स्वच्छजलीय जीवों में संकुचनशील रिक्तिकाएँ पाई जाती हैं जबकि अधिकांश समुद्री जल वाले जीवों में इनका अभाव होता है, क्यों ?
लिखित उत्तर
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शाकाहारिता (Herbivory)-पौधे शाकाहारी प्राणियों से अपनी सुरक्षा करने के लिए स्थान परिवर्तन नहीं कर सकते हैं। अत: शाकाहारियों से बचने के लिए पौधों में आकारिकीय (morphological) तथा रासायनिक । (chemical) रक्षा विधियाँ पायी जाती हैं। रक्षा के लिए सबसे सामान्य आकारिकीय सुरक्षा साधन काँटे (spines) हैं, जैसे-एकेशिया, कैक्टस आदि में। पौधों के तनों व पत्तियों पर पाए जाने वाले सघन रोम कीटों के मुखांगों को मुख्य पादप ऊतक तक पहुँच नहीं बनाने देते। अत: यह एक सुरक्षात्मक उपाय है। अनेक पादपों में ऐसे रसायन उत्पादित एवं भण्डारित किए जाते हैं जिनको खाने पर शाकाहारी बीमार हो जाते हैं, इनकी पाचन क्रिया मन्द हो जाती है, जनन अंग प्रभावित होते हैं और कभी-कभी शाकाहारी की मृत्यु भी हो जाती है, जैसे-कैलोट्रोपिस खरपतवार (Calotropis weed) में विषाक्त ग्लाइकोसाइड (glycosides) होता है। यह हृदयघातक होता है। इस कारण बकरी या अन्य पशु इस खरपतवार को नहीं खाते। पौधों से प्राप्त विभिन्न रासायनिक पदार्थ जैसे निकोटीन, कैफीन, अफीम, स्ट्रिकनीन आदि वास्तव में शाकाहारिता से बचने की रक्षा विधि है। (ख) कीटपीड़कों के प्रबन्ध के लिए अपनाए गए जैव नियन्त्रण उपाय परभक्षी की शिकार समष्टि नियमन की योग्यता पर आधारित पारिस्थितिक सिद्धान्त हैं। ऑस्ट्रेलिया में नागफनी को नियन्त्रित करने के लिए एक प्रकार के परभक्षी शलभ कैक्टोब्लास्टिस कैक्टोरम का उपयोग किया गया। एफिड के नियन्त्रण के लिए लेडी बर्ड का प्रयोग आदि। - इसी प्रकार कीटों के परजीवियों अथवा रोगजनकों का भी प्रयोग किया जाता है जैसे आर्थोपोड्स के परजीवी बैक्युलोवाइरस। (ग) स्वच्छ जलीय जीवों में कोशिकाओं की परासरणी सान्द्रता चूँकि बाह्य जल (स्वच्छ जल) से अधिक होती है अत: अन्त:परासरण के कारण जल लगातार उनके शरीर में प्रवेश करता है। इससे उनके कोशिकाद्रव्य के तनु होने का खतरा हो सकता है तथा जिससे आन्तरिक पर्यावरण को बनाए रखना सम्भव नहीं होगा। अत: परासरण नियमन (osmoregulation) के लिए इनके शरीर में संकुचनशील-रिक्तिकाएँ (contractile vacuole) पायी जाती हैं, जो शरीर में प्रविष्ट जल की अतिरिक्त मात्रा को नियमित रूप से बाहर निकालती रहती हैं। समुद्री जल में रहने वाले जीवों में बाह्य पर्यावरण तनु नहीं होता अत: संकुचनशील रिक्तिकाओं की आवश्यकता नहीं होती।
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