डी.एन.ए. पुनर्योगज तकनीक क्या है? इस तकनीक के चरण लिखिए। (कोई चार चरण)।
लिखित उत्तर
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एक जीव के में `D.N.A` बाहा `D.N.A` को जोड़ना `D.N.A` पुनर्सयोजन (recombination) कहलाता है। इस तकनीक को `D.N.A` इंजीनियरिंग या आनुवंशिक इंजीनियरिंग कहते है। डी०एन०ए० पुनर्सयोजन तकनीक `D.N.A` पुनर्सयोजन द्वारा समान्यत: उच्च जंतु या पोधो के `D.N.A` के इच्छित भागो की अनेक प्रतिकृतियाँ (copies) तैयार की जाती है। अतः इस प्रक्रिया को जीन क्लोनिंग (gene cloning) भी कहा जाता है। जीवाणुओं में तेजी से विखण्डन द्वारा विभाजन होता है। अतः जीवाणुओं में इच्छित `D.N.A` का परवेस करा कर उनकी अनेक प्रतिकृतियाँ प्राप्त कर ली जाती है। `D.N.A` पुनर्सयोजन निम्नलिखित चरणों में किया जाता है- (1) डी०एन०ए० खण्ड तैयार करना- `D.N.A` के जिस विशिष्ट खण्ड या भाग की प्रतिकृतियाँ प्राप्त करनी होती है उस खण्ड को रेस्ट्रिक्शन एण्डोंन्युक्लिएज एन्जाइम्स का प्रयोग करके पृथक कर लेते। (2) डी० एन० ए० खण्ड को क्लोनिंग वाहक या वेक्टर से जोड़ना - जीवाणुभोजी या प्लाज्मिड स्वतंत्र रूप से विभाजन करते है। प्लाज्मिड में कुछ रेस्ट्रिक्शन स्थल (restriction sites) होते है। इन स्थलों पर प्लाज्मिड को काट कर इच्छित `D.N.A` खण्ड को एंजाइम डी०एन०ए० लाइगेज (D.N.A ligase) की सहायता से जोड़ देती है। (3) पुनर्सयोजित वेक्टर को पोशद कोशिका में प्रविष्ट करना - इस पुनर्सयोजित वेक्टर को उचित पोशद कोहिका में प्रविष्ट करा दिया जाता हैं। इस प्रक्रिया को ट्रांसफॉर्मेशन (transformation) कहते है। वेक्टर (vector), जिसमे बाहा `D.N.A` होता है , पोशद कोशिका में प्रवेश क्र जाता है। प्रायः ईस्केरीकिया कोलै कोशिका (Escherichia coli) जीवाणु का उपयोग पोशद कोशिका के रूप में किया जाता है। (4) पोशद कोशिका का संवर्धन - जीवाणु कोशिका को इसके संवर्धन माध्यम से उगाया जाता है। धीरे - धीरे कोशिकाओं में निवह बन जाते है। ये सभी कोशिकाएँ एक-ही सत्र्से आती है। अतःएक - दूसरे की समरूप होती है। इन कोशिकाओं की स्क्रीनिंग (screening) की जाती है। जिन कोशिकाओं में पुनर्सयोजित प्लाज्मिड स्थापित हो गए है अर्थात कोशिका ट्रांसफोर्मेड (transformed) हो गई है, उन्हें अलग करके उचित माध्यम में उगते है जिससे उनकी संख्या में वृद्धि हो जाए। पोशद कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि के साथ ही इच्छित पुनर्सयोजित `D.N.A` खण्डो की संख्या में वृद्धि होती है। (5) `D.N.A` खण्ड या उसके उत्पाद का पृथक्क़रन - `D.N.A` खण्ड, जिसे जीवाणु कोशिका में प्रविष्ट कराया गया था, पोषद कोशिका के भीतर अभिव्यक्त होता है। इस प्रकार जीन के उत्पाद का निर्माण होता रहता है। वांछनीय डी०एन०ए० खण्डो के पृथक्क़रण हेतु जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, वांछनीय जीन अथवा डी०एन०ए० खण्डो की पहचान हेतु सर्दन ब्लॉटिंग (Southern Blotting) डी०एन०ए० से प्राप्त आर०एन०ए० की पहचान हेतु नॉर्दन ब्लॉटिंग (Northern Blotting) तथा आर०एन०ए० से प्राप्त प्रोटीन की पहचान हेतु वेस्टर्न ब्लॉटिंग (Western Blotting) तकनीक का प्रयोग करते है। पुनर्योगज डी०एन०ए० खण्डो की असंख्य प्रतियाँ हेतु बनाने हेतु पॉलिमरेज़ शृंखला अभिक्रिया (POlymerase Chain Reation : PCR) नामक तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
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