बायोगैस संयन्त्र (Biogas plant)-इसमें एक टैंक (10-15 फीट गहरा) होता है जिसमें अपशिष्ट एवं गोबर की कर्दम (slurry) भरी जाती है। कर्दम के ऊपर एक सचल ढक्कन रखा जाता है, सूक्ष्मजीवी सक्रियता के कारणं टैंक में गैस बनती है जिससे ढक्कन ऊपर को उठता है। बायोगैस संयन्त्र में एक निकास द्वार होता है जो एक पाइप से जुड़ा होता है। इसी पाइप की सहायता से घर में बायोगैस की आपूर्ति की जाती है। उपयोग की गई कर्दम दूसरे निकास द्वार से बाहर निकाल दी जाती है। इसका प्रयोग जैव उर्वरक के रूप में किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर बड़ी मात्रा में उपलब्ध हो जाता है।
उत्पन्न बायोगैस का प्रयोग खाना पकाने में तथा प्रकाश के लिए किया जाता है। भारतवर्ष में बायोगैस उत्पादन प्रौद्योगिकी का विकास मुख्यत: भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान तथा खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग के प्रयासों से हुआ है। इस संयन्त्र में मेथेनोजन जीवाणु (Methanogens) होते हैं। ये अनॉक्सी जीवाणु सेलुलोसयुक्त पदार्थों पर अवायवीय परिस्थितियों में विकसित होते हैं और उपापचय के फलस्वरूप `CO_2, H_2` तथा `CH_4` (मेथेन) गैस उत्पन्न होती हैं। इन गैसों के मिश्रण को बायोगैस या गोबर गैस भी कहते हैं। बायोगैस में प्रमुखत: मेथेन गैस होती है।