। हेलिक्स बाइडिंग प्रोटीन तथा टोपोआइसोमरेज topoisomerase enzyme/D.N.A. रन्जुकों को स्थिर कर, उसे काटकर इस प्रक्रिया में सहायता करता है।
(iii) प्रारम्भक रज्जुक का निर्माण (Formation of Primer Strand)प्रतिकृति दुशाख (replication fork) में उपस्थित प्रत्येक रज्जुक (strand) एक टेम्पलेट रज्जुक (template strand) की भाँति कार्य करने लगता है
तथा 5-3 दिशा की ओर एक छोटी R.N.A. श्रृंखला का निर्माण करता है। यह श्रृंखला प्रारम्भक रज्जुक (primer strand) कहलाती है।
(iv) नए रज्जुक का दीर्धीकरण (Blongation of New Strand)प्रारम्भक रज्जुक बनने के पश्चात् D.N.A. पॉलिमरेज III नामक एन्जाइम कोशिका के अन्दर उपस्थित डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड्स (deoxyribonucleotides) को श्रृंखला में जोड़कर श्रृंखला का दीर्धीकरण प्रारम्भ कर देता है, परन्तु यह एन्जाइम केवल `5 to 3` दिशा में ही श्रृंखला का संश्लेषण करने में सक्षम होता है जिस कारण D.N.A. के `3. to 5.` रज्जुक पर नई श्रृंखला का निर्माण 1-3. में सामान्य रूप से सतत श्रृंखला के रूप में होता है। यह श्रृंखला अग्रग श्रृंखला (leading strand) कहलाती है, परन्तु D.N.A. 25-3.रज्जुक पर प्रारम्भक रज्जुक का सिरा प्रतिकृति दुशाख की ओर होता है जिस कारण प्रारम्भक रज्जुक D.N.A. के `5 to 3` रज्जुक पर श्रृंखला का निर्माण छोटे-छोटे खण्डों के रूप में करता है। ये खण्ड ओकाजाकी खण्ड (Okazaki fragments) कहलाते हैं। प्रत्येक खण्ड के लिए एक अलग प्रारम्भक रज्जुक तथा D.N.A. पॉलिमरेज III एन्जाइम उपस्थित होता है। D.N.A. लाइगेज एन्जाइम (D.N.A. ligase enzyme) इन छोटे खण्डों को आपस में जोड़कर D.N.A. रज्जुक को पूर्ण कर देता है। यही कारण है कि यह श्रृंखला पश्चगामी श्रृंखला (lagging strand) कहलाती है। D.N.A. के संश्लेषण के पश्चात् प्रारम्भक रज्जुक एन्जाइम के द्वारा पृथक् कर दिए जाते हैं।
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